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विशेषाधिकार हनन: राहुल के खिलाफ प्रस्ताव नहीं लाएगी सरकार, लेकिन सदस्यता खत्म करने पर चर्चा चाहती है भाजपा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Thu, 12 Feb 2026 01:41 PM IST
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सार

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष  राहुल गांधी के खिलाफ सरकार विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव नहीं लाएगी। इसके बाद क्या राहुल गांधी की मुश्किलें पूरी तरह से खत्म हो गईं? या फिर अभी भी लोकसभा सदस्यता पर पड़ सकता है बड़ा असर? ये सवाल इसलिए क्योंकि सरकार ने उनके भाषण के कुछ आपत्तिजनक हिस्सों को हटाने का नोटिस दिया है। आइए पूरे घटनाक्रम को विस्तार से जानते हैं।

Government will not move a privilege motion against Rahul Gandhi, some parts of his speech may be removed
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हालिया भाषण को लेकर राजनीतिक विवाद सातवें आसमान पर पहुंच गया है। हालांकि अब यह भी साफ हो गया है कि राहुल गांधी के सामने से एक बड़ी मुसीबत टल गई है। इसका बड़ा कारण है कि राहुल गांधी के खिलाफ सरकार विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव नहीं लाएगी, लेकिन गौर करने वाली बात यह भी है कि यह मामला अभी तक पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने बुधवार को राहुल गांधी के द्वारा लोकसभा में दिए गए भाषण पर कड़ी आपत्ति जताते हुए विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की मांग की थी। 

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सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस मामले में सख्त कार्रवाई करने के इरादे में नहीं है। हालांकि, बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने कल लोकसभा में जो भाषण दिया था, उसमें कही गई कुछ बातें और आरोप प्रमाणित नहीं थे। ऐसे में संभावना इस बात की तेज हो गई है कि राहुल गांधी के लोकसभा में दिए गए भाषण के कुछ अंश सदन की कार्यवाही से हटाए जा सकते हैं।

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भाषण के कुछ हिस्से हटाने की मांग
भाजपा राहुल के भाषण कुछ हिस्सों को लेकर आपत्ति जता रही है। पार्टी के चीफ व्हिप संजय जायसवाल ने बजट चर्चा के दौरान राहुल गांधी द्वारा कही गई कुछ बातों को लोकसभा की कार्यवाही से हटाने का औपचारिक नोटिस दिया है। भाजपा का कहना है कि उनके कुछ बयान आपत्तिजनक और तथ्यों से परे हैं।


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निशिकांत दुबे का अलग प्रस्ताव, समझिए
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ एक अलग मूल प्रस्ताव दायर किया है। यह सामान्य नोटिस से अलग प्रक्रिया होती है। अगर लोकसभा अध्यक्ष इसे स्वीकार करते हैं, तो इस पर सदन में चर्चा और मतदान हो सकता है। ऐसे में प्रस्ताव पारित होने पर राहुल गांधी की संसद सदस्यता जा सकती है। 

लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र
बता दें कि इस पूरे मामले में निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर मांग की है कि राहुल गांधी के कथित ‘अनैतिक आचरण’ की जांच के लिए एक संसदीय समिति बनाई जाए। उन्होंने यह भी कहा है कि जरूरत पड़ने पर राहुल गांधी की सदस्यता खत्म करने पर विचार किया जाए। दुबे का आरोप है कि राहुल गांधी ने संसद के अंदर और बाहर ऐसे बयान दिए हैं, जिससे देश की एकता और संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंची है।

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पत्र में अप्रकाशित बयान से लेकर विदेश यात्रा तक का जिक्र
उन्होंने दावा किया कि 11 फरवरी के भाषण में राहुल ने पूर्व सेना प्रमुख की अप्रकाशित किताब का गलत संदर्भ देकर सेना, रक्षा मंत्रालय और प्रधानमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। दुबे ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी कई मंत्रालयों पर बिना सबूत के आरोप लगाते हैं। साथ ही उनकी विदेश यात्राओं और फंडिंग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। पत्र में इन मामलों की जांच की मांग की गई है।

कांग्रेन ने भी दिया करारा जवाब
गौरतलब है कि इस पूरे मामले पर कांग्रेस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने भाजपा पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के शब्दों को कार्यवाही से हटा दिया गया, जबकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समान बयान रिकॉर्ड में बने हुए हैं। वेणुगोपाल ने कहा कि पिछली बार राहुल गांधी की सदस्यता खत्म की गई थी, लेकिन जनता ने उन्हें और बड़े अंतर से चुनकर संसद में भेजा। उन्होंने कहा कि हमें किसी नोटिस से फर्क नहीं पड़ता। चाहें तो हमें फांसी पर लटका दो। फिलहाल मामला लोकसभा अध्यक्ष के पास है और आगे की कार्रवाई उनके फैसले पर निर्भर करेगी।

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