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PMK में नेतृत्व संकट गहराया: अध्यक्ष पद की लड़ाई के लिए पिता और पुत्र आमने-सामने; चुनाव आयोग तक पहुंचा विवाद

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: हिमांशु चंदेल Updated Sun, 11 Jan 2026 11:36 PM IST
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सार

Leadership Crisis in PMK: दक्षिण भारत की पीएमके पार्टी में पिता-पुत्र का विवाद अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। पार्टी संस्थापक एस. रामदास ने बेटे अंबुमणि पर खुद को अवैध रूप से अध्यक्ष बताने और एआईएडीएमके से गलत तरीके से गठबंधन करने का आरोप लगाया है। आइए इस पूरे विवाद को जानते हैं।

Leadership crisis PMK founder Ramadoss urges Election Commission to initiate action against Anbumani
पट्टाली मक्कल काची नेता एस. रामदास और अंबुमणि - फोटो : ANI
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विस्तार
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तमिलनाडु की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई, जब पट्टाली मक्कल कच्ची (पीएमके) के संस्थापक एस. रामदास ने अपने ही बेटे अंबुमणि रामदास के खिलाफ चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग कर दी। रामदास ने आरोप लगाया है कि अंबुमणि ने खुद को अवैध रूप से पार्टी अध्यक्ष बताते हुए एआईएडीएमके से चुनावी गठबंधन किया, जबकि उन्हें ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं था। यह विवाद अब पारिवारिक मतभेद से आगे बढ़कर कानूनी और राजनीतिक संकट का रूप लेता दिख रहा है।

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रामदास ने दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि अंबुमणि रामदास का पार्टी अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल 28 मई 2025 को समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद उन्होंने खुद को अध्यक्ष बताकर राजनीतिक फैसले लिए। रामदास के मुताबिक, वह स्वयं 17 दिसंबर 2025 से विधिवत पीएमके के नए अध्यक्ष बने हैं और उन्होंने औपचारिक रूप से पदभार भी संभाल लिया है। ऐसे में अंबुमणि का खुद को अध्यक्ष बताना गलत और भ्रामक है।
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क्यों अवैध बताया गया एआईएडीएमके से गठबंधन?
रामदास ने साफ कहा है कि अंबुमणि रामदास ने जिस हैसियत में एआईएडीएमके से गठबंधन की घोषणा की, वह कानूनी तौर पर मान्य नहीं है। उनके अनुसार, अध्यक्ष पद का कार्यकाल समाप्त होने के बाद किया गया कोई भी राजनीतिक फैसला अवैध माना जाएगा। रामदास ने इसे “फर्जीवाड़ा और पहचान की धोखाधड़ी” करार देते हुए कहा कि इस आधार पर अंबुमणि के खिलाफ सिविल और आपराधिक कार्रवाई बनती है।

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चुनाव आयोग से क्या मांग की गई?

  • अंबुमणि रामदास के खुद को पीएमके अध्यक्ष बताने की जांच की जाए।
  • एआईएडीएमके से किए गए गठबंधन को अवैध घोषित किया जाए।
  • पार्टी के आधिकारिक अध्यक्ष के रूप में रामदास की स्थिति को मान्यता दी जाए।
  • मामले में आवश्यक कानूनी और चुनावी कार्रवाई शुरू की जाए।
  • राज्य पुलिस प्रमुख समेत शीर्ष अधिकारियों को भी इस शिकायत की जानकारी दी जाए।


पार्टी और राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
इस विवाद से पीएमके के भीतर गहरी दरार सामने आ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि चुनाव आयोग ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया, तो आगामी चुनावों से पहले पार्टी की रणनीति और गठबंधन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। एआईएडीएमके के साथ गठबंधन पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। इससे पीएमके की साख और वोट बैंक पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

अब नजरें चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी हैं। आयोग अगर रामदास के दावों को सही मानता है, तो अंबुमणि रामदास की राजनीतिक भूमिका पर बड़ा झटका लग सकता है। वहीं, अगर मामला लंबा खिंचता है, तो पीएमके में आंतरिक कलह और गहराने की संभावना है। यह विवाद सिर्फ एक पार्टी का नहीं, बल्कि तमिलनाडु की सियासत में नए समीकरणों को भी जन्म दे सकता है।

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