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Book Fair: डॉ. सतीश पूनिया बोले- कोरोना काल में पीएम मोदी के काम संकट में लोगों को दिखाएंगे नई राह
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सार
डॉ. सतीश पूनिया की पुस्तक ‘अग्निपथ नहीं जनपथ’ का पांचवां संस्करण विश्व पुस्तक मेले में लॉन्च हुआ। उन्होंने अपनी किताब में कई चुनावों के अनुभवों और पीएम मोदी के विजन के बारे में विस्तार से की है। पढ़ें इंटरव्यू.....
हरियाणा भाजपा के प्रभारी और पूर्व राजस्थान अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा भाजपा के प्रभारी और पूर्व राजस्थान अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया की पुस्तक 'अग्निपथ नहीं जनपथ' का पांचवां संस्करण रविवार को विश्व पुस्तक मेले में लॉन्च किया गया। यह पुस्तक पाठकों को विधानसभा की कार्रवाई के साथ-साथ एक मंजे राजनेता की राजनीतिक यात्रा से भी परिचित कराती है। इस अवसर पर हमारे संवाददाता ने डॉ. सतीश पूनिया से विशेष बातचीत की। प्रस्तुत है प्रमुख अंश-
प्रश्न- डॉ. सतीश पूनिया जी, 'अग्निपथ नहीं जनपथ' के माध्यम से आपने अपने पाठकों को क्या बताने की कोशिश की है?
उत्तर- देखिए, हमारे देश में पंचायत स्तर से लेकर लोकसभा और राष्ट्रपति चुनाव के स्तर तक लगातार चुनावी प्रक्रिया चलती रहती है। आम आदमी समाचार पत्रों या टीवी माध्यमों से इसके बारे में जानकारी करता रहता है। लेकिन इसके बाद भी इसकी कई सामान्य बातों के बारे में एक आम आदमी अनजान होता है। मैं विधानसभा का सदस्य रहा हूं। लेकिन मैंने देखा है कि कई बार नए चुने गए विधायकों तक को विधानसभा की कार्यवाही प्रक्रिया के बारे में कुछ पता नहीं होता। इस पुस्तक के माध्यम से मैंने यह बताने की कोशिश की है कि विधानसभा में कार्यवाही किस तरह चलती है। प्रश्न किस तरह पूछे जाते हैं। आम व्यक्ति अपने जनप्रतिनिधियों के माध्यम से किस तरह जनता के हितों से जुड़े प्रश्न पूछ सकते हैं। यह पुस्तक आम पाठकों से लेकर पत्रकारिता के छात्रों, राजनीतिक जीवन में उतरने की इच्छा रखने वाले युवाओं, विधायकों और राजनीति में रुचि रखने वाले सभी लोगों के लिए है।
प्रश्न- आपकी एक लंबी राजनीतिक पारी रही है। आप अभी भी हरियाणा भाजपा के प्रभारी हैं। गुजरात के चुनावों में भी आप प्रभावी भूमिका निभा चुके हैें। क्या इस पुस्तक में आपके उन राजनीतिक अनुभवों का लाभ भी पाठकों को मिलेगा?
उत्तर- बिल्कुल। बल्कि यह कहिए कि पुस्तक का नाम अग्निपथ नहीं जनपथ रखने के पीछे भी यही भाव काम कर रहा था। आज अनेक लोग राजनीति को बहुत लंबा, बहुत थकाऊ या बहुत खर्चीला काम मानते हैं। लेकिन जो मेरा अनुभव रहा है, मैंने यही बताने की कोशिश की है कि यदि आप जनसेवा की मूल सोच को ध्यान में रखकर राजनीति में प्रवेश करते हैं तो यह जनता के बीच काम करने का और अपने देश-समाज के लिए कुछ करने का एक बेहद सशक्त माध्यम है। जब आप देखते हैं कि आपके काम से एक आम आदमी के जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है, आपके कार्यों के कारण लोगों के चेहरों पर मुस्कान आती है तो आपको यह कार्य बेहतर लगने लगता है। यदि राजनीति में आने का उद्देश्य सही नहीं होगा तो ऐसे लोगों को जल्द ही निराशा होने लगती है।
प्रश्न- आपका मूल कार्य क्षेत्र राजस्थान रहा है। क्या राजस्थान की राजनीति के बारे में भी इसमें कुछ जानने को मिलेगा?
उत्तर- मेरे राजनीतिक कार्य के समय प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत थे और सचिन पायलट कांंग्रेस नेता के तौर पर बहुत सक्रिय थे। इनके संबंधों और राजनीतिक अनुभवों पर भी इसमें कई रोचक टिप्पणियां और जानकारियां पुस्तक में पढ़ने को मिलती हैं। इसमें कुछ कार्टून भी हैं जो पाठकों को बहुत रुचिकर माध्यम से तत्कालीन राजनीति के बारे में जानकारी देती हैं।
ये भी पढ़ें: World Book Fair: भारी संख्या में पहुंच रहे पुस्तक प्रेमी, राजनीति-अध्यात्मिक पुस्तकों में दिखा युवाओं का रुझान
प्रश्न- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सेवा कार्यों से देश में राजनीति को एक नई परिभाषा दी है। आप लंबे समय से गुजरात चुनावों में काम करते रहे हैं। क्या पाठकों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में भी कुछ विशेष पढ़ने को मिलेगा?
उत्तर- आपने बिल्कुल ठीक कहा। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीति को एक नई परिभाषा देने का काम किया है। इस पुस्तक में प्रधानमंत्री की उस सोच को विस्तार से बताया गया है जिसमें वे राजनीति के जरिए देश में बदलाव लाने के लिए काम करते हैं। मैंने कोरोना काल के अनुभवों को भी समेटने का काम किया है। आपने देखा था कि किस तरह जब कोरोना के डर के कारण दुनिया दुबक कर बैठ गई थी, हमारे प्रधानमंत्री ने आगे बढ़कर नेतृत्व किया, लोगों की सेवा की, और कोरोना की वैक्सीन उपलब्ध कराने में महत्त्वपूर्ण पहल कर लोगों को राहत प्रदान की। भविष्य में जब भी कोई संकट आएगा, कोरोना काल के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा किया गया सेवा कार्य लोगों को राह दिखाएगा।
प्रश्न- एक अंतिम प्रश्न, क्या इसके बाद किसी और पुस्तक को लिखने का भी विचार है?
उत्तर- अभी तो फिलहाल मैं इसी पुस्तक पर काम कर रहा था। लेकिन इससे फ्री होकर एक नई पुस्तक पर काम करने का विचार है। उसके बारे में भी जल्द ही आपसे विचार साझा करूंगा।
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प्रश्न- डॉ. सतीश पूनिया जी, 'अग्निपथ नहीं जनपथ' के माध्यम से आपने अपने पाठकों को क्या बताने की कोशिश की है?
उत्तर- देखिए, हमारे देश में पंचायत स्तर से लेकर लोकसभा और राष्ट्रपति चुनाव के स्तर तक लगातार चुनावी प्रक्रिया चलती रहती है। आम आदमी समाचार पत्रों या टीवी माध्यमों से इसके बारे में जानकारी करता रहता है। लेकिन इसके बाद भी इसकी कई सामान्य बातों के बारे में एक आम आदमी अनजान होता है। मैं विधानसभा का सदस्य रहा हूं। लेकिन मैंने देखा है कि कई बार नए चुने गए विधायकों तक को विधानसभा की कार्यवाही प्रक्रिया के बारे में कुछ पता नहीं होता। इस पुस्तक के माध्यम से मैंने यह बताने की कोशिश की है कि विधानसभा में कार्यवाही किस तरह चलती है। प्रश्न किस तरह पूछे जाते हैं। आम व्यक्ति अपने जनप्रतिनिधियों के माध्यम से किस तरह जनता के हितों से जुड़े प्रश्न पूछ सकते हैं। यह पुस्तक आम पाठकों से लेकर पत्रकारिता के छात्रों, राजनीतिक जीवन में उतरने की इच्छा रखने वाले युवाओं, विधायकों और राजनीति में रुचि रखने वाले सभी लोगों के लिए है।
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प्रश्न- आपकी एक लंबी राजनीतिक पारी रही है। आप अभी भी हरियाणा भाजपा के प्रभारी हैं। गुजरात के चुनावों में भी आप प्रभावी भूमिका निभा चुके हैें। क्या इस पुस्तक में आपके उन राजनीतिक अनुभवों का लाभ भी पाठकों को मिलेगा?
उत्तर- बिल्कुल। बल्कि यह कहिए कि पुस्तक का नाम अग्निपथ नहीं जनपथ रखने के पीछे भी यही भाव काम कर रहा था। आज अनेक लोग राजनीति को बहुत लंबा, बहुत थकाऊ या बहुत खर्चीला काम मानते हैं। लेकिन जो मेरा अनुभव रहा है, मैंने यही बताने की कोशिश की है कि यदि आप जनसेवा की मूल सोच को ध्यान में रखकर राजनीति में प्रवेश करते हैं तो यह जनता के बीच काम करने का और अपने देश-समाज के लिए कुछ करने का एक बेहद सशक्त माध्यम है। जब आप देखते हैं कि आपके काम से एक आम आदमी के जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है, आपके कार्यों के कारण लोगों के चेहरों पर मुस्कान आती है तो आपको यह कार्य बेहतर लगने लगता है। यदि राजनीति में आने का उद्देश्य सही नहीं होगा तो ऐसे लोगों को जल्द ही निराशा होने लगती है।
प्रश्न- आपका मूल कार्य क्षेत्र राजस्थान रहा है। क्या राजस्थान की राजनीति के बारे में भी इसमें कुछ जानने को मिलेगा?
उत्तर- मेरे राजनीतिक कार्य के समय प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत थे और सचिन पायलट कांंग्रेस नेता के तौर पर बहुत सक्रिय थे। इनके संबंधों और राजनीतिक अनुभवों पर भी इसमें कई रोचक टिप्पणियां और जानकारियां पुस्तक में पढ़ने को मिलती हैं। इसमें कुछ कार्टून भी हैं जो पाठकों को बहुत रुचिकर माध्यम से तत्कालीन राजनीति के बारे में जानकारी देती हैं।
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प्रश्न- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सेवा कार्यों से देश में राजनीति को एक नई परिभाषा दी है। आप लंबे समय से गुजरात चुनावों में काम करते रहे हैं। क्या पाठकों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में भी कुछ विशेष पढ़ने को मिलेगा?
उत्तर- आपने बिल्कुल ठीक कहा। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीति को एक नई परिभाषा देने का काम किया है। इस पुस्तक में प्रधानमंत्री की उस सोच को विस्तार से बताया गया है जिसमें वे राजनीति के जरिए देश में बदलाव लाने के लिए काम करते हैं। मैंने कोरोना काल के अनुभवों को भी समेटने का काम किया है। आपने देखा था कि किस तरह जब कोरोना के डर के कारण दुनिया दुबक कर बैठ गई थी, हमारे प्रधानमंत्री ने आगे बढ़कर नेतृत्व किया, लोगों की सेवा की, और कोरोना की वैक्सीन उपलब्ध कराने में महत्त्वपूर्ण पहल कर लोगों को राहत प्रदान की। भविष्य में जब भी कोई संकट आएगा, कोरोना काल के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा किया गया सेवा कार्य लोगों को राह दिखाएगा।
प्रश्न- एक अंतिम प्रश्न, क्या इसके बाद किसी और पुस्तक को लिखने का भी विचार है?
उत्तर- अभी तो फिलहाल मैं इसी पुस्तक पर काम कर रहा था। लेकिन इससे फ्री होकर एक नई पुस्तक पर काम करने का विचार है। उसके बारे में भी जल्द ही आपसे विचार साझा करूंगा।