CAPF Bill: पूर्व अफसरों का तर्क- ITBP-BSF-SSB में सैन्य शैली का सीमा प्रबंधन, नागरिक पुलिसिंग से तुलना नहीं
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल ( सामान्य प्रशासन) विधेयक 2026 राज्यसभा से पारित हो गया, विपक्ष ने हंगामा किया नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सदन के समक्ष पांच बिंदुओं के आधार पर इसे संसदीय समिति को भेजे जाने की मांग की। जानें सरकार ने इस बिल को लेकर क्या कहा..?
विस्तार
सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) बिल 2026, बुधवार को राज्यसभा में पारित हो गया है। जहां एक तरफ गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस बिल पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा, यह बिल संघीय ढांचे और संविधान के अनुरुप है। इससे आंतरिक सुरक्षा के मद्देनजर विभिन्न राज्यों के बीच समन्वय का द्रष्टिकोण विकसित होता है। वहीं केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के पूर्व अफसरों ने इस बिल का विरोध करते हुए कहा, इससे कैडर अधिकारियों की पदोन्नति के अवसर कम हो जाएंगे। सरकार को सुप्रीम कोर्ट का निर्णय, वैधानिक हस्तक्षेप के जरिए पलटना नहीं चाहिए। पूर्व कैडर अफसरों ने खासतौर पर 'बॉर्डर गार्डिंग फोर्स' का हवाला देते हुए कहा, आईटीबीपी-बीएसएफ-एसएसबी' में सैन्य शैली का सीमा प्रबंधन होता है, इसकी तुलना नागरिक पुलिसिंग से नहीं की जा सकती। उन्होंने इस बाबत कई तर्क दिए हैं।
चुनौतियों का हल करने में सक्षम होगा ये बिल
राय ने कहा, यह बिल सीएपीएफ अफसरों की सेवा शर्तों में अस्पष्टताओं और प्रबंधन से जुड़ी कई तरह की चुनौतियों का हल करने में सक्षम होगा। इससे सीएपीएफ की कार्यकुशलता और मनोबल, दोनों को सुद्ढ़ करने में मदद मिलेगी। इन बलों में 'ग्रुप ए' पदों की भर्ती के नियमों के लिए एक ढांचा विकसित किया जा रहा है। इससे कई विसंगतियां दूर होंगी। वित्तीय लाभ सुनिश्चित होंगे। कैडर प्रबंधन को संरचनात्मक व्यवस्था के अनुरुप ढाला जा सकेगा। विपक्षी दलों के सदस्यों का यह आरोप कि इससे कैडर अफसरों की पदोन्नति में ठहराव आएगा, ये सही नहीं है। ग्रुप ए के अधिकारियों को चार पदोन्नति सुनिश्चित तौर पर मिल रही हैं। पूर्व आईपीएस और राज्यसभा सांसद बृजलाल ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा, हमें इस बिल का सहयोग करना चाहिए। यह सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का समर्थन करता है।
पूर्व कैडर अफसरों ने बिल के विरोध में दिए ये तर्क
बीएसएफ के पूर्व आईजी एमएनडी दुबे और एडीजी एसके सूद के मुताबिक, इससे विधेयक के लागू होने से सीमा सुरक्षा बलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। वजह, यह उन बलों पर एक व्यापक प्रशासनिक मॉडल लागू करता है, जिनकी प्राथमिक भूमिका शत्रुतापूर्ण और रणनीतिक रूप से संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सीमा प्रबंधन करना है। आईटीबीपी, भारत-चीन सीमा के 3,488 किलोमीटर क्षेत्र की सुरक्षा करता है और उच्च ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात है। इसके लिए असाधारण शारीरिक शक्ति, परिचालन निरंतरता और बल-विशिष्ट विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार, बीएसएफ और एसएसबी अपने-अपने विशेष सीमावर्ती क्षेत्रों में कार्य करते हैं। इन बलों के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत, विशेष सीमा कमान होना चाहिए, न कि नागरिक-पुलिस प्रशासन का कोई सामान्य सिद्धांत।
राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना में विशिष्ट बल
आईटीबीपी, बीएसएफ और एसएसबी जैसे सीमा सुरक्षा बल, राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना में विशिष्ट बल हैं। इनकी मुख्य भूमिका, सीमा पर तैनाती, सीमा नियंत्रण, निगरानी, सामरिक प्रतिक्रिया और संवेदनशील क्षेत्रों में निरंतर उपस्थिति है। वहां परिस्थितियां सशस्त्र संघर्ष में भी तब्दील हो सकती हैं। इस अर्थ में, इनकी परिचालन भूमिका, सामान्य नागरिक पुलिसिंग की तुलना में विशेष सैन्य शैली के सीमा प्रबंधन के अधिक निकट है। इस प्रकार के बल को संरचनात्मक रूप से इस तरह नहीं माना जा सकता जैसे कि इसकी केंद्रीय आवश्यकता, नियमित राज्य-पुलिस समन्वय हो।
आईटीबीपी में तैनाती की वास्तविकता
आईटीबीपी में कैडर अधिकारी, सहायक कमांडेंट के पद से बल में प्रवेश करते हैं। सेवानिवृत्ति तक उसी बल संरचना के भीतर सेवा करते रहते हैं। कंपनी और बटालियन कमांड स्तर पर युद्ध का अनुभव सबसे गहन होता है। कमांडेंट के पद तक यह अत्यंत प्रासंगिक बना रहता है। वे बार-बार कठिन क्षेत्रों में सेवा करते हैं, सीमा चौकियों, गश्ती पैटर्न, रसद श्रृंखला और वास्तविक नियंत्रण रेखा की गतिशीलता का दीर्घकालिक ज्ञान प्राप्त करते हैं। इसके विपरीत, प्रतिनियुक्ति पर आने वाले अधिकारी आम तौर पर वरिष्ठ पर्यवेक्षी स्तरों पर बल में प्रवेश करते हैं। वे बल की इकाई-स्तरीय फील्ड कमांड प्रणाली से निकले हुए नहीं होते।
भर्ती से सेवानिवृत्ति तक बल-विशिष्ट प्रशिक्षण
सीमा सुरक्षा बलों के कैडर अधिकारियों को भर्ती से ही बल-विशिष्ट प्रशिक्षण द्वारा आकार दिया जाता है। आईटीबीपी में, अधिकारियों के प्रशिक्षण का एक बड़ा हिस्सा सीमा सुरक्षा, उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कार्य करना, क्षेत्र कौशल, उत्तरजीविता, सामरिक गतिविधि, दूरस्थ चौकियों में नेतृत्व और हिमालयी वातावरण में परिचालन प्रबंधन से संबंधित होता है। वे प्रगतिशील पूर्व-पदोन्नति और पदोन्नति पाठ्यक्रमों में भाग लेते हैं। बल-विशिष्ट मानकों से नियमित तौर पर अपडेट रहते हैं। पूर्व कैडर अफसरों ने कहा, इससे बल की अपनी परिचालन वास्तविकताओं द्वारा गठित एक पेशेवर आंतरिक कमान प्रणाली का निर्माण होता है।
राज्य प्रशासन के साथ 'समन्वय', एक छलावा
सीमा सुरक्षा बलों में समन्वय मिशन-विशिष्ट होता है। यहां केवल राज्य-केंद्रित प्रशासन के साथ 'समन्वय' का कोई ज्यादा औचित्य नहीं है। यह सीमा सुरक्षा बलों के संदर्भ में एक छलावा मात्र है। वास्तविकता में, आईटीबीपी और बीएसएफ सेना, नागरिक प्रशासन, खुफिया एजेंसियों और, जहां सीमा तंत्र की आवश्यकता होती है, सीमा पार समकक्ष सीमा अधिकारियों के साथ समन्वय करते हैं। आईटीबीपी के मामले में, सीमा कर्मियों की बैठकों, ध्वज बैठकों, स्थानीय सामरिक मुठभेड़ पैटर्न और पीएलए के व्यवहार की संस्थागत स्मृति कैडर के भीतर वर्षों के क्षेत्र अनुभव के माध्यम से विकसित होती है। यह बल-विशिष्ट समन्वय है, जो जमीनी स्तर से निर्मित होता है। इसे किसी सामान्य राज्य-प्रशासन तर्क तक सीमित नहीं किया जा सकता है। बीएसएफ और एसएसबी के मामले में भी यही स्थिति है।
जमीनी कमान बनाम पैराशूट आधारित पर्यवेक्षण .
पूर्व अफसरों के मुताबिक, कैडर अधिकारी जमीनी कमांडर होते हैं। वे जानते हैं कि लंबी दूरी की गश्त वास्तव में कैसे की जाती है, विरल ऊंचाई मनोबल और सहनशक्ति को कैसे प्रभावित करती है। सर्दियों में विशेष दर्रे कैसा व्यवहार करते हैं। जवान, भूभाग की चुनौतियों का सामना कैसे करते हैं। स्थानीय परिस्थितियां, संचालन, कल्याण और तैयारी को कैसे आकार देती हैं। उनका ज्ञान क्रमिक और संचयी होता है। उच्च पर्यवेक्षण स्तरों पर प्रतिनियुक्त अधिकारी प्रशासनिक विविधता ला सकते हैं, लेकिन ऐसे इनपुट अस्थायी होते हैं। वे अक्सर बल-विशिष्ट क्षेत्र अनुभव से असंबद्ध होते हैं। प्रत्येक नई प्रतिनियुक्ति चक्र के साथ, बल प्रशासनिक प्रयोगों के एक और दौर में धकेल दिया जाता है। कैडर अधिकारी, निरंतरता, परीक्षित अवधारणाएं और स्थिर संस्थागत शिक्षा प्रदान करते हैं।
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चिकित्सा श्रेणियां और शेप आधारित फिटनेस
एक बड़ा मुद्दा सीमा सुरक्षा बलों में चिकित्सा व्यवस्था से संबंधित है। आईटीबीपी और इसी तरह के बलों में, सेवा शर्तें सख्त क्षेत्र फिटनेस की संस्कृति में संचालित होती हैं। शेप आधारित चिकित्सा वर्गीकरण चुनौतीपूर्ण वातावरण में परिचालन फिटनेस निर्धारित करने के लिए बल की शब्दावली का हिस्सा है। यह केवल दिखावटी आवश्यकता नहीं है। यह इस अपेक्षा को दर्शाता है कि सीमावर्ती बल के अधिकारियों को कठिन भूभाग, प्रतिकूल मौसम और संभावित भीषण युद्ध जैसी स्थितियों में कार्य करने में सक्षम रहना चाहिए। जहां किसी बल का गठन ऐसी चिकित्सा-योग्यता संस्कृति के आधार पर किया जाता है, वहां एक वैध संस्थागत प्रश्न उठता है कि क्या प्रतिनियुक्त वरिष्ठ अधिकारियों पर भी बल-विशिष्ट योग्यता संबंधी समान अपेक्षाएं लागू होती हैं। क्या कैडर अधिकारियों और बाहरी अधिकारियों के बीच दोहरा मापदंड स्थापित होता है। ऊंचाई पर तैनात सीमावर्ती बल में चिकित्सा, क्षमता कमान की विश्वसनीयता का एक अभिन्न अंग है।
युद्धकालीन तर्क बाह्य नियंत्रण को उचित ठहराता है
पूर्व कैडर अफसरों के अनुसार, यदि युद्धकालीन तर्क बाह्य नियंत्रण को उचित ठहराता है, तो सेना में क्यों नहीं। यदि यह तर्क दिया जाता है कि संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा स्थितियों में समन्वय के लिए बाहरी सेवाओं के नियंत्रण की आवश्यकता होती है, तो यही तर्क एक अस्थिर निष्कर्ष की ओर ले जाता है। तब यह प्रश्न उठता है कि सेना में भी इसी प्रकार की प्रतिनियुक्ति क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए, लेकिन सेना, नौसेना और तटरक्षक बल का नेतृत्व उनके अपने कैडर के अधिकारी ही करते हैं। वजह, विशिष्ट क्षेत्रों में ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता होती है, जो उस क्षेत्र से परिचित हों। सीमा सुरक्षा बल, अपने आप में विशिष्ट परिचालन संस्थाएं होने के नाते, संस्थागत सम्मान और कमान की वैधता के उसी सिद्धांत के पात्र हैं।
समानता का समर्थन: बीएसएफ और एसएसबी
यही तर्क बीएसएफ और एसएसबी का भी समर्थन करता है। बीएसएफ पाकिस्तान और बांग्लादेश की सीमाओं पर कार्यरत है। एसएसबी नेपाल और भूटान की सीमाओं पर कार्यरत है। प्रत्येक बल, अपने-अपने क्षेत्र का ज्ञान, खतरे की समझ, क्षेत्र में अभ्यास और कमान की संस्कृति विकसित करता है। इसलिए, प्रस्तावित विधेयक की खामी केवल एक बल तक सीमित नहीं है। यह एक ही प्रशासनिक ढांचे के तहत विशिष्ट सीमा सुरक्षा बलों के विशिष्ट चरित्र को कुचलने का जोखिम पैदा करता है। निष्कर्ष तौर पर यह कहा जा सकता है कि आईटीबीपी, बीएसएफ और एसएसबी जैसे सीमा सुरक्षा बल, विशिष्ट सीमा बल हैं। इन्हें बल-विशिष्ट प्रशिक्षण, क्षेत्र में निरंतरता, चिकित्सा-योग्यता संबंधी अपेक्षाएं और सामान्य नागरिक-पुलिस प्रशासन से कहीं अधिक व्यापक परिचालन समन्वय तंत्र प्राप्त हैं। उनका नेतृत्व दर्शन उनके अपने क्षेत्र, भूभाग और संस्थागत स्मृति से प्रेरित होना चाहिए। प्रस्तावित सीएपीएफ विधेयक यदि इस अंतर को नजरअंदाज करता है, तो इसे संरचनात्मक रूप से विशिष्ट सीमा सुरक्षा बलों के स्वरूप के लिए अनुपयुक्त मानते हुए विरोध किया जा सकता है।