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BoPS: निजी सुरक्षा एजेंसियां ही करेंगी बंदरगाहों की सुरक्षा, CISF से प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की होगी तैनात

Fri, 10 Jul 2026 08:32 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Fri, 10 Jul 2026 08:32 PM IST
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BoPS: Private Security Agencies to Guard Ports, CISF-Trained Personnel to Be Deployed
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह - फोटो : अमर उजाला

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केन्द्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को पत्तन सुरक्षा ब्यूरो (बीओपीएस) के गठन में हुई प्रगति की समीक्षा की। गृह मंत्री ने मत्स्यपालन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में फिशिंग हार्बर्स और फिश लैन्डिंग सेंटर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसरो द्वारा विकसित ‘नभमित्र’ एप का और प्रचार-प्रसार हो, जिससे अधिक से अधिक संख्या में नाविक इसे अपने मोबाइल में डाउनलोड कर सकें। बंदरगाहों की सुरक्षा में केवल लाइसेंस प्राप्त निजी सुरक्षा एजेंसी ही रहें। वहां पर केवल सीआईएसएफ से प्रशिक्षित निजी सुरक्षा कर्मियों की ही तैनाती की जाए।  

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केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पत्तन सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान के लिए वर्तमान में उपलब्ध इंफ्रास्ट्रक्चर में सुरक्षाकर्मियों का प्रशिक्षण जल्द शुरू करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बीओपीएस में तैनात किए जाने वाले सुरक्षाकर्मियों का एक डेटाबेस बनाया जाए। बीओपीएस की सुरक्षा व्यवस्था वाले सभी बंदरगाहों पर कंटेनर स्कैनिंग की व्यवस्था हो। गृह मंत्री ने सीआईएसएफ को देश के बड़े बंदरगाहों, जैसे विशाखापत्तनम पोर्ट, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट और मुंद्रा पोर्ट पर जाकर बीओपीएस को सौंपी जाने वाली सुरक्षा का ट्रायल करे। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार तटीय सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए कृतसंकल्प है। 
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बीओपीएस का गठन Merchant Shipping Act, 2025 की धारा 13 के प्रावधानों के तहत एक वैधानिक निकाय के रूप में किया जा रहा है। ब्यूरो का नेतृत्व एक महानिदेशक करेंगे और यह पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के अधीन काम करेगा। बीओपीएस जहाजों और बंदरगाहों पर सुविधाओं की सुरक्षा से संबंधित नियामक एवं निरीक्षण कार्यों के लिए उत्तरदायी होगा। बीओपीएस सुरक्षा संबंधी सूचनाओं का समयबद्ध विश्लेषण, संग्रहण और आदान-प्रदान सुनिश्चित करेगा, जिसमें साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान होगा। इसमें बंदरगाहों की आईटी अवसंरचना को डिजिटल खतरों से सुरक्षित रखने के लिए डेडिकेटेड प्रभाग भी शामिल होगा।
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गृह मंत्री ने मत्स्यपालन विभाग के अधिकारियों के साथ भी बैठक की और फिशिंग हार्बर्स और फिश लैन्डिंग सेंटर्स की सुरक्षा के लिए आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने मत्स्यपालन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सभी जिलों के डीएम और एसपी को पत्र लिख कर जिले में मौजूद सभी फिश लैन्डिंग सेंटर्स की सूची केन्द्र को भेजने को कहें। मत्स्यपालकों के पंजीकरण को आसान बनाया जाना चाहिए। जिला पुलिस अधीक्षक सुनिश्चित करें कि फिश लैन्डिंग सेंटर्स पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था हो और वहाँ स्थायी पुलिसकर्मियों की ही नियुक्ति हो।


इस अवसर पर केन्द्रीय गृह सचिव; आसूचना ब्यूरो के निदेशक; सीमा प्रबंधन सचिव; पत्तन, पोत परिवहन एवं जहाजरानी सचिव; मत्स्यपालन विभाग के सचिव, केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के महानिदेशक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।     

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