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CBC: मिशन कर्मयोगी के तहत 700 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों का होगा कायाकल्प, बढ़ेगी सरकारी कर्मचारियों की दक्षत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Sandhya Kumari Updated Mon, 01 Jun 2026 12:37 PM IST
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सार

मिशन कर्मयोगी के तहत देशभर के 700 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों में व्यापक सुधार और आधुनिकीकरण की प्रक्रिया जारी है। क्षमता निर्माण आयोग की यूएनएनएटीआई पहल के माध्यम से सरकारी कर्मचारियों को अधिक गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और प्रभावी प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।

CBC over 700 training institutes will undergo revitalization enhancing efficiency government employees
क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

क्षमता निर्माण आयोग (सीबीसी) की अध्यक्ष एस. राधा चौहान ने कहा कि देशभर में सरकारी कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए संचालित 700 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों के व्यापक संरचनात्मक परिवर्तन की प्रक्रिया जारी है। यह पहल सरकारी कर्मचारियों की क्षमता वृद्धि और प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक जरूरी कदम है।

पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में चौहान ने बताया कि सीबीसी ने भारत सरकार के 90 से अधिक मंत्रालयों और विभागों में कार्यरत लोक सेवकों की भूमिकाओं का विस्तृत मानचित्रण किया है तथा इन भूमिकाओं के अनुरूप क्षमता निर्माण योजनाएं विकसित की हैं।

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700 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों की पहचान

उन्होंने कहा कि देशभर के 700 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों की पहचान और मैपिंग के बाद आयोग ने यूनिफाइड न्यू-एज नेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूशंस (यूएनएनएटीआई) पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य इन संस्थानों के निरंतर विकास, आधुनिकीकरण और गुणवत्ता सुधार को बढ़ावा देना है। यह पहल सामूहिक प्रयास, ज्ञान साझाकरण और सहयोगात्मक विकास की भारतीय परंपरा पर आधारित है।

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चौहान ने कहा कि पहले यह स्पष्ट रूप से ज्ञात नहीं था कि देशभर में 700 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान संचालित हो रहे हैं। यद्यपि सभी संस्थान प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करते हैं, लेकिन अधिकांश स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं। यूएनएनएटीआई के माध्यम से इन्हें एक साझा मंच पर लाया जा रहा है, जहां वे आपस में संवाद, सहयोग और अनुभवों को बांट सकेंगे। इससे संस्थागत संसाधनों, विशेषज्ञता और ज्ञान का अधिक प्रभावी उपयोग संभव होगा।

एक साथ आकर व्यापक रूप में अनुभव साझा होंगे

उन्होंने कहा कि अलग-अलग संस्थानों के पास अवसंरचना, संकाय, विषय विशेषज्ञता अथवा विशेष पाठ्यक्रमों के संदर्भ में सीमाएं हो सकती हैं, किंतु सामूहिक रूप से उनकी क्षमता अत्यंत व्यापक है। यूएनएनएटीआई इसी सामूहिक शक्ति का उपयोग करने का प्रयास है, जिसके तहत संस्थान स्टूडियो, सम्मेलन कक्ष जैसी सुविधाओं को साझा कर सकेंगे, संकाय एवं विषय विशेषज्ञों के साझा समूह विकसित कर सकेंगे तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों और ज्ञान संसाधनों को साझा कर सकेंगे।

उत्तर प्रदेश कैडर की 1988 बैच की सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी चौहान ने बताया कि जून माह के अंत तक सभी 700 से अधिक संस्थानों को यूएनएनएटीआई पोर्टल से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

हर राज्य के लोक सेवकों को अधिक मौके मिलेंगे

प्रशिक्षण प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में किसी भी वर्ष के दौरान केवल लगभग तीन प्रतिशत लोक सेवकों को ही संस्थागत प्रशिक्षण प्राप्त हो पाता है, जो अत्यंत कम अनुपात है। इसी कारण आयोग मौजूदा संस्थागत संसाधनों के बेहतर उपयोग और सरकार के सभी स्तरों पर गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण तक पहुंच का विस्तार करने पर विशेष ध्यान दे रहा है।

उन्होंने बताया कि यूएनएनएटीआई पोर्टल के माध्यम से प्रत्येक संस्थान को डेटा-आधारित विश्लेषण और सुझाव उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे वे अपने संसाधनों के उपयोग में सुधार कर सकेंगे, प्रशिक्षण की गुणवत्ता बढ़ा सकेंगे तथा मंत्रालयों और विभागों की क्षमता निर्माण संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप अपने कार्यक्रमों को बेहतर ढंग से तैयार कर सकेंगे।

चौहान ने कहा कि विशेष रूप से राज्यों में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी ऐसे हैं जो अपने पूरे सेवाकाल के दौरान किसी भी प्रकार के संस्थागत प्रशिक्षण से वंचित रह जाते हैं। इसका प्रमुख कारण कई प्रशिक्षण संस्थानों में पर्याप्त संसाधनों और क्षमता का अभाव है।

210 से अधिक संस्थानों अभी तक मान्यता प्राप्त कर चुके

आयोग ने देशभर के प्रशिक्षण संस्थानों के मूल्यांकन और मान्यता के लिए राष्ट्रीय सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थान मानक (एनएससीएसटीआई) ढांचा विकसित किया है। अब तक 210 से अधिक संस्थानों को इस ढांचे के तहत मान्यता प्रदान की जा चुकी है।

हालांकि, चौहान ने स्पष्ट किया कि मान्यता प्रदान करना अंतिम उद्देश्य नहीं है। वास्तविक लक्ष्य संस्थागत क्षमता, प्रशिक्षण गुणवत्ता, संसाधनों के उपयोग और संपूर्ण प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोग को निरंतर सुदृढ़ करना है। इसी दृष्टिकोण के तहत एनएससीएसटीआई को आगे विकसित कर यूएनएनएटीआई के रूप में विस्तारित किया गया है।

क्षमता निर्माण आयोग मिशन कर्मयोगी ढांचे का संरक्षक संस्थान है। वर्ष 2020 में शुरू किए गए राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम (एनपीसीएससीबी), जिसे मिशन कर्मयोगी के नाम से भी जाना जाता है, का उद्देश्य भारतीय मूल्यों पर आधारित, आधुनिक दक्षताओं से युक्त, भविष्य के लिए तैयार तथा नागरिक-केंद्रित सार्वजनिक सेवा प्रदान करने वाली सिविल सेवा का निर्माण करना है।

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