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Exclusive: जब कारगिल में दुश्मनों को पीछे करने की जरूरत थी, तो अफसर सैनिकों से पकड़वा रहे थे चिड़िया और जानवर

Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Wed, 26 Jul 2023 03:01 PM IST
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सार
कारगिल युद्ध के दौरान तैनात ब्रिगेड कमांडर सुरेंद्र सिंह कहते हैं कि भारतीय फौज ने कारगिल में अदम्य साहस का परिचय दिया। लेकिन इस दौरान कई ऐसी खामियां भी सामने आईं, इसका उन्होंने खुलकर विरोध भी किया। वह कहते हैं कि जब दुश्मन हमारी सीमा में घुस रहा था, तो जरूरत के वक्त हमें सैनिक भी नहीं मुहैया कराए गए...
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Brigadier Surender singh made several allegations of negligence during the Kargil war
Kargil Vijay Diwas: Brigadier Surender singh - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

कारगिल की ऊंची चोटियों पर जब पाकिस्तान के सैनिक अपने अड्डे बनाकर कब्जा कर रहे थे, तो अपने देश की सेना के जवानों को जिम्मेदारों ने चिड़िया और जानवरों को पकड़ने की जिम्मेदारी दे रखी थी। हमारे पास जब दुश्मन के घुसपैठ की सूचनाएं होनी चाहिए थीं हम लोग उस वक्त न सिर्फ फेल हुए बल्कि कारगिल में तैनात विशेष बटालियन को कश्मीर घाटी में आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए भेज दिया गया। कारगिल युद्ध के दौरान कारगिल ब्रिगेड के कमांडर सुरेंद्र सिंह ने अमर उजाला डॉट कॉम से बातचीत के दौरान उन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान बरती गई लापरवाहियों के कई आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अगर हम वक्त रहते चेत जाते तो शायद कारगिल जैसे युद्ध ना होते।

कारगिल युद्ध के दौरान तैनात ब्रिगेड कमांडर सुरेंद्र सिंह कहते हैं कि भारतीय फौज ने कारगिल में अदम्य साहस का परिचय दिया। लेकिन इस दौरान कई ऐसी खामियां भी सामने आईं, इसका उन्होंने खुलकर विरोध भी किया। वह कहते हैं कि जब दुश्मन हमारी सीमा में घुस रहा था, तो जरूरत के वक्त हमें सैनिक भी नहीं मुहैया कराए गए। उनका कहना है कि उन्होंने हवाई फोटो और सैटेलाइट इमेज के माध्यम से दुश्मनों के ठिकानों का पता लगाने का लिखित में अनुरोध किया था। लेकिन उन्हें इसमें मदद नहीं मिली। वह कहते हैं कि जिन हेलीकॉप्टर को कारगिल में तैनात किया जाना था, उनको लेह में स्थानांतरित कर दिया गया। यही नहीं उन्होंने उन्हें नियंत्रण रेखा के 10 किलोमीटर के भीतर उड़ान भरने भी अनुमति भी नहीं दी गई। हालांकि वह कहते हैं कि बाद में उन्हें यह सब उपलब्ध कराया गया।

वह कहते हैं कि द्रास सेक्टर में दुश्मनों को खत्म करने के लिए ब्रिगेड लगाई गई थी। जहां से टाइगर हिल, टोलोफिंग, मश्कोह घाटी समेत प्वाइंट 5140 और पॉइंट 5608 से दुश्मनों को भगाना हमारा उद्देश्य था। हमारे सैनिकों ने हमले शुरू होने से पहले आगे बढ़ना भी शुरू कर दिया। ब्रिगेडियर सुरेंद्र सिंह कहते हैं कि इस ऑपरेशन को रोकने के आदेश दिए गए। ब्रिगेड को कारगिल सेक्टर से कश्मीर घाटी में जाने का आदेश दिया गया। वह कहते हैं कि यह तथ्य तो कारगिल की कमेटी की रिपोर्ट में भी दर्ज है।

ब्रिगेडियर सुरेंद्र सिंह कहते हैं कि कारगिल के लिए जो डिवीजन तैयार की गई थी, उसे अस्थाई रूप से घाटी में स्थानांतरित कर आतंकवादी विरोधी गतिविधियों से निपटने के लिए भेज दिया गया था। जो जिम्मेदार अधिकारियों को तैनाती भी दी गई, वह लोग इस युद्ध क्षेत्र के लिए बिल्कुल नए थे। वह कहते हैं कि युद्ध के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाला ट्रोपो स्केटर वाला प्रमुख संचार केंद्र युद्ध से ठीक पहले आग में जल गया था। इसके अलावा वह कहते हैं कि स्ट्राइक कोर के टैंकों को मॉथबॉल (ग्रीस) लगा दिया गया था और उनके दल को कश्मीर घाटी में सड़क खोलने के पैदल सेना और पुलिस के काम करने के लिए भेजा गया था। ब्रिगेड कमांडर सुरेंद्र सिंह कहते हैं कि ऐसी तमाम चीजें थीं, जिसके चलते कारगिल युद्ध से पहले की तैयारियां अपर्याप्त थी।

सेना की कई अहम टुकड़ियों को लगाया जानवर पकड़ने के लिए

ब्रिगेड कमांडर सुरेंद्र सिंह कहते हैं जब दुश्मन देश में घुस रहे थे, तो सेना की अहम टुकड़ियों को लेह में बनने वाले चिड़ियाघर के लिए जानवरों को पकड़ने और पक्षियों को पकड़ने का निर्देश दिया गया। वह कहते हैं कि सेना को मजबूत करने वाली थ्री इंफेंट्री डिविजन ने अलर्ट होने की बजाय अपने अधीन आने वाली रेजीमेंट को इस इलाके में जानवरों और चिड़ियों को पकड़ने के साथ-साथ चिड़ियाघर के लिए पिंजड़े बनाने के आदेश दिए। वह कहते हैं 2 मार्च 1998 को जारी लिखित आदेश के मुताबिक सिग्नल रेजीमेंट को चिड़ियाघर स्थापित करने और उसके कोआर्डिनेशन की जिम्मेदारी दी गई। जबकि इस रेजिमेंट का काम दुश्मनों के होने वाले कम्युनिकेशन का पता लगाकर उसे नेस्तनाबूत करना था।

ब्रिगेड कमांडर सुरेंद्र सिंह कहते हैं कि उन्होंने वर्तमान थल सेना अध्यक्ष जनरल वीपी मलिक को कारगिल में होने वाली घुसपैठ के बारे में जानकारी भी दी। उनका आरोप है इस दौरान ऐसी कई लापरवाही या हुई हैं जिसके चलते ही कारगिल का युद्ध लंबा खिंचा। ब्रिगेडियर सुरेंद्र सिंह का कहना है कि अगर हम लोग 1998 में जब में घुसपैठ होनी शुरू हुई थी, उस वक्त हम अलर्ट हो जाते, तो संभव है कि कारगिल युद्ध जैसी स्थितियां ही नहीं पैदा होतीं। हालांकि इन तमाम परिस्थितियों के बाद भी हमारे सैनिकों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मन के छक्के छुड़ा दिए।

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