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क्या हैं बीएमसी चुनाव?: जानें मुंबई, महाराष्ट्र और देश के लिए यह कितने अहम, कैसे होता है मतदान और मुद्दे क्या

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 14 Jan 2026 10:32 AM IST
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सार

बीएमसी क्या है और इसकी अहमियत क्या है? बृहन्मुंबई महानगरपालिका क्या जिम्मेदारियां निभाती है? इसका बजट और फंड्स कहां से आता है? इसके चुनाव कैसे होते हैं? बीते चुनावों में क्या नतीजे रहे हैं? आइये जानते हैं...

BMC Elections 2026 Brihanmumbai Municipal Corporation Polls Maharashtra Mumbai India know everything explained
बीएमसी चुनाव। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बृहन्मुंबई नगर निगम, जिसे बीएमसी के तौर पर भी जाना जाता है के चुनाव करीब चार साल के अंतराल के बाद फिर होने वाले हैं। 15 जनवरी (गुरुवार) को बीएमसी चुनाव के लिए मतदान होगा। इसके जरिए उस परिषद का चुनाव होगा, जो कि भारत की वाणिज्यिक राजधानी मुंबई के हर दिन के कामकाज और लंबी अवधि के विकास कार्यों के लिए जिम्मेदार होगी। मजेदार बात यह है कि बीएमसी के चुनावों के लिए राजनीतिक दल उसी तरह तैयारी में जुटे हैं, जिस तरह किसी संसदीय चुनाव या विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियां होती हैं। फिर चाहे शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के साथ आने की बात हो या राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के पवार गुटों में करीबी की बात। बीएमसी चुनाव करीब आते ही कई राजनीतिक घटनाक्रम घटे हैं, जो कि राष्ट्रीय स्तर पर भी जबरदस्त अहमियत रखते हैं। 
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर बीएमसी क्या है और इसकी अहमियत क्या है? बृहन्मुंबई महानगरपालिका क्या जिम्मेदारियां निभाती है? इसका बजट और फंड्स कहां से आता है? इसके चुनाव कैसे होते हैं? बीते चुनावों में क्या नतीजे रहे हैं? आइये जानते हैं...
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क्या है बृहन्मुंबई नगर निगम, क्या है इसकी अहमियत?

  • बीएमसी की स्थापना 1865 को ब्रिटिश शासन के दौरान हुई, हालांकि कुछ स्रोतों के हवाले से दावा किया जाता है कि इसकी स्थापना 1873 में हुई थी। इस लिहाज से यह देश का सबसे पुराना नगर निकाय है।
  • मुंबई के 24 वॉर्ड्स के लिए जिम्मेदार बृहन्मुंबई नगर निगम दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे अमीर नगर निगम भी है। इसका बजट कई राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के कुल बजट से ज्यादा है। 

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इसकी अहमियत क्या है?

बीएमसी की अहमियत मुंबई के निवासियों के लिहाज से काफी अहम है, जिनमें उद्योगपतियों से लेकर बॉलीवुड सेलिब्रिटीज और महाराष्ट्र की प्रमुख राजनीतिक हस्तियां शामिल हैं। इसके चलते बीएमसी का शहर के विकास पर सीधा प्रभाव है। 
  1. बुनियादी सेवाओं के लिए रखरखाव की जिम्मेदारी: यह शहर के 2,050 किमी लंबे सड़क नेटवर्क के निर्माण और रखरखाव के लिए जिम्मेदार है। इसके अलावा, यह सात झीलों के माध्यम से पूरे मुंबई को पीने के पानी की आपूर्ति करता है और जल निकासी (सीवेज) का प्रबंधन करता है।
  2. बुनियादी ढांचा और अपशिष्ट प्रबंधन की निगरानी: शहर की बड़ी परियोजनाओं, जैसे मुंबई कोस्टल रोड, फ्लाईओवर और पुलों का निर्माण भी बीएमसी की ही जिम्मेदारी है। मुंबई में हर दिन 8,000 से 10,000 मीट्रिक टन कचरा पैदा करता है, जिसे इकट्ठा करने और इसके प्रबंधन की जिम्मेदारी बीएमसी की है। 
  3. सार्वजनिक स्वास्थ्य और शिक्षा: बीएमसी देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में से एक का संचालन करता है। इसमें चार मेडिकल कॉलेज अस्पताल, 16 सामान्य अस्पताल और कई छोटे-बड़े औषधालय शामिल हैं। इसके अलावा यह 1100 से अधिक नगर निगम स्कूल भी चलाता है, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को शिक्षा देने के लिए हैं।
  4. सार्वजनिक परिवहन और रखरखाव: बीएमसी बेस्ट (बसों) के रखरखाव के लिए मूल संस्था है। यह शहर के 800 से ज्यादा उद्यानों और खुले स्थानों का रखरखाव करती है।
  5. राजनीतिक महत्व: बीएमसी के चुनाव न केवल शहर के लिए बल्कि राज्य और राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि ये शहरी रुझानों का संकेत देते हैं।

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इसका बजट और फंड्स कहां से आता है? 

बृहन्मुंबई नगर निगम का बजट लगभग 74,000 करोड़ रुपये है। इसकी आय और फंडिंग मुख्य तौर पर संपत्ति पर लगने वाले करों और सेवा शुल्कों के जरिए आता है। 
  • संपत्ति कर: यह बीएमसी की आय का सबसे मुख्य और बड़ा स्रोत है। यह कर मुंबई की आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक संपत्तियों पर लगाया जाता है।
  • सेवा शुल्क: नागरिक सुविधाओं के बदले में निगम शुल्क वसूलता है, जिसमें पानी का शुल्क और सीवेज शुल्क शामिल हैं।
  • प्रशासनिक शुल्क और जुर्माने: अलग-अलग अनुमतियों और नियमों के उल्लंघन पर लगने वाले शुल्क भी इसकी कमाई का हिस्सा हैं। भवन निर्माण की अनुमति से मिलने वाली फीस भी शामिल है। इसके अलावा पार्किंग शुल्क और जुर्माने भी फंडिंग का हिस्सा हैं।

  • विकास-विज्ञापन शुल्क: शहर में होने वाले विकास कार्यों के लिए बिल्डरों की तरफ से बीएमसी को विकास शुल्क (डेवलपमेंट चार्जेस) और विज्ञापनों से मिलने वाली फीस भी राजस्व का एक बड़ा हिस्सा है।
  • सरकारी अनुदान: बीएमसी का राजस्व आधार जबरदस्त तौर पर मजबूत है और उसके अधिकतर खर्च के फंड्स इनसे ही निकल आते हैं। इस लिहाज से वह बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए राज्य सरकार पर पूरी तरह निर्भर नहीं है। फिर भी उसे राज्य सरकार से अनुदान मिलते हैं।

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क्या है बीएमसी के चुनावों की प्रक्रिया?

बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के चुनाव की प्रक्रिया काफी व्यवस्थित और विस्तृत है।

1. कहां-कहां होते हैं चुनाव?
मुंबई को 24 प्रशासनिक वार्डों- ए से टी तक में बांटा गया है। इन प्रशासनिक वार्डों को आगे 227 छोटे चुनावी वार्डों में बांटा किया गया है। हर चुनावी वार्ड से एक पार्षद चुना जाता है, जो नगर निगम के सदन में उस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है।

2. क्या है आरक्षण की व्यवस्था?
बीएमसी में सामान्य श्रेणी की 113 सीटें हैं। इसके अलावा कुल 114 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इसमें अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और पिछड़े वर्ग (ओबीसी) की महिलाएं भी शामिल हैं।

3. चुनाव की अवधि और योग्यता 
ये चुनाव हर पांच साल में आयोजित किए जाते हैं। बीएमसी का पिछला चुनाव 2017 में हुआ था। इस लिहाज से अगले टर्म का चुनाव 2022 में होना था। हालांकि, बीते चार साल में कोरोनावायरस महामारी और फिर कुछ राजनीतिक उठा-पटक के चलते बीएमसी के चुनाव नहीं कराए गए। चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार की उम्र कम से कम 21 वर्ष होना अनिवार्य है और उसका नाम मुंबई की मतदाता सूची में होना जरूरी है।

4. क्या है बीएमसी के चुनाव की प्रक्रिया? 

5. बहुमत और महापौर का चुनाव
मुंबई का महापौर चुनने और बहुमत साबित करने के लिए किसी भी पार्टी या गठबंधन को कम से कम 114 सीटों की जरूरत होती है।
 

क्या हैं मौजूदा चुनाव की स्थितियां?

बीएमसी चुनाव में महायुति और महा विकास अघाड़ी चुनावी मैदान में हैं। इस बार कुल 1700 उम्मीदवार (879 महिलाएं और 821 पुरुष) चुनावी मैदान में हैं।

पिछले कुछ वर्षों में बीएमसी में निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या में कमी आई थी, हालांकि 2026 के चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों का हिस्सा 32.8% है, जो 2017 (30.67%) के मुकाबले ज्यादा है। इसका एक बड़ा कारण पार्टियों में होने वाली बगावत है।  भाजपा और शिवसेना (यूबीटी) जैसी प्रमुख पार्टियों के कई नेताओं को टिकट न मिलने के कारण वे निर्दलीय या बागी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। उदाहरण तौर पर वर्सोवा, माटुंगा और अभ्युदय नगर से भाजपा के कुछ नेता और शिवड़ी से सेना (यूबीटी) के नेता बागी के तौर पर मैदान में हैं।

बीएमसी के पिछले चुनावों में क्या रहे हैं नतीजे?



गौरतलब है कि पिछले सभी चुनावों में जहां शिवसेना अविभाजित थी, वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) भी एकीकृत थी। हालांकि, इस बार मूल शिवसेना के दो हिस्से- शिवसेना और शिवसेना उद्धव-बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी); और राकांपा (अजित पवार गुट) और राकांपा (एससीपी) चुनावी मैदान में हैं।

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