{"_id":"651a8bd22a9ae6635d0a9c94","slug":"bihar-caste-census-report-census-main-highlights-and-main-figure-analysis-2023-10-02","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Bihar Caste Census Report: 12 साल में बिहार की आबादी 25.5% बढ़ी, क्या आधे से भी कम रह गए सामान्य वर्ग के लोग?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Bihar Caste Census Report: 12 साल में बिहार की आबादी 25.5% बढ़ी, क्या आधे से भी कम रह गए सामान्य वर्ग के लोग?
Mon, 02 Oct 2023 03:50 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Mon, 02 Oct 2023 03:50 PM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
Bihar
- फोटो :
Amar Ujala
विस्तार
बिहार सरकार ने जाति आधारित जनगणना की रिपोर्ट सोमवार को जारी कर दी है। मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने यह रिपोर्ट जारी की। इसमें बताया गया है कि राज्य में सबसे ज्यादा पिछड़ा वर्ग की आबादी है। राज्य कुल 63 फीसदी आबादी इस वर्ग से आती है। इनमें 27 फीसदी आबादी पिछड़ा वर्ग के लोगों की है। वहीं, 36 फीसदी से ज्यादा अति पिछड़ी जातियों की आबादी है। वहीं, अनुसूचित जाति की आबादी करीब 20 फीसदी है। जो 2011 की जनगणना में महज 15.9 फीसदी थी। वहीं, सामान्य वर्ग के लोगों की आबादी 15 फीसदी है।
बड़ी बात यह है कि 2011 में हुई जनगणना में राज्य की कुल आबादी 10 करोड़ 40 लाख 99 हजार 452 थी। जो इस सर्वे में बढ़कर 13 करोड़ सात लाख 25 हजार 310 हो गई है। इस तरह बीते 12 साल में राज्य की आबादी में 25.5 फीसदी का इजाफा हुआ है। 2011 की जनगणना के मुताबिक राज्य की कुल आबादी में 15.9 फीसदी आबादी दलित और 1.3 फीसदी आबादी आदिवासी समाज की थी। नए जातिगत सर्व में दलित आबादी 19.65 फीसदी हो गई है। वहीं, आदिवासी आबादी का आंकड़ा भी बढ़कर 1.68 फीसदी हो गया है।
जहां तक पिछड़े वर्ग की बात है तो जातिगत जनगणना से पहले माना जाता था कि राज्य में 51 से 52 फीसदी आबादी पिछड़ी जातियों की है। जातिगत जनगणना में यह आंकड़ा 63.13 फीसदी से भी ज्यादा बताया गया है। वहीं, राज्य की 30 फीसदी आबादी सामान्य वर्ग के लोगों की मानी जाती थी। जातीय जगनणना में यह आंकड़ा महज 15.52 फीसदी ही बताया गया है।
बिहार की जाति आधारित जनगणना रिपोर्ट में क्या है? आज जारी हुए आंकड़े क्या कहते हैं? रिपोर्ट के खास बिंदु क्या हैं? आइये जानते हैं…
बिहार की जाति आधारित जनगणना रिपोर्ट क्या है?
सोमवार को बिहार जाति आधारित गणना-2022 कार्य के सर्वेक्षण के आंकडों को प्रकाशित कर दिया गया। सरकार ने कहा कि रिपोर्ट का उपयोग सर्वप्रथम समाज के सबसे निचले पायदान पर मौजूद लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के प्रयास के साथ समाज और राज्य के सर्वांगीण विकास में किया जा सकेगा।
दरअसल, बिहार विधानसभा और विधानपरिषद ने 18 फरवरी 2019 को राज्य में जाति आधारित गणना कराये जाने का प्रस्ताव पारित किया गया। इस संबंध में दोबारा एक मई 2022 को आयोजित सर्वदलीय बैठक में भी बिहार राज्य में जाति आधारित गणना कराने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया गया। इसके अगले ही दिन राज्य मंत्रिपरिषद् द्वारा लिए गये निर्णय के आधार पर बिहार राज्य में जाति आधारित गणना को दो चरणों में माह फरवरी, 2023 तक संपन्न कराने का निर्णय लिया गया।
सोमवार को बिहार जाति आधारित गणना-2022 कार्य के सर्वेक्षण के आंकडों को प्रकाशित कर दिया गया। सरकार ने कहा कि रिपोर्ट का उपयोग सर्वप्रथम समाज के सबसे निचले पायदान पर मौजूद लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के प्रयास के साथ समाज और राज्य के सर्वांगीण विकास में किया जा सकेगा।
दरअसल, बिहार विधानसभा और विधानपरिषद ने 18 फरवरी 2019 को राज्य में जाति आधारित गणना कराये जाने का प्रस्ताव पारित किया गया। इस संबंध में दोबारा एक मई 2022 को आयोजित सर्वदलीय बैठक में भी बिहार राज्य में जाति आधारित गणना कराने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया गया। इसके अगले ही दिन राज्य मंत्रिपरिषद् द्वारा लिए गये निर्णय के आधार पर बिहार राज्य में जाति आधारित गणना को दो चरणों में माह फरवरी, 2023 तक संपन्न कराने का निर्णय लिया गया।
रिपोर्ट में आंकड़ों के आधार क्या हैं?
बिहार जाति आधारित गणना-2022 को कई बिंदुओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इन बिंदुओं में शैक्षणिक योग्यता, कार्यकलाप, आवासीय स्थिति, अस्थायी प्रवासीय स्थिति, कम्प्यूटर / लैपटॉप की उपलब्धता, मोटर वाहन, कृषि भूमि, आवासीय भूमि, सभी स्त्रोतों से मासिक आय शामिल है।
बिहार जाति आधारित गणना-2022 को कई बिंदुओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इन बिंदुओं में शैक्षणिक योग्यता, कार्यकलाप, आवासीय स्थिति, अस्थायी प्रवासीय स्थिति, कम्प्यूटर / लैपटॉप की उपलब्धता, मोटर वाहन, कृषि भूमि, आवासीय भूमि, सभी स्त्रोतों से मासिक आय शामिल है।
इसमें क्या आंकड़े सामने आए हैं?
बिहार में अति पिछड़ा वर्ग की आबादी सबसे ज्यादा 4,70,80,514 है जो राज्य की आबादी का कुल 36.0148 % है। इसके बाद पिछड़ा वर्ग 3,54,63,936 हैं जिनकी कुल आबादी 27.1286 फीसदी है। इस तरह से राज्य की 63 फीसदी से ज्यादा आबादी पिछड़ा वर्ग की है। इसके बाद अनुसूचित जाति की आबादी 2,56,89,820 हैं जो 19.6518 % हैं। वहीं, सामान्य वर्ग की आबादी 2,02,91,679 है जो राज्य की आबादी का 15.5224 % है। राज्य में अनुसूचित जनजाति के लोगों की संख्या 21,99,361 है। जो कुल आबादी का 1.6824 % हैं। इस तरह से बिहार की कुल आबादी 13,07,25,310 है।
बिहार में अति पिछड़ा वर्ग की आबादी सबसे ज्यादा 4,70,80,514 है जो राज्य की आबादी का कुल 36.0148 % है। इसके बाद पिछड़ा वर्ग 3,54,63,936 हैं जिनकी कुल आबादी 27.1286 फीसदी है। इस तरह से राज्य की 63 फीसदी से ज्यादा आबादी पिछड़ा वर्ग की है। इसके बाद अनुसूचित जाति की आबादी 2,56,89,820 हैं जो 19.6518 % हैं। वहीं, सामान्य वर्ग की आबादी 2,02,91,679 है जो राज्य की आबादी का 15.5224 % है। राज्य में अनुसूचित जनजाति के लोगों की संख्या 21,99,361 है। जो कुल आबादी का 1.6824 % हैं। इस तरह से बिहार की कुल आबादी 13,07,25,310 है।
Bihar
- फोटो :
Amar Ujala
किस धर्म की कितनी आबादी है?
बिहार में 81.99 प्रतिशत यानी लगभग 82% हिंदू हैं। इस्लाम धर्म के मानने वालों की संख्या 17.7% है। शेष ईसाई सिख बौद्ध जैन या अन्य धर्म मानने वालों की संख्या एक फीसदी से भी कम है। राज्य के 2146 लोगों ने अपना कोई धर्म नहीं बताया।
बिहार में 81.99 प्रतिशत यानी लगभग 82% हिंदू हैं। इस्लाम धर्म के मानने वालों की संख्या 17.7% है। शेष ईसाई सिख बौद्ध जैन या अन्य धर्म मानने वालों की संख्या एक फीसदी से भी कम है। राज्य के 2146 लोगों ने अपना कोई धर्म नहीं बताया।