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सीबीएसई मार्किंग विवाद: 'अक्षमता की मिसाल हैं मंत्री प्रधान', कांग्रेस की मांग- राजधर्म निभाते हुए इस्तीफा दें
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Mon, 01 Jun 2026 12:39 PM IST
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जयराम रमेश, कांग्रेस नेता
- फोटो : एएनआई
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सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम से जुड़े विवाद को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्रालय की लापरवाही और अनियमितताओं के कारण लाखों छात्रों को मानसिक परेशानी झेलनी पड़ी है और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को राजधर्म निभाते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर कहा कि कई सप्ताह तक साइबर सुरक्षा खामियों से इनकार करने के बाद सीबीएसई ने आखिरकार स्वीकार कर लिया है कि उसका OSM सिस्टम प्रभावित हुआ है। जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि इस मामले में ठेका प्राप्त कंपनी COEMPT के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी?
कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का मांगा इस्तीफा
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सीबीएसई ने अगस्त 2025 की निविदा शर्तों में अयोग्य कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार रखा था, लेकिन बाद में संशोधन कर यह प्रावधान हटा दिया गया। उन्होंने इसे कंपनी को बचाने की कोशिश करार दिया। कांग्रेस नेता ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अहंकार और अयोग्यता की मिसाल बन गए हैं तथा उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
राहुल गांधी भी सीबीएसई विवाद पर सरकार को घेर चुके
इससे पहले राहुल गांधी ने भी सीबीएसई की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया और उससे उससे जुड़े शुल्क को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा को सेवा नहीं बल्कि कारोबार की तरह देखा जाता है, तो गलतियां सुधरने के बजाय बढ़ती जाती हैं। दरअसल, सीबीएसई के कक्षा 12 के कई छात्रों ने शिकायत की थी कि पुनर्मूल्यांकन के लिए पोर्टल पर अपलोड की गई उत्तर पुस्तिकाएं उनकी नहीं थीं। बाद में सीबीएसई ने संबंधित छात्रों से संपर्क कर उनकी सही उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराईं।
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इस मामले की जांच के लिए आईआईटी मद्रास, आईआईटी कानपुर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। साथ ही पोर्टल और पेमेंट गेटवे सिस्टम को और मजबूत बनाने पर काम चल रहा है। विवाद के केंद्र में रही कंपनी COEMPT को लेकर भी विपक्ष सवाल उठा रहा है। कांग्रेस का दावा है कि कंपनी अपने पुराने नाम ग्लोबअरीना के समय से ही विवादों में रही है।
कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का मांगा इस्तीफा
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सीबीएसई ने अगस्त 2025 की निविदा शर्तों में अयोग्य कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार रखा था, लेकिन बाद में संशोधन कर यह प्रावधान हटा दिया गया। उन्होंने इसे कंपनी को बचाने की कोशिश करार दिया। कांग्रेस नेता ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अहंकार और अयोग्यता की मिसाल बन गए हैं तथा उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
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राहुल गांधी भी सीबीएसई विवाद पर सरकार को घेर चुके
इससे पहले राहुल गांधी ने भी सीबीएसई की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया और उससे उससे जुड़े शुल्क को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा को सेवा नहीं बल्कि कारोबार की तरह देखा जाता है, तो गलतियां सुधरने के बजाय बढ़ती जाती हैं। दरअसल, सीबीएसई के कक्षा 12 के कई छात्रों ने शिकायत की थी कि पुनर्मूल्यांकन के लिए पोर्टल पर अपलोड की गई उत्तर पुस्तिकाएं उनकी नहीं थीं। बाद में सीबीएसई ने संबंधित छात्रों से संपर्क कर उनकी सही उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराईं।
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