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नए मेडिकेड नियम से छिनेगी अमेरिकियों की स्वास्थ्य सुविधाएं?: ट्रंप सरकार घिरी, 25 राज्यों ने दायर किया मुकदमा

Tue, 30 Jun 2026 04:34 AM IST
Pavan पीटीआई, न्यूयॉर्क
पीटीआई, न्यूयॉर्क Published by: Pavan Updated Tue, 30 Jun 2026 04:34 AM IST
सार

अमेरिका के 25 राज्यों और वॉशिंगटन डीसी ने मेडिकेड के नए कार्य संबंधी नियमों को लेकर ट्रंप प्रशासन पर मुकदमा दायर किया है। उनका कहना है कि सख्त नियमों और नई शर्तों के कारण कैंसर मरीजों, दिव्यांगों समेत कई पात्र लोगों के लिए स्वास्थ्य बीमा का लाभ लेना मुश्किल हो जाएगा।

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Democrats in half of states sue Trump administration over Medicaid work rules
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका में मेडिकेड (सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना) के नए कार्य संबंधी नियमों को लेकर विवाद गहरा गया है। सोमवार को 25 राज्यों और वॉशिंगटन डीसी के डेमोक्रेट अटॉर्नी जनरल और राज्यपालों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया। उनका आरोप है कि नए नियमों से लाखों पात्र लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करना मुश्किल हो जाएगा। याचिका में कहा गया है कि इस महीने अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग के तहत आने वाले सेंटर्स फॉर मेडिकेयर एंड मेडिकेड सर्विसेज ने जो अंतरिम नियम जारी किए हैं, वे पिछले साल बने कानून की सीमा से आगे बढ़कर बनाए गए हैं। राज्यों का कहना है कि प्रशासन ने कानून की ऐसी व्याख्या की है, जिससे जरूरतमंद लोगों के लिए मेडिकेड का लाभ लेना और कठिन हो जाएगा।
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क्या हैं नए नियम?
ट्रंप प्रशासन के नए नियमों के अनुसार, 1 जनवरी से 19 से 64 वर्ष की उम्र के उन लोगों को, जिन्हें मेडिकेड विस्तार योजना का लाभ मिलता है, हर महीने कम से कम 80 घंटे काम करना, सामुदायिक सेवा करना या कम से कम आधे समय तक पढ़ाई करना अनिवार्य होगा। हालांकि, गंभीर रूप से बीमार, नशा मुक्ति कार्यक्रम में शामिल लोगों और कुछ अन्य श्रेणियों को छूट दी जाएगी।
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'गंभीर स्वास्थ्य स्थिति' की नई परिभाषा पर विवाद
विवाद की सबसे बड़ी वजह गंभीर स्वास्थ्य स्थिति की नई परिभाषा है। पहले कानून में विकलांगता, गंभीर बीमारी या नशे की लत से जूझ रहे लोगों को छूट देने का प्रावधान था। लेकिन नए नियम में कहा गया है कि व्यक्ति की बीमारी इतनी गंभीर होनी चाहिए कि वह उसकी काम करने, स्वयंसेवा करने या पढ़ाई करने की क्षमता को काफी हद तक प्रभावित करती हो। तभी उसे छूट मिलेगी। राज्यों का कहना है कि यह नई शर्त कानून में नहीं थी और इससे कैंसर मरीजों, दिव्यांगों, मानसिक रोगियों तथा अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को अनावश्यक कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। इससे कई पात्र लोग भी स्वास्थ्य बीमा से वंचित हो सकते हैं।

राज्यों ने जताई प्रशासनिक दिक्कत
मुकदमे में कहा गया है कि सीएमएस ने राज्यों से लंबे समय तक चर्चा करने के बाद भी अचानक नियम बदल दिए। इससे राज्यों को अपनी व्यवस्थाएं अपडेट करने में कठिनाई हो रही है। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि मरीज अपनी गंभीर बीमारी का प्रमाण किस प्रकार देंगे।


क्या है ट्रंप प्रशासन का पक्ष?
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये नियम सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग को रोकने और वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक लाभ पहुंचाने के लिए बनाए गए हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग और सीएमएस ने इस मुकदमे पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

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न्यूयॉर्क ने जताई चिंता
न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स ने कहा कि नए नियमों से उनके राज्य के हजारों लोग प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि कैंसर, दिव्यांगता, मानसिक बीमारी या नशे की लत से उबर रहे लोगों को इलाज पाने के लिए अनावश्यक कागजी कार्रवाई में नहीं उलझाया जाना चाहिए।
 
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