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Tripura: 'घुसपैठ रोकने के लिए क्या किया, तीन माह में बताएं', त्रिपुरा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगी रिपोर्ट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Asmita Tripathi Updated Fri, 03 Apr 2026 01:37 PM IST
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सार

त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से एक रिपोर्ट मांगी। इस रिपोर्ट में राज्य सरकार ने घुसपैठ रोकनेके लिए क्या काम किया है। यह जानकारी तीन महीने के भीतर देनी है। 

 

Tripura High Court seeks report from state government in three months  what has been done to stop infiltration
त्रिपुरा उच्च न्यायालय - फोटो : ANI
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विस्तार

त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से घुसपैठ रोकने के लिए उठाए गए कदमों के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है। कोर्ट ने इसके लिए तीन महीना का समय दिया है। यह जानकारी एक वकील ने शुक्रवार को दिया। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने गुरुवार को टिपरा मोथा पार्टी के विधायक रंजीत देबबर्मा सहित तीन व्यक्तियों की और से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया।

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याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि गृह मंत्रालय की ओर से घुसपैठ रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किए जाने के बावजूद, राज्य सरकार इस समस्या के समाधान के लिए प्रभावी उपाय करने में विफल रही है। याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले एंथोनी देबबर्मा ने कहा, "विभागीय पीठ ने राज्य सरकार को गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार घुसपैठियों का पता लगाने। उन्हें हिरासत में लेने और निर्वासित करने के लिए उठाए गए कदमों पर अगले तीन महीनों के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।"


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त्रिपुरा सरकार इस संबंध में ठीक से काम नहीं कर
पूर्वोत्तर राज्य बांग्लादेश के साथ 856 किलोमीटर की अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है, जिसमें से लगभग 85 प्रतिशत सीमा पर बाड़ लगाई जा चुकी है। अदालत के निर्देश पर प्रतिक्रिया देते हुए रंजीत देबबर्मा ने कहा कि राज्य की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए घुसपैठ को तुरंत रोका जाना चाहिए। विधायक ने कहा कि जहां अन्य राज्य गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार अवैध प्रवासियों की पहचान करने और उन्हें निर्वासित करने के लिए घुसपैठ विरोधी अभियान चला रहे हैं। वहीं त्रिपुरा सरकार इस संबंध में ठीक से काम नहीं कर रही है। उन्होंने कहा, "मैंने कई मंचों पर यह मुद्दा उठाया था, लेकिन मुझे कोई उचित जवाब नहीं मिला, जिसके चलते मुझे अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अब इस मामले पर अंतिम फैसला अदालत ही लेगी।"


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