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बंगाल चुनाव: कॉलेज शिक्षकों की ड्यूटी पर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ चुनाव आयोग, डिवीजन बेंच में दी चुनौती

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: अमन तिवारी Updated Mon, 20 Apr 2026 07:23 PM IST
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सार

चुनाव आयोग ने कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में याचिका दायर की है। आयोग ने सिंगल बेंच के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें कॉलेज शिक्षकों को पीठासीन अधिकारी बनाने पर रोक लगाई गई थी। आयोग का कहना है कि पहले भी शिक्षक यह जिम्मेदारी निभाते रहे हैं। मामले की सुनवाई मंगलवार को हो सकती है।

Bengal Elections ECI challenged High Court decision on duties of college teachers before a Division Bench
कलकत्ता हाईकोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान कॉलेज शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी को लेकर कानूनी विवाद गहरा गया है। निर्वाचन आयोग ने सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में एक याचिका दायर की। आयोग ने सिंगल बेंच के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें कॉलेज शिक्षकों को पीठासीन अधिकारी नियुक्त करने के आदेश को रद्द कर दिया गया था।
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इससे पहले, 17 अप्रैल को कलकत्ता हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के जस्टिस कृष्णा राव ने एक अहम फैसला सुनाया था। उन्होंने आगामी दो चरणों के चुनाव के लिए कॉलेज शिक्षकों को पीठासीन अधिकारी बनाने के चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया था। हालांकि, कोर्ट ने यह साफ किया था कि जिन शिक्षकों ने इस काम के लिए अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ली है, उन्हें इस बार पीठासीन अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं देनी होंगी।
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जस्टिस राव ने अपने आदेश में चुनाव आयोग को एक और विकल्प दिया था। उन्होंने कहा था कि आयोग कॉलेज शिक्षकों को उनके सर्विस ग्रेड और वेतनमान के आधार पर चुनाव से जुड़े दूसरे कामों में नियुक्त कर सकता है। चुनाव आयोग ने अब इस फैसले के खिलाफ जस्टिस शम्पा सरकार और जस्टिस अजय कुमार गुप्ता की डिवीजन बेंच का रुख किया है। इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई होने की संभावना है। 

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पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब आयोग ने एक नोटिफिकेशन जारी कर असिस्टेंट प्रोफेसर रैंक के कॉलेज शिक्षकों को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया था। आयोग ने इन शिक्षकों के लिए विशेष ट्रेनिंग की घोषणा भी की थी और कई जगहों पर यह प्रक्रिया शुरू भी हो गई थी। इस फैसले के विरोध में कॉलेज शिक्षकों के एक समूह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी थी। शिक्षकों ने इस तरह की नियुक्तियों के औचित्य पर सवाल उठाए थे।

आयोग का तर्क है कि पिछले चुनावों में भी कॉलेज शिक्षकों को पीठासीन अधिकारी बनाया जाता रहा है। आयोग के मुताबिक, इससे पहले कभी भी इस प्रक्रिया को किसी ने चुनौती नहीं दी थी। पश्चिम बंगाल में अगले दो चरणों का मतदान 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होना है। वोटों की गिनती चार मई को की जाएगी। इसी दिन केरल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी के चुनावी नतीजे भी घोषित होंगे। अब सबकी नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

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