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US: क्या चीन का मुकाबला करने में भारत बनेगा अमेरिका का साझेदार? अमेरिकी सांसद बोले- भारत ही एकमात्र विकल्प

Tue, 30 Jun 2026 11:35 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Tue, 30 Jun 2026 11:35 AM IST
सार

US Senator Steve Daines Statement: अमेरिकी सांसद स्टीव डेन्स ने कहा है कि अमेरिका के साथ मिलकर काम करते हुए भारत ही दुनिया का एकमात्र देश है, जो चीन के इनोवेशन इकोसिस्टम के आकार और क्षमता का मुकाबला कर सकता है। उन्होंने भारत-अमेरिका साझेदारी को वैश्विक स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण बताया। डेन्स ने कहा कि तकनीक, एआई, सप्लाई चेन और नवाचार के क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग भविष्य की वैश्विक व्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। आइए, विस्तार से जानते हैं, उन्होंने आगे और क्या कुछ कहा...

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US Senator Steve Daines says India Key to Countering China, Only Nation That Can Match Its Scale
अमेरिकी सांसद स्टीव डेन्स - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के दौर में भारत की भूमिका लगातार अहम होती जा रही है। इसी बीच अमेरिकी सांसद स्टीव डेन्स ने भारत को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ मिलकर काम करते हुए भारत ही दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जो चीन के विशाल इनोवेशन इकोसिस्टम और तकनीकी क्षमता का मुकाबला कर सकता है। डेन्स ने कहा कि भारत-अमेरिका साझेदारी केवल दोनों देशों के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब वैश्विक सप्लाई चेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में चीन के प्रभाव को संतुलित करने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
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वॉशिंगटन में आयोजित अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच (यूएसआईएसपीएफ) लीडरशिप समिट में बोलते हुए मोंटाना से रिपब्लिकन सांसद स्टीव डेन्स ने कहा कि वाशिंगटन को चीन की चुनौती से निपटने के लिए भारत को एक दीर्घकालिक और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार के रूप में देखना होगा। इस दौरान उन्हें भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने में योगदान के लिए यूएसआईएसपीएफ पब्लिक सर्विस अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया। डेन्स ने कहा कि भारत और अमेरिका के पास वह प्रतिभा, संसाधन और क्षमता है, जो वैश्विक स्तर पर तकनीकी प्रतिस्पर्धा को नई दिशा दे सकती है।
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चीन को लेकर अमेरिका की रणनीति में भारत क्यों अहम है?

सांसद डेन्स ने कहा कि अमेरिका चीन से पूरी तरह अलग नहीं हो सकता, लेकिन उसे जोखिम कम करने और भरोसेमंद साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जब भी वह चीन जाते हैं तो अपना मोबाइल फोन साथ नहीं ले जाते, लेकिन भारत की यात्रा के दौरान ऐसा नहीं होता। उनके मुताबिक, यह दोनों देशों के प्रति अमेरिका के भरोसे और रणनीतिक दृष्टिकोण का अंतर दर्शाता है। डेन्स ने कहा कि चीन से जुड़ी चुनौतियों पर वाशिंगटन में खूब चर्चा होती है, लेकिन अब समय आ गया है कि यह तय किया जाए कि किन साझेदारियों को मजबूत करना सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत इस रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

भारत और अमेरिका मिलकर क्या हासिल करना चाहते हैं?

अमेरिकी सांसद ने कहा कि भारत और अमेरिका के पास मिलकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की जबरदस्त क्षमता है। उन्होंने कहा कि भारत का विशाल तकनीकी कार्यबल, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और नवाचार की क्षमता उसे अमेरिका का स्वाभाविक साझेदार बनाती है। डेन्स के अनुसार, दोनों देश मिलकर उन्नत प्रौद्योगिकी, कृत्रिम मेधा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक सप्लाई चेन के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत-अमेरिका साझेदारी वैश्विक आर्थिक और तकनीकी संतुलन को प्रभावित कर सकती है।

भारत-अमेरिका संबंधों की सबसे बड़ी ताकत क्या है?

डेन्स ने कहा कि किसी भी मजबूत साझेदारी की बुनियाद भरोसा होती है और भारत-अमेरिका संबंधों में यही सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि केवल आधिकारिक बैठकों से रिश्ते मजबूत नहीं होते, बल्कि लोगों से मिलना और व्यक्तिगत स्तर पर संबंध बनाना भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। डेन्स ने भारतीय नेताओं और अमेरिकी अधिकारियों के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच वर्षों से बना विश्वास ही इस साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने अमेरिका की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

भारत को लेकर सांसद डेन्स का व्यक्तिगत अनुभव क्या रहा?

सांसद डेन्स ने अपने शुरुआती पेशेवर जीवन को याद करते हुए बताया कि 1990 के दशक में चीन में काम करने के अनुभव ने एशिया की अर्थव्यवस्था को समझने में उनकी मदद की। उन्होंने कहा कि उस समय चीन 500 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था था, जो आज 20 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था बन चुका है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अब वैश्विक संतुलन में भारत की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। डेन्स ने एक निजी अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके पिता की जान एक भारतीय डॉक्टर ने बचाई थी। उन्होंने कहा कि भारतीय समुदाय और भारत की प्रतिभा के प्रति उनके मन में विशेष सम्मान है। सीनेट से विदाई की घोषणा कर चुके डेन्स ने कहा कि वह भविष्य में भी भारत-अमेरिका संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर सक्रिय रूप से जुड़े रहेंगे।
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