हर 10 में से 7 मरीज चाहते हैं तेज और सटीक इलाज, क्या AI बन सकता है भारत के हेल्थकेयर का गेमचेंजर?
AI Powered Healthcare Webinar: स्वास्थ्य क्षेत्र में AI पर काम कर रहे विशेषज्ञों को सीधे सुनने का मौका, अभी रजिस्टर करें। रजिस्ट्रेशन लिंक - AI - Powered Healthcare Policy, Practice & Patient Trust
विस्तार
भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, तो दूसरी ओर डॉक्टरों, अस्पतालों और संसाधनों की सीमाएं भी साफ दिखाई देती हैं। ऐसे में Artificial Intelligence (AI) आधारित हेल्थकेयर अब सिर्फ एक तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि बेहतर और भरोसेमंद इलाज की जरूरत बन चुका है। आज हर 10 में से 7 मरीज तेज और सटीक इलाज चाहते हैं। ऐसे मरीजों के लिए AI एक गेमचेंजर साबित हो सकता है। AI की मदद से आज बीमारियों की जल्दी पहचान, सटीक डायग्नोसिस, डेटा-आधारित ट्रीटमेंट प्लान और रिमोट मॉनिटरिंग संभव हो रही है। रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी, कैंसर स्क्रीनिंग और क्रिटिकल केयर जैसे क्षेत्रों में AI ने अपनी उपयोगिता भी साबित की है।
हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत की स्वास्थ्य प्रणाली इस तकनीकी बदलाव को पूरी तरह अपनाने के लिए तैयार है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि AI को केवल मशीन या सॉफ्टवेयर के रूप में नहीं, बल्कि डॉक्टरों के सहयोगी टूल के रूप में देखा जाना चाहिए। AI डॉक्टरों को निर्णय लेने में मदद कर सकता है, लेकिन अंतिम फैसला और मानवीय संवेदना हमेशा चिकित्सक की ही भूमिका रहेगी। यही संतुलन AI आधारित हेल्थकेयर की सफलता की कुंजी है। इसके साथ ही नीति (Policy) का सवाल भी उतना ही अहम है। मरीजों का डेटा, उसकी सुरक्षा, गोपनीयता और एथिकल उपयोग- ये सभी विषय गंभीर चर्चा की मांग करते हैं। बिना स्पष्ट गाइडलाइंस और मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के AI का अंधाधुंध उपयोग भविष्य में मरीजों के भरोसे को नुकसान पहुंचा सकता है। आज कई लोग इंटरनेट और AI टूल्स पर लक्षण डालकर इलाज खोजने लगे हैं, जबकि गंभीर मामलों में डॉक्टर की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण बनी रहती है।
AI आधारित हेल्थकेयर का तीसरा और सबसे अहम स्तंभ है- मरीजों का भरोसा (Patient Trust)। तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो, अगर मरीज को यह भरोसा न हो कि उसका डेटा सुरक्षित है और इलाज मानवीय समझ के साथ हो रहा है, तो AI को व्यापक स्वीकार्यता नहीं मिल पाएगी। पारदर्शिता, संवाद और जागरूकता ही इस भरोसे को मजबूत कर सकती है।
इन्हीं महत्वपूर्ण सवालों और संभावनाओं पर चर्चा के लिए अमर उजाला ‘AI Powered Healthcare: Policy, Practice & Patient Trust’ विषय पर 26 फरवरी 2026 शाम 4 बजे एक विशेष वेबिनार AI - Powered Healthcare Policy, Practice & Patient Trust का आयोजन कर रहा है। यह संवाद न केवल डॉक्टरों और नीति-निर्माताओं के लिए, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि स्वास्थ्य का भविष्य हम सभी से जुड़ा हुआ है।
वेबिनार रजिस्ट्रेशन लिंक : AI - Powered Healthcare Policy, Practice & Patient Trust
वेबिनार में शामिल होने के फायदे
- स्वास्थ्य क्षेत्र में AI पर काम कर रहे विशेषज्ञों को सीधे सुनने का मौका
- देश में बीमारियों की early diagnosis कैसे संभव हो रही है, इस पर समझ
- AI, नीति और प्रैक्टिस के बीच संतुलन पर विशेषज्ञों की राय
- मरीजों के भरोसे और डेटा सुरक्षा से जुड़े अहम सवालों पर चर्चा
- मेडिकल स्टूडेंट्स, हेल्थ प्रोफेशनल्स और रिसर्चर्स के लिए सीखने का अवसर
- लाइव प्रश्न पूछने और विशेषज्ञों से जवाब पाने का मौका
अगर आप स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करते हैं, मेडिकल स्टूडेंट हैं, रिसर्चर हैं या हेल्थकेयर से जुड़ी किसी संस्था का हिस्सा हैं, तो यह वेबिनार आपके लिए खास है।
आज जब भारत डिजिटल हेल्थ मिशन और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन हेल्थकेयर की ओर बढ़ रहा है, तब ऐसे संवाद केवल समय की मांग नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आवश्यकता बन चुके हैं।
वेबिनार में शामिल होने के लिए दिए गए लिंक पर जाकर रजिस्ट्रेशन करें - Registration link : AI - Powered Healthcare Policy, Practice & Patient Trust