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Bengal ED Raids Row: कलकत्ता हाईकोर्ट ने की TMC की याचिका निस्तारित, अदालत से बोली ईडी- कुछ भी जब्त नहीं किया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 14 Jan 2026 01:17 PM IST
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सार
Bengal ED Raids Row: कोलकाता में जिस ईडी की छापेमारी से राजनीतिक बवाल शुरू हुआ है। उसी मामले पर बुधवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। जहां से ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी की याचिका को कोर्ट ने निस्तारित कर दिया है।
कलकत्ता हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
पश्चिम बंगाल में ईडी की छापेमारी से जुड़े विवाद पर कलकत्ता हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। ऐसे में बुधवार को सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट ने टीएमसी की उस याचिका का निपटारा कर दिया, जिसमें पार्टी की ओर से गोपनीय राजनीतिक डेटा की सुरक्षा की मांग की थी।
कोर्ट ने किया टीएमसी की याचिका का निपटारा
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बुधवार को टीएमसी की उस याचिका का निपटारा कर दिया, जिसमें उसने अपने डेटा की सुरक्षा की मांग की थी। न्यायालय ने कहा कि ईडी ने सूचित किया है कि उसने पिछले सप्ताह (08 जनवरी) की छापेमारी के दौरान आई-पैक डायरेक्टर प्रतीक जैन के कार्यालय और घर से कुछ भी जब्त नहीं किया है।
टीएमसी ने अदालत में याचिका दायर कर 8 जनवरी को इन दोनों परिसरों पर ईडी द्वारा की गई छापेमारी के दौरान जब्त किए गए व्यक्तिगत और राजनीतिक डेटा के संरक्षण का आदेश देने की मांग की थी। ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अदालत के समक्ष कहा कि एजेंसी ने इन दोनों परिसरों से कुछ भी जब्त नहीं किया है।
आगे विचार करने के लिए कुछ नहीं बचा: कोर्ट
टीएमसी की याचिका का निपटारा करते हुए न्यायमूर्ति सुव्रा घोष ने टिप्पणी की कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत दलीलों को देखते हुए पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा दायर इस याचिका में आगे विचार करने के लिए कुछ भी शेष नहीं बचा है।
ईडी की ओर से दायर याचिका भी स्थगित
न्यायमूर्ति घोष ने ईडी द्वारा दायर उस याचिका को भी स्थगित कर दिया, जिसमें 8 जनवरी को ममता बनर्जी पर जांच में बाधा डालने के आरोप लगाया था, जब छापेमारी के दौरान सीएम ममता बनर्जी सॉल्ट लेक स्थित राजनीतिक परामर्श फर्म के कार्यालय और दक्षिण कोलकाता के लाउडन स्ट्रीट स्थित फर्म के निदेशक के आवास पर गई थीं। उच्च न्यायालय ने केंद्रीय एजेंसी की याचिका को इस आधार पर स्थगित कर दिया कि ईडी ने सर्वोच्च न्यायालय में एक विशेष अनुमति याचिका दायर की है, जिसमें 'वर्तमान आवेदन के लगभग समान प्रार्थनाएं' शामिल हैं।
जो कुछ भी कब्जे में लिया, वो सीएम साथ ले गईं: एसवी राजू
ईडी की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू कहा कि केंद्रीय एजेंसी ने जो कुछ भी अपने कब्जे में लिया था, उसे सीएम ममता बनर्जी ले गईं। इससे पहले ईडी ने हाई कोर्ट को बताया कि पिछले हफ्ते आईपैक के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर हुई तलाशी के सिलसिले में दायर याचिकाओं को टाल दिया जाए। वहीं तृणमूल कांग्रेस के वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि पार्टी सिर्फ अपने डेटा की सुरक्षा चाहती है।
इससे पहले इस मामले की सुनवाई तय तारीख पर नहीं हो सकी थी, क्योंकि अदालत परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई थी। जिसके चलते 9 जनवरी को अदालत ने सुनवाई को स्थगित कर दिया था।
ईडी ने क्या कहा?
9 जनवरी को ईडी ने अपनी याचिका में दावा किया है कि इस घटना में राज्य के सर्वोच्च राजनीतिक नेतृत्व की सीधी भागीदारी थी और पुलिस बल का दुरुपयोग किया गया। एजेंसी ने अदालत से आग्रह किया है कि वह सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने और मुख्यमंत्री सहित सभी संलिप्त व्यक्तियों की भूमिका की जांच करने का निर्देश दे। एजेंसी ने कहा कि सीबीआई की जांच जरूरी है, क्योंकि कलकत्ता हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने लगातार यह माना है कि जहां राज्य में ऊंचे और शक्तिशाली लोग संज्ञेय अपराधों को करने में शामिल होते हैं, वहां जांच सीबीआई को ट्रांसफर कर दी जानी चाहिए।
ईडी ने सर्च वाली जगहों से अवैध रूप से और जबरदस्ती ले जाए गए सभी डिजिटल उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, स्टोरेज मीडिया और दस्तावेजों को तत्काल जब्त करने, सील करने, फोरेंसिक संरक्षण और ईडी की कानूनी हिरासत में वापस करने की भी मांग की थी।
टीएमसी ने भी दायर की थी याचिका
इस मामले को लेकर टीएमसी ने I-PAC पर ईडी की छापेमारी के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। टीएमसी की याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता टीएमसी बंगाल में एसआईआर के खिलाफ आवाज उठा रही है और विरोध कर रही है। इसलिए ईडी टीएमसी के पॉलिटिकल स्ट्रैटेजी ऑफिस (I-PAC) और को-फाउंडर के घर पर तलाशी और जब्ती कर रही है। टीएमसी की याचिका में यह भी कहा गया है कि एजेंसी ईडी ने गैर-कानूनी तरीके से गोपनीय डेटा जब्त किया है।
क्या है मामला?
ईडी ने गुरुवार (8 जनवरी) को कथित कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में I-PAC के सॉल्ट लेक ऑफिस और इसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की थी। एजेंसी का आरोप है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पुलिस की मदद से जैन के आवास में जबरन घुस गईं और अधिकारियों के मना करने के बावजूद अहम डिजिटल सबूत और दस्तावेज अपने साथ ले गईं। ईडी के मुताबिक, इस कारण तलाशी अभियान विफल हो गया और कोई जब्ती नहीं हो सकी।
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कोर्ट ने किया टीएमसी की याचिका का निपटारा
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बुधवार को टीएमसी की उस याचिका का निपटारा कर दिया, जिसमें उसने अपने डेटा की सुरक्षा की मांग की थी। न्यायालय ने कहा कि ईडी ने सूचित किया है कि उसने पिछले सप्ताह (08 जनवरी) की छापेमारी के दौरान आई-पैक डायरेक्टर प्रतीक जैन के कार्यालय और घर से कुछ भी जब्त नहीं किया है।
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टीएमसी ने अदालत में याचिका दायर कर 8 जनवरी को इन दोनों परिसरों पर ईडी द्वारा की गई छापेमारी के दौरान जब्त किए गए व्यक्तिगत और राजनीतिक डेटा के संरक्षण का आदेश देने की मांग की थी। ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अदालत के समक्ष कहा कि एजेंसी ने इन दोनों परिसरों से कुछ भी जब्त नहीं किया है।
आगे विचार करने के लिए कुछ नहीं बचा: कोर्ट
टीएमसी की याचिका का निपटारा करते हुए न्यायमूर्ति सुव्रा घोष ने टिप्पणी की कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत दलीलों को देखते हुए पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा दायर इस याचिका में आगे विचार करने के लिए कुछ भी शेष नहीं बचा है।
ईडी की ओर से दायर याचिका भी स्थगित
न्यायमूर्ति घोष ने ईडी द्वारा दायर उस याचिका को भी स्थगित कर दिया, जिसमें 8 जनवरी को ममता बनर्जी पर जांच में बाधा डालने के आरोप लगाया था, जब छापेमारी के दौरान सीएम ममता बनर्जी सॉल्ट लेक स्थित राजनीतिक परामर्श फर्म के कार्यालय और दक्षिण कोलकाता के लाउडन स्ट्रीट स्थित फर्म के निदेशक के आवास पर गई थीं। उच्च न्यायालय ने केंद्रीय एजेंसी की याचिका को इस आधार पर स्थगित कर दिया कि ईडी ने सर्वोच्च न्यायालय में एक विशेष अनुमति याचिका दायर की है, जिसमें 'वर्तमान आवेदन के लगभग समान प्रार्थनाएं' शामिल हैं।
जो कुछ भी कब्जे में लिया, वो सीएम साथ ले गईं: एसवी राजू
ईडी की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू कहा कि केंद्रीय एजेंसी ने जो कुछ भी अपने कब्जे में लिया था, उसे सीएम ममता बनर्जी ले गईं। इससे पहले ईडी ने हाई कोर्ट को बताया कि पिछले हफ्ते आईपैक के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर हुई तलाशी के सिलसिले में दायर याचिकाओं को टाल दिया जाए। वहीं तृणमूल कांग्रेस के वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि पार्टी सिर्फ अपने डेटा की सुरक्षा चाहती है।
इससे पहले इस मामले की सुनवाई तय तारीख पर नहीं हो सकी थी, क्योंकि अदालत परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई थी। जिसके चलते 9 जनवरी को अदालत ने सुनवाई को स्थगित कर दिया था।
ईडी ने क्या कहा?
9 जनवरी को ईडी ने अपनी याचिका में दावा किया है कि इस घटना में राज्य के सर्वोच्च राजनीतिक नेतृत्व की सीधी भागीदारी थी और पुलिस बल का दुरुपयोग किया गया। एजेंसी ने अदालत से आग्रह किया है कि वह सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने और मुख्यमंत्री सहित सभी संलिप्त व्यक्तियों की भूमिका की जांच करने का निर्देश दे। एजेंसी ने कहा कि सीबीआई की जांच जरूरी है, क्योंकि कलकत्ता हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने लगातार यह माना है कि जहां राज्य में ऊंचे और शक्तिशाली लोग संज्ञेय अपराधों को करने में शामिल होते हैं, वहां जांच सीबीआई को ट्रांसफर कर दी जानी चाहिए।
ईडी ने सर्च वाली जगहों से अवैध रूप से और जबरदस्ती ले जाए गए सभी डिजिटल उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, स्टोरेज मीडिया और दस्तावेजों को तत्काल जब्त करने, सील करने, फोरेंसिक संरक्षण और ईडी की कानूनी हिरासत में वापस करने की भी मांग की थी।
टीएमसी ने भी दायर की थी याचिका
इस मामले को लेकर टीएमसी ने I-PAC पर ईडी की छापेमारी के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। टीएमसी की याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता टीएमसी बंगाल में एसआईआर के खिलाफ आवाज उठा रही है और विरोध कर रही है। इसलिए ईडी टीएमसी के पॉलिटिकल स्ट्रैटेजी ऑफिस (I-PAC) और को-फाउंडर के घर पर तलाशी और जब्ती कर रही है। टीएमसी की याचिका में यह भी कहा गया है कि एजेंसी ईडी ने गैर-कानूनी तरीके से गोपनीय डेटा जब्त किया है।
क्या है मामला?
ईडी ने गुरुवार (8 जनवरी) को कथित कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में I-PAC के सॉल्ट लेक ऑफिस और इसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की थी। एजेंसी का आरोप है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पुलिस की मदद से जैन के आवास में जबरन घुस गईं और अधिकारियों के मना करने के बावजूद अहम डिजिटल सबूत और दस्तावेज अपने साथ ले गईं। ईडी के मुताबिक, इस कारण तलाशी अभियान विफल हो गया और कोई जब्ती नहीं हो सकी।