ओवैसी को संसद में आया गुस्सा: टैरिफ पर ट्रंप को लिया आड़े हाथ, पूछा- भारत को बताने वाला गोरी चमड़ी वाला कौन?
रूसी तेल, अमेरिकी टैरिफ और भारत की व्यापार नीति...इन तीनों मुद्दे पर छिड़ी बहस ने बुधवार को फिर से संसद का माहौल गर्म कर दिया। इसी दौरान असदुद्दीन ओवैसी की ओर से भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते को लेकर उठाए गए सवालों ने भी खूब सुर्खियां बटोरी। आइए जानते हैं कि ओवैसी ने लोकसभा में ट्रंप को लेकर क्या कहा?
विस्तार
लोकसभा में बुधवार का दिन भी हंगामे से भरा पूरा रहा। बजट, रूसी तेल और अमेरिका के साथ व्यापार समझौता समेत कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने दिखे। हालांकि इस दौरान एआईएमआईएम प्रमुख और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी का रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिका की चेतावनी और डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर सवाल खड़े करना भी खूब चर्चा में रहा। ओवैसी ने इसे इसे भारत की संप्रभुता का अपमान बताते हुए सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।
दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अगर भारत सीधे या परोक्ष रूप से रूस से तेल खरीदता है तो उस पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा। इसी मुद्दे पर लोकसभा में बोलते हुए ओवैसी ने ट्रंप को आड़े हथ लिया। ओवैसी ने तीखे अंदाज में पूछा कि ये कौन गोरी चमड़ी वाला है, जो वहां बैठकर हमें हुकुम देगा? हमारा जिससे मन करेगा उससे तेल खरीदेंगे, वो कई नहीं होते हमें बताने वाले।
रूस से तेल खरीद पर क्या बोले ओवैसी?
लोकसभा में चर्चा के दौरान ओवैसी ने कहा कि दुर्भाग्य है कि अभी तक भारत सरकार इस पर चुप है? कोई भी विदेशी नेता यह तय नहीं कर सकता कि भारत किस देश से तेल खरीदेगा। उन्होंने कहा कि देश ने आजादी इसलिए नहीं पाई थी कि कोई दूसरा देश बैठकर यह निर्देश दे कि भारत क्या खरीदे और क्या नहीं?
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केंद्र सरकार की चुप्पी पर भी उठाए सवाल
इसी दौरान ओवैसी ने केंद्र सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि वह इस मुद्दे पर चुप क्यों है और भारत अपने आत्मसम्मान से समझौता क्यों कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी जरूरत और राष्ट्रीय हित के आधार पर फैसले लेने चाहिए, न कि किसी बाहरी दबाव में। ओवैसी ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के अलावा यूरोपीय संघ के साथ होने वाली संधि पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत ने मेडिकल उपकरणों और उन्नत मशीनरी जैसे उत्पादों पर टैरिफ कम कर दिए हैं, जिससे विदेशी सामान भारतीय बाजार में आसानी से आएगा।
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टेक्सटाइल सेक्टर-बांग्लादेश के साथ क्या-क्या बोले ओवैसी?
उनके मुताबिक, इससे देश में उद्योगों के कमजोर होने और ‘डी-इंडस्ट्रियलाइजेशन’ का खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारत स्वतंत्र व्यापार समझौता कर रहा है या फिर मजबूरी में खरीदारी का आदेश स्वीकार कर रहा है। टेक्सटाइल सेक्टर का मुद्दा उठाते हुए ओवैसी ने कहा कि अमेरिका ने बांग्लादेश से शून्य टैरिफ पर कपास खरीदने की बात कही है। उन्होंने आशंका जताई कि इसका असर भिवंडी, मालेगांव और बनारस जैसे पावरलूम केंद्रों पर पड़ेगा। ओवैसी के अनुसार, भारत बांग्लादेश को लगभग 70 प्रतिशत कच्ची कपास की आपूर्ति करता है, ऐसे में यह फैसला भारतीय कपड़ा उद्योग को प्रभावित कर सकता है।
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