Babri Masjid: 'हम जानते हैं 6 दिसंबर को क्या हुआ था, सुप्रीम कोर्ट भी...', ओवैसी का बाबरी विध्वंस पर बड़ा बयान
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 6 दिसंबर 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस को याद करते हुए इसे ‘काला दिन’ बताया। उन्होंने कहा कि उस दिन सिर्फ एक मस्जिद नहीं गिराई गई, बल्कि भारतीय संविधान व कानून-व्यवस्था को अनदेखा किया गया।
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ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 6 दिसंबर को एक बार फिर बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर केंद्र और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 6 दिसंबर 1992 केवल एक मस्जिद का ढहाया जाना नहीं था, बल्कि भारतीय संविधान को कमजोर करने का दिन था, इसलिए यह तारीख हमेशा एक ब्लैक डे के रूप में याद की जाएगी।
1992 की घटना ने संविधान को कमजोर किया- ओवैसी
ओवैसी ने कहा कि आज 6 दिसंबर है और हम सभी जानते हैं कि 1992 में इसी दिन क्या हुआ था। उनके अनुसार पुलिस की मौजूदगी में बाबरी मस्जिद गिराई गई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी कानून का उल्लंघन माना है। उन्होंने प्रधानमंत्री के उस हालिया बयान पर सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि 500 साल पुराने जख्मों पर मरहम लगाया जा रहा है। ओवैसी ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि मस्जिद बनाने के लिए वहां कोई मंदिर नहीं तोड़ा गया था, तो ऐसे में प्रधानमंत्री का दावा किस आधार पर है?
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ओवैसी के मुताबिक असली जख्म यह है कि 6 दिसंबर 1992 को सिर्फ एक मस्जिद नहीं गिराई गई थी, बल्कि भारतीय संविधान और उसकी मूल भावना को कमजोर किया गया था। उन्होंने 6 दिसंबर को देश के लिए काला दिन बताया।
#WATCH | AIMIM chief Asaduddin Owaisi says, "...It is 6th December today. You and I know what happened on 6th December 1992...Babri Masjid was demolished in the presence of Police...Supreme Court said that Babri Masjid demolition was a violation of the rule of law...He recently… pic.twitter.com/SCL9UIHGad
— ANI (@ANI) December 6, 2025
जानिए बाबरी मस्जिद विध्वंस का इतिहास
गौरतलब है कि 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में स्थित 16वीं सदी की बाबरी मस्जिद को हजारों कारसेवकों की भीड़ ने ढहा दिया, जिससे देशभर में तनाव और हिंसा की लहर फैल गई। यह विवाद 1949 में मस्जिद के अंदर रामलला की मूर्ति मिलने से शुरू हुआ था, जिसके बाद वहां पूजा-अर्चना और मालिकाना हक को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई चली। 1980 के दशक में राम मंदिर आंदोलन ने गति पकड़ी और राजनीतिक रूप से बेहद प्रभावशाली मुद्दा बन गया। 1992 में सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद भीड़ टूट पड़ी और मस्जिद को कुछ ही घंटों में ध्वस्त कर दिया गया। इस घटना को सुप्रीम कोर्ट ने कानून का खुला उल्लंघन बताया। वर्षों की सुनवाई के बाद 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने विवादित भूमि पर राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया और मस्जिद के लिए अयोध्या में ही दूसरी जगह पांच एकड़ जमीन देने का निर्देश दिया। बाबरी विध्वंस आज भी भारत के सबसे संवेदनशील और ऐतिहासिक घटनाक्रमों में से एक माना जाता है।
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