ममता सरकार में बने OBC प्रमाणपत्रों पर बड़ा फैसला: हाईकोर्ट ने सभी किए रद्द; अब सामान्य वर्ग में होंगे धारक?
पश्चिम बंगाल में OBC प्रमाणपत्रों को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस राजशेखर मंथा और जस्टिस अनुज सिंह की पीठ ने पिछली ममता बनर्जी सरकार के दौरान नए नियमों के तहत जारी सभी OBC प्रमाणपत्र रद्द कर दिए। क्या अब प्रमाणपत्रधारकों को सामान्य वर्ग में माना जाएगा? 2010 के बाद की व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पश्चिम बंगाल में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) प्रमाणपत्रों को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया। जस्टिस राजशेखर मंथा और जस्टिस अनुज सिंह की खंडपीठ ने पिछली ममता बनर्जी सरकार के दौरान नए नियम के तहत जारी किए गए सभी OBC प्रमाणपत्र रद्द कर दिए। अदालत ने OBC-A और OBC-B की दो श्रेणियों को भी आगे मान्य नहीं रखने का आदेश दिया है।
क्या OBC-A और OBC-B की श्रेणियां अब खत्म हो जाएंगी?
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अब ओबीसी की ओबीसी-ए और ओबीसी-बी जैसी दो अलग-अलग श्रेणियां नहीं रहेंगी। इन दोनों श्रेणियों के तहत जारी प्रमाणपत्र भी वैध नहीं होंगे। अदालत के आदेश के मुताबिक, जिन लोगों के पास इन श्रेणियों के तहत जारी ओबीसी प्रमाणपत्र हैं, उन्हें अब सामान्य वर्ग में माना जाएगा।
क्या 2010 के बाद बंगाल में OBC को दो श्रेणियों में बांटा गया था?
पश्चिम बंगाल में 2010 के बाद ओबीसी समुदाय को ओबीसी-ए और ओबीसी-बी नाम की दो श्रेणियों में विभाजित किया गया था। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जारी ओबीसी प्रमाणपत्रों को लेकर विवाद खड़ा हुआ। इन प्रमाणपत्रों को जारी करने में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए गए थे।
क्या 66 समुदायों को OBC सूची से हटाने के बाद शुरू हुआ था विवाद?
2024 में ओबीसी सूची से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने 66 समुदायों को ओबीसी सूची से बाहर कर दिया था। अदालत ने नई सूची तैयार करने के लिए नए सिरे से सर्वे कराने का आदेश दिया था। तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने भी कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा था।
क्या नए सर्वे के बाद 142 समुदायों को OBC सूची में शामिल किया गया था?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तत्कालीन राज्य सरकार ने नया सर्वे कराया और ओबीसी-ए और ओबीसी-बी सूचियों में कुछ बदलाव किए। इसके बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। आरोप लगाया गया था कि सर्वे के लिए केवल 2,500 नमूने जुटाए गए और उसी आधार पर नई सूची तैयार की गई। इस प्रक्रिया के जरिए कुल 142 समुदायों को ओबीसी सूची में शामिल किया गया था।
क्या सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद प्रमाणपत्र जारी होते रहे?
कलकत्ता हाईकोर्ट की आपत्ति के बाद राज्य सरकार ने दोबारा सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। हालांकि, इस बार सुप्रीम कोर्ट ने मामले में कोई रोक नहीं लगाई। इसके बाद नए नियमों के आधार पर ओबीसी प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया जारी रही। अब बदली परिस्थितियों में कलकत्ता हाईकोर्ट ने इन नए नियमों के तहत जारी प्रमाणपत्रों को रद्द कर दिया है।