CBSE OSM Controversy: 'Gen-Z तोड़ेंगे पीएम मोदी का अहंकार', सीबीएसई मूल्यांकन विवाद पर राहुल का सरकार पर हमला
सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को लेकर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की शिकायतों को दबाया जा रहा है। वहीं, विवाद बढ़ने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने IIT मद्रास और IIT कानपुर के विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया है।
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क्या बोले राहुल गांधी?
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर हिंदी में एक पोस्ट साझा की। उन्होंने कहा कि दशकों में पहली बार सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं को लेकर इतने गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इस साल 18.5 लाख छात्र परीक्षाओं में शामिल हुए थे। पिछले एक हफ्ते से छात्र ऑन-स्क्रीन मार्किंग में गलतियों और मूल्यांकन में गड़बड़ियों की शिकायत कर रहे हैं। राहुल ने आरोप लगाया कि इन शिकायतों को अनसुना किया जा रहा है और शिक्षा मंत्री अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं।
मोदी-प्रधान की जोड़ी ने एक और संस्था को धांधली का प्रतीक बना दिया।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 25, 2026
दशकों में पहली बार CBSE बोर्ड परीक्षा पर इतने गंभीर सवाल उठे हैं। 18.5 लाख बच्चों ने परीक्षा दी - और एक हफ़्ते से OSM, ग़लत मार्किंग और जाँच की गड़बड़ी की शिकायतें अनसुनी पड़ी हैं और शिक्षा मंत्री अपनी कुर्सी से…
कांग्रेस नेता ने एक 17 साल के छात्र का जिक्र किया जिसकी उत्तर पुस्तिका का गलत मूल्यांकन हुआ था। राहुल ने कहा कि जब उस छात्र ने न्याय की उम्मीद में सोशल मीडिया का सहारा लिया, तो उसे मदद मिलने के बजाय गालियां दी गईं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के आईटी सेल ने उस छात्र को देशद्रोही, 'सोरोस एजेंट' और 'डीप स्टेट' का हिस्सा बता दिया। राहुल ने कहा कि जब एक बच्चा अपने भविष्य के लिए आवाज उठाता है, तो भाजपा उसे गद्दार कहती है।
राहुल गांधी ने आगे कहा कि सच तो यह है कि मोदी सरकार युवाओं और जेन जी से डरती है क्योंकि वे अब सवाल पूछने लगे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो भी सवाल पूछने की हिम्मत करता है, यह सरकार उसे बदनाम करती है और डराकर कुचल देती है। राहुल ने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि यही युवा आपका अहंकार तोड़ेंगे।
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शिक्षा मंत्रालय उठाए बड़े कदम
इस विवाद के बीच शिक्षा मंत्रालय ने रविवार को बड़ा कदम उठाया। मंत्रालय ने कहा कि सीबीएसई अपने पोर्टल की तकनीकी समस्याओं को ठीक करने के लिए आईआईटी मद्रास और आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों की मदद लेगा। यह फैसला छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों के बाद लिया गया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने निर्देश दिए हैं कि आईआईटी के प्रोफेसरों की टीमें उन सभी तकनीकी मुद्दों की जांच करें जो इस साल सामने आए हैं। यह टीम पोर्टल की स्थिरता और सर्वर की क्षमता में सुधार करेगी। प्रधान ने कहा कि छात्रों का हित सबसे जरूरी है और सीबीएसई को एक पारदर्शी सिस्टम बनाना चाहिए। उन्होंने शनिवार को सीबीएसई से इस मामले पर पूरी रिपोर्ट भी मांगी थी।