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बुलडोजर एक्शन विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई से किया इनकार, कहा- हाईकोर्ट जाएं
Thu, 16 Jul 2026 05:36 PM IST
अमन तिवारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 16 Jul 2026 05:36 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने पीड़ितों को संबंधित हाईकोर्ट जाने को कहा है। साथ ही, हाईकोर्ट से इन मामलों का निपटारा चार महीने के भीतर करने का अनुरोध किया है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि कोर्ट के साल 2024 के फैसले का उल्लंघन करके संपत्तियों को गिराया गया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि इस मामले में तथ्यों के आधार पर कई सवालों पर विचार करने की जरूरत है। इसलिए पीड़ितों को संबंधित हाईकोर्ट का रुख करना चाहिए।
हाईकोर्ट चार महीने में करेगा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इन मामलों के रिकॉर्ड संबंधित हाईकोर्ट को ट्रांसफर करेगा। हाईकोर्ट जिला अदालतों के माध्यम से सबूत जुटाकर सभी तथ्यों की जांच कर सकते हैं। कोर्ट ने साफ किया कि उसने आरोपों पर कोई अंतिम राय नहीं दी है। सुप्रीम कोर्ट ने जो अंतरिम राहत दी थी, वह हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जारी रहेगी। हालांकि, पक्षकार इस अंतरिम आदेश में बदलाव के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दे सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से इन मामलों का निपटारा चार महीने के भीतर करने का अनुरोध किया है।
वकीलों ने कोर्ट में क्या दलीलें दीं?
सोमनाथ में मस्जिदों को गिराने के मामले में वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी ने दलील दी कि वहां सार्वजनिक जमीन पर कोई अतिक्रमण नहीं था। उन्होंने अधिकारियों पर कोर्ट के आदेशों के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मुख्य शिकायत प्रक्रिया का पालन न करने की है। अधिकारी कहेंगे कि प्रक्रिया का पालन हुआ और दूसरा पक्ष कहेगा कि नहीं हुआ। इसलिए यथास्थिति बनाए रखकर हाईकोर्ट को फैसला करने देना बेहतर होगा।
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राजनीतिक दबाव में बुलडोजर कार्रवाई का आरोप
महाराष्ट्र के एक मामले में वरिष्ठ वकील सी.यू. सिंह ने दावा किया कि स्थानीय नेताओं के कहने पर बुलडोजर चलाए जाते हैं। कई बार यह कार्रवाई सजा देने के उद्देश्य से की जाती है। इस पर न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि कानून लागू करने की आड़ में किसी व्यक्ति को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। सवाल यह है कि क्या उस व्यक्ति के पास मंजूरी थी और क्या कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया? उन्होंने कहा कि जब भ्रष्टाचार और अवैध अतिक्रमण के कारण कानून का शासन कमजोर होता है, तब बुलडोजर का इस्तेमाल जरूरी हो जाता है।
ये भी पढ़ें: परिसीमन विधेयक: खरगे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, सर्वदलीय बैठक बुलाने का किया आह्वान, रखी ये मांग
क्या था सुप्रीम कोर्ट का 2024 का फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने 13 नवंबर 2024 को बुलडोजर कार्रवाई पर देशव्यापी दिशानिर्देश जारी किए थे। कोर्ट ने कहा था कि कार्यपालिका खुद जज नहीं बन सकती। किसी आरोपी को दोषी मानकर उसका घर नहीं गिराया जा सकता। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि स्थानीय नगर निगम कानूनों या 15 दिनों के भीतर (जो भी बाद में हो) कारण बताओ नोटिस दिए बिना कोई तोड़फोड़ नहीं होनी चाहिए। केवल आरोपी या दोषी होने पर किसी का घर गिराना पूरी तरह असंवैधानिक है। आदेश के बाद भी प्रभावित लोगों को कोर्ट जाने या घर खाली करने का समय मिलना चाहिए।
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हाईकोर्ट चार महीने में करेगा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इन मामलों के रिकॉर्ड संबंधित हाईकोर्ट को ट्रांसफर करेगा। हाईकोर्ट जिला अदालतों के माध्यम से सबूत जुटाकर सभी तथ्यों की जांच कर सकते हैं। कोर्ट ने साफ किया कि उसने आरोपों पर कोई अंतिम राय नहीं दी है। सुप्रीम कोर्ट ने जो अंतरिम राहत दी थी, वह हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जारी रहेगी। हालांकि, पक्षकार इस अंतरिम आदेश में बदलाव के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दे सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से इन मामलों का निपटारा चार महीने के भीतर करने का अनुरोध किया है।
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वकीलों ने कोर्ट में क्या दलीलें दीं?
सोमनाथ में मस्जिदों को गिराने के मामले में वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी ने दलील दी कि वहां सार्वजनिक जमीन पर कोई अतिक्रमण नहीं था। उन्होंने अधिकारियों पर कोर्ट के आदेशों के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मुख्य शिकायत प्रक्रिया का पालन न करने की है। अधिकारी कहेंगे कि प्रक्रिया का पालन हुआ और दूसरा पक्ष कहेगा कि नहीं हुआ। इसलिए यथास्थिति बनाए रखकर हाईकोर्ट को फैसला करने देना बेहतर होगा।
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राजनीतिक दबाव में बुलडोजर कार्रवाई का आरोप
महाराष्ट्र के एक मामले में वरिष्ठ वकील सी.यू. सिंह ने दावा किया कि स्थानीय नेताओं के कहने पर बुलडोजर चलाए जाते हैं। कई बार यह कार्रवाई सजा देने के उद्देश्य से की जाती है। इस पर न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि कानून लागू करने की आड़ में किसी व्यक्ति को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। सवाल यह है कि क्या उस व्यक्ति के पास मंजूरी थी और क्या कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया? उन्होंने कहा कि जब भ्रष्टाचार और अवैध अतिक्रमण के कारण कानून का शासन कमजोर होता है, तब बुलडोजर का इस्तेमाल जरूरी हो जाता है।
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क्या था सुप्रीम कोर्ट का 2024 का फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने 13 नवंबर 2024 को बुलडोजर कार्रवाई पर देशव्यापी दिशानिर्देश जारी किए थे। कोर्ट ने कहा था कि कार्यपालिका खुद जज नहीं बन सकती। किसी आरोपी को दोषी मानकर उसका घर नहीं गिराया जा सकता। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि स्थानीय नगर निगम कानूनों या 15 दिनों के भीतर (जो भी बाद में हो) कारण बताओ नोटिस दिए बिना कोई तोड़फोड़ नहीं होनी चाहिए। केवल आरोपी या दोषी होने पर किसी का घर गिराना पूरी तरह असंवैधानिक है। आदेश के बाद भी प्रभावित लोगों को कोर्ट जाने या घर खाली करने का समय मिलना चाहिए।