Hindi News
›
Video
›
India News
›
West Bengal Elections 2026: After leaving Humayun Kabir, Owaisi takes charge of the electoral front in Bengal!
{"_id":"69dc075fec0923aa210d91eb","slug":"west-bengal-elections-2026-after-leaving-humayun-kabir-owaisi-takes-charge-of-the-electoral-front-in-bengal-2026-04-13","type":"video","status":"publish","title_hn":"West Bengal Elections 2026: हुमायूं कबीर का साथ छोड़ने के बाद, ओवैसी ने बंगाल में संभाला चुनावी मोर्चा!","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
West Bengal Elections 2026: हुमायूं कबीर का साथ छोड़ने के बाद, ओवैसी ने बंगाल में संभाला चुनावी मोर्चा!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Mon, 13 Apr 2026 06:45 AM IST
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पर कहा, "हम अपनी पार्टी के उम्मीदवारों की कामयाबी के लिए आए हैं। मैं यहां 3 दिन रहूंगा.हम कोशिश कर रहे हैं और मुझे उम्मीद है कि इस बार हमें कामयाबी मिलेगी.हमने हुमायूं कबीर के साथ गठबंधन को छोड़ दिया है
असदुद्दीन ओवैसी द्वारा पश्चिम बंगाल में चुनावी मोर्चा संभालने की खबर उस समय और अधिक चर्चा में आई जब यह सामने आया कि उन्होंने स्थानीय नेता हुमायूं कबीर का साथ छोड़ दिया है। यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति में बदलते समीकरणों और क्षेत्रीय गठबंधनों की जटिलता को उजागर करता है। ओवैसी की पार्टी, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM), पहले बंगाल में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए स्थानीय नेताओं और संगठनों के साथ तालमेल बनाने की कोशिश कर रही थी, जिसमें हुमायूं कबीर जैसे नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। हालांकि, राजनीतिक मतभेद, रणनीतिक असहमति या स्थानीय स्तर पर प्रभाव को लेकर विवाद के कारण यह साथ ज्यादा लंबे समय तक नहीं टिक सका।
हुमायूं कबीर से अलग होने के बाद ओवैसी ने सीधे तौर पर बंगाल में अपनी पार्टी की पकड़ मजबूत करने का निर्णय लिया। उन्होंने चुनावी सभाओं, जनसभाओं और रैलियों के माध्यम से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी शुरू की। ओवैसी का मुख्य फोकस उन क्षेत्रों पर रहा जहां अल्पसंख्यक समुदाय की संख्या अधिक है, क्योंकि AIMIM खुद को उनके अधिकारों और प्रतिनिधित्व की आवाज़ के रूप में प्रस्तुत करती है। उन्होंने अपने भाषणों में राज्य सरकार और अन्य प्रमुख दलों पर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्षों से अल्पसंख्यकों को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया है, जबकि उनके वास्तविक मुद्दों—जैसे शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा—पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
इस दौरान ओवैसी ने ममता बनर्जी की सरकार पर भी निशाना साधा और दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों के विकास के नाम पर केवल वादे किए हैं, जमीनी स्तर पर बदलाव नहीं लाया। वहीं, उन्होंने भाजपा पर भी हमला करते हुए खुद को एक वैकल्पिक राजनीतिक ताकत के रूप में पेश किया। इस तरह ओवैसी की रणनीति दोहरी रही—एक ओर सत्तारूढ़ दल की आलोचना और दूसरी ओर भाजपा के खिलाफ खुद को मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित करना।
कुल मिलाकर, हुमायूं कबीर से अलग होने के बाद ओवैसी का यह कदम दर्शाता है कि वे बंगाल की राजनीति में स्वतंत्र रूप से अपनी पार्टी का विस्तार करना चाहते हैं। यह घटनाक्रम राज्य के चुनावी परिदृश्य को और अधिक बहुकोणीय बनाता है, जहां हर पार्टी अपने-अपने तरीके से मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।