West Bengal: राजारहाट न्यू टाउन सीट पर भाजपा विजयी, रिकाउंटिंग के चलते रोका गया था परिणाम
भाजपा ने मंगलवार को अपनी सीटों की संख्या 207 तक पहुंचा दी। राजारहाट-न्यू टाउन विधानसभा क्षेत्र में पुनर्गणना के बाद भाजपा के खाते में एक और सीट जुड़ गई। इस सीट पर भाजपा उम्मीदवार पीयूष कानोडिया ने पुनर्गणना के बाद जीत हासिल की है।
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पश्चिम बंगाल विधानसभा की राजारहाट न्यू टाउन सीट को लेकर चला आ रहा सस्पेंस मंगलवार को खत्म हो गया। चुनाव आयोग के निर्देश पर हुई पुनर्गणना के बाद भाजपा उम्मीदवार पीयूष कानोडिया ने जीत दर्ज की। कानोडिया ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार तपश चटर्जी को बेहद मामूली 309 वोटों के अंतर से हराया। सभी 18 राउंड की मतगणना पूरी होने के बाद यह नतीजा सामने आया है। इसके साथ ही भाजपा की कुल सीटों की संख्या 207 पहुंच गई।
भाजपा उम्मीदवार पीयूष कानोडिया ने पुनर्गणना के बाद तृणमूल कांग्रेस के दो बार के विधायक तपस चटर्जी को 309 वोटों के मामूली अंतर से हराया। इस जीत से पार्टी की अंतिम सीटों की संख्या 206 से बढ़कर 207 हो गई। मतगणना के 18 दौर के अंत में, कानोडिया को 1,06,564 वोट मिले, जबकि चटर्जी को 1,06,255 वोट प्राप्त हुए। यह परिणाम सोमवार के निर्णायक जनादेश के बाद आया है, जिसमें भाजपा ने दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा पार किया था।
ममता भी हारीं चुनाव
इन चुनावों में एक बड़ा राजनीतिक संकेत भी देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से भाजपा के शुभेंदु अधिकारी से हार गईं। नए आंकड़ों के साथ भाजपा बहुमत के 148 के आंकड़े से काफी आगे निकल चुकी है, जिससे उसकी स्थिति और मजबूत हो गई है।
मतगणना के दिन शुरुआती रुझानों से ही भाजपा को बढ़त मिलने लगी थी, जो बाद में बड़े अंतर की जीत में बदल गई। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक भाजपा 200 से ज्यादा सीटों के साथ आगे रही, जबकि टीएमसी करीब 79 सीटों पर सिमट गई और कुछ सीटों पर बढ़त में रही। नतीजों से साफ है कि राज्य में सिर्फ सरकार नहीं बदली, बल्कि राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर भी बड़ा बदलाव हुआ है।
1972 के बाद पहली बार केंद्र और बंगाल में एक ही पार्टी की सत्ता
1972 के बाद यह पहली बार होगा जब पश्चिम बंगाल में वही पार्टी सरकार बनाएगी, जो केंद्र में भी सत्ता में है। भाजपा के चुनाव अभियान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियां और सीधा संवाद अहम रहा, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संगठनात्मक स्तर पर अभियान को संभाला। बंगाल में भाजपा का सफर धीरे-धीरे मजबूत होता गया, पहले हाशिये से निकलकर मुख्य विपक्ष बनी और अब सत्ता तक पहुंच गई।दूसरी तरफ, टीएमसी की पकड़ कई इलाकों में कमजोर पड़ती दिखी, खासकर उत्तर बंगाल और जंगलमहल क्षेत्र में।
वोट शेयर में भी बदलाव दिखा। भाजपा का वोट प्रतिशत 2021 के 38 फीसदी से बढ़कर करीब 45 फीसदी हो गया, जबकि टीएमसी का वोट शेयर 48 फीसदी से घटकर लगभग 40.94 फीसदी रह गया। सीटों के लिहाज से भी तस्वीर पूरी तरह बदल गई। टीएमसी 215 से घटकर करीब 80 सीटों पर आ गई, जबकि भाजपा 77 से बढ़कर 207 सीटों तक पहुंच गई।
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