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Congress: सीबीएसई की तीन भाषा की नीति पर बवाल, जयराम रमेश बोले- शिक्षा मंत्रालय चला रहा राजनीतिक एजेंडा

नई दिल्ली, पीटीआई Published by: रिया दुबे Updated Thu, 04 Jun 2026 01:25 PM IST
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सार

कांग्रेस ने सीबीएसई की तीन-भाषा नीति को राजनीतिक एजेंडा बताते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि बिना नई एनसीईआरटी किताबों के यह फैसला लागू किया गया है, जिससे छात्रों और स्कूलों पर असर पड़ेगा।

CBSE 3-Language Policy Row: Jairam Ramesh Alleges Political Agenda
क्या बोले जयराम रमेश? - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

कांग्रेस ने गुरुवार को कक्षा 9 और 10 में सीबीएसई द्वारा तीन-भाषा फॉर्मूला लागू किए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर राजनीतिक एजेंडा चलाने का आरोप लगाया। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि इस फैसले के पीछे कोई शैक्षणिक आधार नहीं है और यह पूरी तरह राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए उनके इस्तीफे की मांग की।

जयराम रमेश ने क्या आरोप लगाए?

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा कि दिसंबर 2025 में सीबीएसई की गवर्निंग बॉडी की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि एनसीईआरटी द्वारा विभिन्न भाषाओं की कक्षा-वार पाठ्यपुस्तकें जारी होने तक मौजूदा भाषा व्यवस्था जारी रखी जाएगी। इस फैसले पर उस समय के सीबीएसई अध्यक्ष और सचिव ने भी हस्ताक्षर किए थे।

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उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद मई 2026 में सीबीएसई ने एक सर्कुलर जारी कर 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 और 10 में तीसरी भाषा अनिवार्य रूप से जोड़ने का निर्देश दिया। साथ ही स्कूलों को कक्षा 9 के छात्रों को तीसरी भाषा पढ़ाने के लिए एनसीईआरटी की कक्षा 6 की किताबों का उपयोग करने को कहा गया।

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सीबीएसई ने सिफारिशों को किया दरकिनार 

कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि पिछले छह महीनों में ऐसा क्या बदल गया? एनसीईआरटी ने अब तक कक्षा 9 और 10 के लिए तीसरी भाषा की नई पाठ्यपुस्तकें जारी नहीं की हैं। उन्होंने कहा कि सीबीएसई ने अपनी ही पाठ्यक्रम समिति और गवर्निंग बॉडी की सिफारिशों को दरकिनार कर यू-टर्न लिया है।

रमेश ने कहा कि इस फैसले से स्कूलों की शैक्षणिक योजनाएं प्रभावित हो रही हैं और लाखों छात्रों के भविष्य पर असर पड़ सकता है। उनके अनुसार, शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई जैसे स्वायत्त संस्थान शिक्षा विशेषज्ञों की सलाह के बजाय सरकार के राजनीतिक एजेंडे के आधार पर काम कर रहे हैं।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की

उन्होंने कहा कि जब जवाबदेही तय करने की बात आती है तो अधिकारियों का तबादला कर दिया जाता है, जबकि राजनीतिक नेतृत्व को बचा लिया जाता है। रमेश ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को शैक्षणिक विशेषज्ञता का सम्मान न करने वाला राजनीतिक व्यक्ति बताते हुए उनके इस्तीफे की मांग की।

गौरतलब है कि कांग्रेस हाल के दिनों में सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) विवाद को लेकर भी केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर लगातार हमलावर रही है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। इस विवाद के बाद सीबीएसई अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया है।

केंद्र सरकार ने OSM प्रणाली की खरीद प्रक्रिया और उससे जुड़े मामलों की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान करेंगी।

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