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'अब है दो-तिहाई बहुमत': महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर अठावले का बड़ा दावा, कहा- मानसून सत्र में मिलेगा रास्ता

Thu, 16 Jul 2026 09:41 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी पीटीआई, हैदराबाद
पीटीआई, हैदराबाद Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Thu, 16 Jul 2026 09:41 AM IST
सार

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने दावा किया कि एनडीए के पास अब दो-तिहाई बहुमत है, इसलिए संसद के मानसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पारित हो जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष से समर्थन की अपील भी की। 

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Athawale make bold claim regarding Women Reservation and Delimitation Bill,says will be found Monsoon Session.
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने विश्वास व्यक्त किया है कि महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक संसद के आगामी मानसून सत्र के दौरान पारित हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि संसद के पिछले सत्र में संविधान संशोधन विधेयकों को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और टीएमसी ने पराजित कर दिया था।

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केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा?
उन्होंने बुधवार को यहां पत्रकारों से कहा कि अब एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत है और आगामी सत्र में महिला आरक्षण विधेयक पेश किया जाएगा। इसके साथ ही 2029 के लोकसभा चुनावों में महिलाओं को आरक्षण मिलेगा। उन्होंने कहा, 'परिसीमन हर 30-35 साल में किया जाता है। परिसीमन भी आवश्यक है।' उन्होंने कांग्रेस और अन्य पार्टियों से विधेयकों को पारित कराने में अपना समर्थन देने की अपील की।

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केंद्रीय मंत्री ने क्या दावा किया? 
महाराष्ट्र के अनुभवी राजनेता, जो भाजपा की सहयोगी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) के प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सदस्यों द्वारा एनडीए का समर्थन करने और डीएमके के कांग्रेस से अलग होने के मद्देनजर इन विधेयकों के पारित होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, 'हमारे पास दो तिहाई बहुमत है। महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक पारित हो जाएंगे।'

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क्या है पूरा मामला? 
17 अप्रैल को संसद के विस्तारित सत्र के दौरान, विधानसभाओं में 2029 से महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने और लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए लाया गया संविधान संशोधन विधेयक निचले सदन में हार गया, जिसमें 298 सदस्यों ने विधेयक के समर्थन में और 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। मतदान करने वाले 528 सदस्यों में से, विधेयक को दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी।

 

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