{"_id":"69e7b4e80686a4b3f309c067","slug":"beml-secures-defence-ministry-order-for-trawl-assemblies-india-2026-04-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"रक्षा क्षेत्र में भारत की छलांग: BEML को मिला ₹590 करोड़ का ऑर्डर, बारूदी सुरंगों का काल बनेगी ट्रॉल असेंबली","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
रक्षा क्षेत्र में भारत की छलांग: BEML को मिला ₹590 करोड़ का ऑर्डर, बारूदी सुरंगों का काल बनेगी ट्रॉल असेंबली
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Tue, 21 Apr 2026 11:03 PM IST
विज्ञापन
सार
रक्षा मंत्रालय ने ₹590 करोड़ के निवेश के साथ भारतीय सेना के टी-72 और टी-90 टैंकों के लिए स्वदेशी ट्रॉल सिस्टम का ऑर्डर दिया है। बीईएमएल और डीआरडीओ की ओर से विकसित यह तकनीक बारूदी सुरंगों को साफ कर सेना को युद्ध क्षेत्र में सुरक्षित और तेज गति प्रदान करेगी।
रक्षा मंत्रालय
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
भारतीय सेना की युद्धक क्षमता और स्वदेशी तकनीक को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए रक्षा मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण रक्षा सौदे पर मुहर लगाई है। केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम बीईएमएल लिमिटेड को ₹590 करोड़ का अनुबंध सौंपा है। इस समझौते के तहत बीईएमएल भारतीय सेना के मुख्य युद्धक टैंक टी-72 और टी-90 के लिए अत्याधुनिक ट्रॉल असेंबली यानी बारूदी सुरंग हटाने वाला उपकरण की आपूर्ति करेगा।
नई दिल्ली में आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय और बीईएमएल के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच इस अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए। यह कदम न केवल सेना की आक्रामक क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मजबूती प्रदान करेगा।
डीआरडीओ और बीईएमएल की जुगलबंदी का परिणाम
इस रक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता इसका पूरी तरह स्वदेशी होना है। इन उन्नत माइन ट्रॉल्स को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), विशेष रूप से पुणे स्थित इसकी शाखा आरएंडडी इंजीनियर्स के सहयोग से डिजाइन और विकसित किया गया है। भारत युद्धक उपकरणों के लिए विदेशी आयात पर निर्भरता को तेजी से कम कर रहे हैं।
रणक्षेत्र में गेम-चेंजर साबित होगी यह तकनीक
युद्ध के मैदान में दुश्मन की ओर से बिछाई गई बारूदी सुरंगें सेना की गति को धीमा कर देती हैं। बीईएमएल के मार्फत निर्मित यह ट्रॉल सिस्टम टैंकों के आगे लगकर बारूदी सुरंगों को साफ करने का काम करता है। इसमें कई स्तरों वाली माइन-क्लियरिंग मशीनरी लगी है, जो सुरक्षित रास्ता बनाकर बख्तरबंद टुकड़ियों की आवाजाही को सुनिश्चित करती है। इससे न केवल टैंकों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि आधुनिक युद्ध क्षेत्रों में सेना की गतिशीलता और मारक क्षमता में भी निर्णायक बढ़त हासिल होगी।
यह हमारे लिए गौरव की बात- शांतनु रॉय
बीईएमएल लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक शांतनु रॉय ने कहा, 'रक्षा मंत्रालय से यह ऑर्डर प्राप्त करना हमारे लिए गौरव की बात है। यह बीईएमएल की कार्यक्षमता और गुणवत्ता पर सरकार के भरोसे को दर्शाता है। डीआरडीओ के साथ हमारा सहयोग भारत के रक्षा अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र की शक्ति का प्रमाण है।'
बताते चलें कि यह कंपनी रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करती है। कंपनी रक्षा, एयरोस्पेस, रेलवे, खनन और निर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रही है। बंगलूरू, मैसूर, केजीएफ और पलक्कड़ में स्थित अपनी अत्याधुनिक विनिर्माण इकाइयों और छह दशकों के अनुभव के साथ बीईएमल नवाचार का प्रतीक बन गई है।
Trending Videos
नई दिल्ली में आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय और बीईएमएल के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच इस अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए। यह कदम न केवल सेना की आक्रामक क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मजबूती प्रदान करेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
डीआरडीओ और बीईएमएल की जुगलबंदी का परिणाम
इस रक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता इसका पूरी तरह स्वदेशी होना है। इन उन्नत माइन ट्रॉल्स को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), विशेष रूप से पुणे स्थित इसकी शाखा आरएंडडी इंजीनियर्स के सहयोग से डिजाइन और विकसित किया गया है। भारत युद्धक उपकरणों के लिए विदेशी आयात पर निर्भरता को तेजी से कम कर रहे हैं।
रणक्षेत्र में गेम-चेंजर साबित होगी यह तकनीक
युद्ध के मैदान में दुश्मन की ओर से बिछाई गई बारूदी सुरंगें सेना की गति को धीमा कर देती हैं। बीईएमएल के मार्फत निर्मित यह ट्रॉल सिस्टम टैंकों के आगे लगकर बारूदी सुरंगों को साफ करने का काम करता है। इसमें कई स्तरों वाली माइन-क्लियरिंग मशीनरी लगी है, जो सुरक्षित रास्ता बनाकर बख्तरबंद टुकड़ियों की आवाजाही को सुनिश्चित करती है। इससे न केवल टैंकों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि आधुनिक युद्ध क्षेत्रों में सेना की गतिशीलता और मारक क्षमता में भी निर्णायक बढ़त हासिल होगी।
यह हमारे लिए गौरव की बात- शांतनु रॉय
बीईएमएल लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक शांतनु रॉय ने कहा, 'रक्षा मंत्रालय से यह ऑर्डर प्राप्त करना हमारे लिए गौरव की बात है। यह बीईएमएल की कार्यक्षमता और गुणवत्ता पर सरकार के भरोसे को दर्शाता है। डीआरडीओ के साथ हमारा सहयोग भारत के रक्षा अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र की शक्ति का प्रमाण है।'
बताते चलें कि यह कंपनी रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करती है। कंपनी रक्षा, एयरोस्पेस, रेलवे, खनन और निर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रही है। बंगलूरू, मैसूर, केजीएफ और पलक्कड़ में स्थित अपनी अत्याधुनिक विनिर्माण इकाइयों और छह दशकों के अनुभव के साथ बीईएमल नवाचार का प्रतीक बन गई है।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

कमेंट
कमेंट X