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US: क्या इंजीनियरिंग टैलेंट में चीन को टक्कर दे रहा भारत? अमेरिकी अधिकारी बोले- भारत का कोई मुकाबला ही नहीं

Tue, 30 Jun 2026 07:42 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Tue, 30 Jun 2026 07:42 AM IST
सार

Jacob Helberg On India:अमेरिकी अधिकारी जैकब हेलबर्ग ने भारत को तकनीकी क्षेत्र में अमेरिका का अपरिहार्य साझेदार बताते हुए कहा है कि इंजीनियरिंग प्रतिभा और तकनीकी कार्यबल के मामले में भारत दुनिया का इकलौता देश है, जो चीन को चुनौती दे सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत कृत्रिम मेधा, डीप-टेक और साझा डेवलपर इकोसिस्टम पर मिलकर काम करेंगे। आइए, विस्तार से जानते हैं कि जैकब ने भारत के लिए और क्या कुछ कहा...

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India Only Country That Can Rival China in Engineering Talent Says US Official Jacob Helberg
अमेरिकी अधिकारी जैकब। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत की तकनीकी ताकत को लेकर अमेरिका ने बड़ा बयान दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग में आर्थिक विकास, ऊर्जा और पर्यावरण मामलों के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग ने कहा है कि इंजीनियरिंग कार्यबल और तकनीकी प्रतिभा के मामले में भारत दुनिया का इकलौता देश है, जो चीन को चुनौती देने की क्षमता रखता है। उन्होंने भारत को वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में अमेरिका का "अपरिहार्य साझेदार" बताते हुए कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई), डीप-टेक और डेवलपर इकोसिस्टम के क्षेत्र में भारत और अमेरिका मिलकर काम करेंगे। अमेरिका की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब दुनिया में एआई और उन्नत तकनीक को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है।

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वाशिंगटन में आयोजित नौवें यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) लीडरशिप समिट 2026 में बोलते हुए जैकब हेलबर्ग ने कहा कि भारत के पास विशाल इंजीनियरिंग कार्यबल, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और उभरता हुआ तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र है। उन्होंने कहा कि भारत सॉफ्टवेयर, एप्लिकेशन विकास और नई तकनीकों को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यही वजह है कि अमेरिका भारत के साथ साझा डेवलपर इकोसिस्टम विकसित करना चाहता है।

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क्या इंजीनियरिंग प्रतिभा के मामले में भारत चीन को चुनौती दे सकता है?

जैकब हेलबर्ग ने कहा कि इंजीनियरिंग प्रतिभा की गहराई और तकनीकी कार्यबल के आकार के मामले में भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जो चीन के समकक्ष खड़ा दिखाई देता है। उनके अनुसार भारत में तकनीकी प्रतिभाओं की बड़ी संख्या मौजूद है, जो आने वाले समय में वैश्विक तकनीकी विकास को नई दिशा दे सकती है। उन्होंने कहा कि भारत का तकनीकी इकोसिस्टम अभी तेजी से विकसित हो रहा है और वह एप्लिकेशन स्तर पर उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। अमेरिका का मानना है कि नई तकनीकों के व्यापक उपयोग और प्रसार में भारत की भूमिका बेहद अहम होगी।

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क्या भारत और अमेरिका मिलकर एआई इकोसिस्टम तैयार करेंगे?

 

  • जैकब हेलबर्ग के मुताबिक, भारत कृत्रिम मेधा (एआई) के भविष्य को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
  • अमेरिका और भारत मिलकर साझा एआई डेवलपर इकोसिस्टम विकसित करना चाहते हैं।
  • दोनों देशों का लक्ष्य ऐसा एआई इकोसिस्टम बनाना है, जो सभी के लिए लाभकारी और पूरक साबित हो।
  • भारत के विशाल डेवलपर नेटवर्क को एआई विकास का बड़ा आधार माना जा रहा है।
  • भारत की युवा आबादी एआई आधारित नई सेवाओं और उत्पादों के विकास को गति दे सकती है।
  • एआई क्षेत्र में सहयोग से भारत और अमेरिका दोनों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ मिलने की उम्मीद है।
  • अमेरिका का मानना है कि एआई के क्षेत्र में भारत और अमेरिका एक-दूसरे के पूरक साझेदार हैं।
 

क्या अमेरिकी कंपनियां भारत में निवेश बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं?

जैकब हेलबर्ग ने हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात की थी। इस बैठक में भारत में तकनीकी निवेश, डीप-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर और साझा विकास के अवसरों पर चर्चा हुई। हेलबर्ग ने कहा कि अमेरिकी कंपनियां भारत में निर्माण, निवेश और नवाचार के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका का वाणिज्य विभाग एक 'ट्रस्टेड पार्टनर प्रोग्राम' पर काम कर रहा है, जिससे तकनीकी सहयोग को और गति मिल सकती है।

क्या भारत-अमेरिका तकनीकी साझेदारी अब नए दौर में पहुंच गई है?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका अब एक-दूसरे को प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि पूरक साझेदार के रूप में देख रहे हैं। इस साल आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट और हालिया कूटनीतिक बैठकों ने दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग की मजबूत नींव रखी है। सेमीकंडक्टर, एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की संभावना है। अमेरिका का यह बयान भी संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक तकनीकी शक्ति के रूप में और मजबूत होकर उभरेगा।

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