Explainer: किन लोगों को मिलता है हथियार का लाइसेंस, क्या फ्लाइट में ले जा सकते हैं पिस्टल? जानें सभी नियम
वाराणसी एयरपोर्ट पर हाल ही में एक यात्री की लाइसेंसी पिस्टल से स्क्रीनिंग के दौरान अचानक गोली चल गई, जिसमें दो एयरपोर्ट कर्मचारी घायल हो गए। इस घटना के बाद लाइसेंसी हथियार रखने, सार्वजनिक जगह पर ले जाने और फ्लाइट में हथियार ले जाने के नियमों को लेकर सवाल उठे हैं। आखिर लाइसेंसी पिस्टल के लिए क्या नियम हैं और एयरपोर्ट पर क्या प्रक्रिया अपनानी होती है? आइए विस्तार से जानते हैं।
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विस्तार
वाराणसी एयरपोर्ट पर रविवार को मुंबई जाने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट में सवार होने से पहले एक यात्री की लाइसेंस वाली पिस्टल से अचानक गोली चल गई। गोली चलने से एयरपोर्ट स्टाफ के दो लोग घायल हो गए। यात्री को पुलिस ने हिरासत में लिया। नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) मामले की जांच कर रहा है। इस घटना के बाद सवाल उठता है कि आर्म्स रूल्स क्या कहते हैं? लाइसेंस वाले हथियार को लेकर क्या नियम है? यह कैसे किसी व्यक्ति को मिलता है? 2019 में क्या संशोधन किया गया? फ्लाइट में हथियार ले जा सकते हैं कि नहीं? इसे लेकर क्या नियम है? आइए जानते हैं...
वाराणसी एयरपोर्ट पर क्या हुआ?
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, रविवार सुबह करीब 9:30 बजे कमलेश केदारनाथ राय वाराणसी से मुंबई जाने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX 1810 से यात्रा करने वाले थे। उन्होंने चेक-इन काउंटर पर अपनी लाइसेंसी 7.62 एमएम पिस्टल और 21 जिंदा कारतूस होने की जानकारी दी।
इसके बाद उन्हें अनिवार्य सुरक्षा औपचारिकताओं के लिए निर्धारित स्क्रीनिंग क्षेत्र में ले जाया गया। हथियार की जांच और हैंडलिंग के दौरान एक राउंड अचानक चल गया। गोली दो स्क्रीनिंग कर्मचारियों रोहित राज और सुमन कुमारी को लगी, जिससे दोनों घायल हो गए। दोनों कर्मचारियों को तत्काल इलाज के लिए ले जाया गया। स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई और यात्री को जांच व आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए हिरासत में लिया गया। बीसीएएस घटना की जांच कर रहा है। इसमें यह देखा जा रहा है कि लाइसेंसी हथियार की हैंडलिंग और एयरपोर्ट पर उसके कैरी करने से जुड़ी निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं।
आर्म्स रूल्स क्या हैं?
आर्म्स रूल्स, 2016 भारत में हथियारों और उनके लाइसेंस से जुड़े नियमों का सेट है। ये नियम आर्म्स एक्ट, 1959 के तहत बनाए गए हैं। इनमें हथियार का लाइसेंस देने, आवेदन, दस्तावेज, लाइसेंस की वैधता, सार्वजनिक जगह पर हथियार ले जाने और नियम तोड़ने पर कार्रवाई से जुड़े प्रावधान हैं।
बंदूक का लाइसेंस किन लोगों को मिल सकता है?
लाइसेंस हर उस व्यक्ति को नहीं मिलता जो बंदूक खरीदना चाहता है। गृह मंत्रालय के अनुसार, अनुमत श्रेणी के हथियारों के लिए लाइसेंस पर विचार करते समय कुछ प्रमुख श्रेणियां हैं।
- पहली श्रेणी में ऐसे लोग आते हैं जिन्हें अपनी जान या संपत्ति की सुरक्षा के लिए वास्तविक जरूरत हो। यह जरूरत उनके व्यवसाय, पेशे, नौकरी या दूसरी परिस्थितियों से जुड़ी हो सकती है।
- दूसरी श्रेणी में समर्पित खिलाड़ी आते हैं। इसके लिए खिलाड़ी का कम से कम दो साल से किसी लाइसेंस प्राप्त शूटिंग क्लब या राइफल एसोसिएशन का सक्रिय सदस्य होना और खेल के तौर पर निशानेबाजी करना जरूरी है।
- तीसरी श्रेणी में रक्षा बलों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों या राज्य पुलिस बल में वर्तमान या पूर्व सेवा कर चुके लोग आते हैं, बशर्ते उन्हें अपनी जान या संपत्ति की सुरक्षा के लिए वास्तविक जरूरत हो। यानी केवल यह कहना कि व्यक्ति को बंदूक चाहिए, लाइसेंस मिलने का आधार नहीं है। संबंधित लाइसेंसिंग अथॉरिटी आवेदन, पुलिस रिपोर्ट और अपनी जांच के आधार पर फैसला करती है।
लाइसेंस के लिए आवेदन कैसे किया जाता है?
आर्म्स रूल्स, 2016 में अलग-अलग तरह के लाइसेंस के लिए फॉर्म ए-1 से ए-14 तक निर्धारित किए गए हैं। आवेदक को जिस प्रकार के लाइसेंस की जरूरत है, उसके अनुसार संबंधित फॉर्म का इस्तेमाल करना होता है।
आवेदन के साथ कौन-कौन से दस्तावेज देने होते हैं?
- फॉर्म ए-1 के आवेदन के साथ कई दस्तावेज देने होते हैं। इनमें चार हालिया पासपोर्ट साइज फोटो, जन्मतिथि का प्रमाण और पहचान प्रमाण शामिल हैं। पहचान के लिए आधार कार्ड दिया जा सकता है।
- अगर आधार कार्ड उपलब्ध नहीं है तो निर्धारित घोषणा के साथ पासपोर्ट, वोटर आईडी, पैन कार्ड या कर्मचारी पहचान पत्र जैसे वैकल्पिक दस्तावेज दिए जा सकते हैं।
- जरूरत के अनुसार निवास का प्रमाण भी देना होता है। इसके लिए वोटर आईडी, बिजली का बिल, टेलीफोन बिल, किरायानामा या संपत्ति से जुड़े दस्तावेज इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
- इसके अलावा हथियार को सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल और सुरक्षित रखने से संबंधित लिखित शपथ या अंडरटेकिंग भी देनी होती है।
- पेशेवर श्रेणी के आवेदकों को संबंधित शैक्षणिक और पेशेवर योग्यता के दस्तावेज देने पड़ सकते हैं।
- मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक फिटनेस का मेडिकल प्रमाणपत्र भी जरूरी है, जिसमें यह उल्लेख होना चाहिए कि आवेदक नशीले पदार्थों पर निर्भर नहीं है।
- कुछ विशेष प्रकार के लाइसेंस के लिए अतिरिक्त दस्तावेज और अनुमति भी जरूरी हो सकती है।
लाइसेंस मिलने के बाद बंदूक कब खरीदी जा सकती है?
नया लाइसेंस मिलने या पहले से रखी बंदूक की बिक्री होने की स्थिति में बंदूक हासिल करने के लिए दो साल का समय निर्धारित है। इस अवधि को एक साल और बढ़ाया जा सकता है।
क्या हर हथियार का लाइसेंस पूरे भारत में मान्य होता है?
नहीं। हर लाइसेंस अपने आप पूरे भारत में मान्य नहीं होता। ऑल इंडिया वैधता के लिए अलग व्यवस्था है। कुछ श्रेणियों के लोगों के लिए जिला मजिस्ट्रेट ऑल इंडिया वैधता दे सकते हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री और सांसद, रक्षा बलों व केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कर्मचारी, अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी, ऐसे सरकारी कर्मचारी जिनकी नौकरी में देश में कहीं भी सेवा करने की जिम्मेदारी हो और कुछ समर्पित खिलाड़ी शामिल हैं। अन्य मामलों में ऑल इंडिया वैधता देने का अधिकार राज्य सरकार के पास होता है। इसके लिए संबंधित जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से आवेदन किया जाता है और राज्य सरकार इस पर फैसला करती है।
सार्वजनिक जगह पर लाइसेंसी बंदूक कैसे लेकर चल सकते हैं?
आर्म्स रूल्स, 2016 के रूल 32 में सार्वजनिक जगह पर हथियार ले जाने के तरीके के बारे में नियम दिए गए हैं। कोई व्यक्ति सार्वजनिक जगह पर हथियार तभी ले जा सकता है जब उसे निर्धारित तरीके से रखा गया हो।
पिस्टल या रिवॉल्वर को कैसे रखना होगा?
पिस्टल या रिवॉल्वर को उसके लिए बने होल्स्टर या इसी तरह के होल्डर में रखा जा सकता है, जो व्यक्ति के शरीर से जुड़ा हो। इसे रक्सैक या इसी तरह के होल्डर में भी रखा जा सकता है।
दूसरी तरह के हथियार के लिए क्या नियम है?
पिस्टल और रिवॉल्वर के अलावा दूसरे हथियार को उसके लिए बनाए गए उपयुक्त होल्डर में रखना होगा।
क्या बंदूक को खुले में दिखा सकते हैं?
नहीं। सार्वजनिक जगह या फायरआर्म-फ्री जोन में बंदूक दिखाना, लहराना या डराने के लिए उसका प्रदर्शन करना नियमों के खिलाफ है। इसी तरह बंदूक या खाली फायर करने वाली गन को चलाना भी प्रतिबंधित है।
अगर कोई व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उसका हथियार लाइसेंस रद्द किया जा सकता है और बंदूक जब्त की जा सकती है। इसके अलावा आर्म्स एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई और सजा भी हो सकती है।
अगर लाइसेंसधारी दूसरे शहर में चला जाए तो क्या होगा?
अगर फॉर्म III लाइसेंस रखने वाला व्यक्ति अपना निवास बदलता है और लाइसेंस वाली बंदूक भी नए स्थान पर ले जाता है, तो छह महीने से ज्यादा समय तक वहां रहने की स्थिति में उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत नए लाइसेंसिंग अथॉरिटी को इसकी जानकारी देनी होती है। इसके लिए फॉर्म बी-1 के जरिए सूचना दी जाती है। नया लाइसेंसिंग अथॉरिटी आवेदन की तारीख से 15 दिनों के भीतर पंजीकरण करता है। यही प्रक्रिया तब भी लागू होती है जब व्यक्ति उसी लाइसेंसिंग अथॉरिटी के क्षेत्र में किसी दूसरे पुलिस स्टेशन के इलाके में अपना निवास बदलता है।
भारत में कितने लाइसेंसी हथियार हैं?
गृह मंत्रालय ने 9 जुलाई 2019 को लोकसभा में बताया था कि सरकार ने हथियार लाइसेंस का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया है। नेशनल डेटाबेस ऑफ आर्म्स लाइसेंस-आर्म्स लाइसेंस सिस्टम (NDAL-ALIS) पोर्टल पर 3 जुलाई 2019 तक 36,64,762 हथियार लाइसेंस दर्ज थे।
आर्म्स एक्ट में क्या बदलाव किए गए?
आर्म्स एक्ट, 1959 में 2019 में संशोधन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य लाइसेंसी हथियारों की संख्या सीमित करना और अवैध हथियारों से जुड़े अपराधों पर सख्ती बढ़ाना था।
- एक व्यक्ति के पास रखे जा सकने वाले लाइसेंसी हथियारों की सीमा तीन से घटाकर एक कर दी गई।
- हथियार लाइसेंस की अवधि तीन साल से बढ़ाकर पांच साल कर दी गई।
- शादी, धार्मिक समारोह या सार्वजनिक कार्यक्रम में ऐसी गोलीबारी, जिससे किसी की जान या सुरक्षा को खतरा हो, को अपराध बनाया गया।
- इसके लिए दो साल तक की जेल, एक लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
- अवैध हथियारों के निर्माण, बिक्री, खरीद और तस्करी जैसे अपराधों में सजा बढ़ाई गई।
- सरकार को हथियार और गोला-बारूद को निर्माता से लेकर खरीदार तक ट्रैक करने के लिए नियम बनाने की शक्ति दी गई।
अब समझिए फ्लाइट में बंदूक ले जाने के नियम क्या है?
लाइसेंसी बंदूक को लेकर हवाई यात्रा के नियम सामान्य तौर पर सार्वजनिक जगह पर हथियार ले जाने के नियमों से अलग और ज्यादा सख्त होते हैं। एयर इंडिया की आधिकारिक गाइडलाइन में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक से जुड़े सामान के लिए अलग नियम दिए गए हैं।
क्या बंदूक केबिन में ले जा सकते हैं?
नहीं। एयर इंडिया के अनुसार हथियार को केबिन में ले जाने की अनुमति नहीं है। इसे चेक-इन बैगेज के तौर पर ले जाना होता है। लाइसेंस वाले हथियार ले जाने वाले वास्तविक या नियमित यात्री और खेल खिलाड़ी इसके लिए पात्र हो सकते हैं, लेकिन बंदूक लाइसेंसी होनी चाहिए और संबंधित हथियार लाइसेंस में दर्ज होना चाहिए। इसलिए सिर्फ हथियार का लाइसेंस होना पर्याप्त नहीं है। एयरलाइन के नियमों के अनुसार हथियार का लाइसेंस में दर्ज होना भी जरूरी है।
बंदूक को कहां रखना होगा?
बंदूक को केबिन या हाथ के सामान में नहीं रखा जा सकता। इसे चेक-इन बैगेज के रूप में देना होता है।
एयरपोर्ट पर पर क्या बताना जरूरी है?
लाइसेंसी बंदूक और गोला-बारूद लेकर यात्रा करने वाले यात्री को सुरक्षा जांच से पहले इसकी जानकारी देनी होती है। यानी हथियार को सामान्य सामान की तरह छिपाकर चेक-इन नहीं किया जा सकता। यात्री को एयरलाइन और सुरक्षा प्रक्रिया के अनुसार इसकी जानकारी देनी होती है।
वाराणसी की घटना में भी यात्री ने चेक-इन काउंटर पर अपनी लाइसेंसी पिस्टल और कारतूस के बारे में जानकारी दी थी। इसके बाद उसे निर्धारित स्क्रीनिंग प्रक्रिया से गुजरना था।
कितने कारतूस ले जा सकते हैं?
एयर इंडिया के अनुसार लाइसेंस में जितनी मात्रा की अनुमति है, उतने कारतूस ले जाए जा सकते हैं। हालांकि गोला-बारूद का कुल वजन पांच किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए। यह सीमा कुल सकल वजन के आधार पर है।
खिलाड़ियों के लिए क्या अलग नियम हैं?
अगर कोई खिलाड़ी खेल प्रतियोगिता या प्रशिक्षण के लिए यात्रा कर रहा है तो उसके लिए अतिरिक्त शर्तें लागू होती हैं। ऐसे मामले में बंदूक खाली यानी बिना गोली के होनी चाहिए। इसे कठोर और लॉक किए जा सकने वाले डिब्बे में रखना होता है। गोला-बारूद को फाइबर, लकड़ी या धातु के डिब्बे या गोला-बारूद रखने के लिए बनाए गए विशेष पैकेज में सुरक्षित रखना होता है।
एयर इंडिया की गाइडलाइन में एक से ज्यादा लाइसेंसी हथियार और 50 से ज्यादा कारतूस ले जाने की स्थिति का भी उल्लेख है। ऐसी स्थिति में कुल गोला-बारूद का वजन 5 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए। इसके लिए संबंधित सरकारी संस्था या खेल संस्था का फोटो पहचान पत्र और खेल संस्था के अध्यक्ष या सचिव की ओर से हथियार तथा गोला-बारूद ले जाने का प्रमाणपत्र भी मांगा गया है।
क्या बंदूक के हिस्से भी फ्लाइट में ले जा सकते हैं?
एयर इंडिया ने बंदूक और आग्नेयास्त्र के हिस्सों को भी प्रतिबंधित सामान की सूची में रखा है। इनके लिए केबिन में ले जाने की अनुमति नहीं है, जबकि चेक-इन बैगेज में इन्हें ले जाने की अनुमति दी गई है।
किन हथियारों और सामान की अनुमति नहीं है?
एयर इंडिया की सूची में कुछ हथियार और विस्फोटक सामान पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। इनमें छिपाकर रखी जाने वाली बंदूक, फ्लेयर गन, हथगोले, प्लास्टिक विस्फोटक, हारपून गन, फ्यूज, बारूदी सुरंग और कुछ सैन्य विस्फोटक सामग्री शामिल हैं। ब्लैक पाउडर और ब्लैक पाउडर वाली बंदूक में इस्तेमाल होने वाले परकशन कैप को भी केबिन या चेक-इन बैगेज में ले जाने की अनुमति नहीं है।