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CRPF: ग्रुप 'ए' अफसरों पर कार्रवाई, कमांडेंट ने डीआईजी 'विजिलेंस' पर उठाए सवाल, हो रहा नियमों का उल्लंघन!

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 25 May 2026 07:28 PM IST
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सार

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर विवाद बढ़ा। कमांडेंट एसके द्विवेदी ने डीआईजी आरके ठाकुर से पूछा कि ग्रुप ‘ए’ अधिकारियों के खिलाफ राष्ट्रपति के आदेश प्रमाणित करने का कानूनी अधिकार उन्हें किस नियम से मिला है।

CRPF Action Taken Against Group A Officers Commandant Questions DIG Vigilance Alleges Violation of Rules
CRPF - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' के हेडक्वार्टर में डीआईजी 'सीआर/विजिलेंस' की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सीआरपीएफ के जोरहाट सेक्टर के कमांडेंट एसके द्विवेदी ने 20 मई को डीआईजी आरके ठाकुर (सीआर/विजिलेंस) को एक पत्र लिखा है। इसकी एक प्रति बल के सभी जोन 'एनईजेड, सेंट्रल और साउथ जोन' के अलावा जोरहाट सेक्टर व डीआईजी लॉ को भेजी गई है। पत्र में उन्होंने पूछा है कि डीआईजी 'सीआर/विजिलेंस' निदेशालय को ग्रुप 'ए' अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही के संबंध में मंत्री के आदेशों को प्रमाणित करने का न तो अधिकार है और न ही वे इसके लिए अधिकृत हैं। ऐसे में कमांडेंट ने उक्त डीआईजी से अनुरोध किया है कि इस बाबत वह सटीक कानूनी/वैधानिक प्राधिकरण बताया जाए, जिसके तहत ऐसा प्रमाणीकरण किया जा रहा है। इस संबंध में महानिदेशालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सब नियमों के तहत हो रहा है। 

विस्तृत औपचारिक आपत्ति को रिकॉर्ड में लिया जाए 

कमांडेंट ने आग्रह किया है कि सीआरपीएफ महानिदेशालय के डीआईजी 'सीआर एवं विजिलेंस' द्वारा मंत्रियों के आदेशों (राष्ट्रपति की ओर से जारी) के प्रमाणीकरण पर मेरी विस्तृत औपचारिक आपत्ति को रिकॉर्ड में लिया जाए। सीसीएस (सीसीए) नियम, 1965 के नियम 8 और 12 के तहत, राष्ट्रपति, गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन सीआरपीएफ में कार्यरत अधिकारियों सहित सभी केंद्रीय सरकारी समूह 'ए' अधिकारियों के लिए क्रमशः 'नियुक्ति प्राधिकारी' और 'अनुशासनात्मक प्राधिकारी' हैं। हालांकि राष्ट्रपति प्रत्यक्ष रूप से कार्य नहीं करते हैं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 77 (2), भारत सरकार (कार्य आवंटन) नियम, 1961 और भारत सरकार (कार्य संचालन) नियम, 1961 के अनुसार मंत्रियों के माध्यम से कार्य करते हैं। इसमें एक मौलिक प्रश्न उठता है कि राष्ट्रपति की ओर से मंत्री द्वारा जारी आदेशों को प्रमाणित करने और संप्रेषित करने के लिए कौन सक्षम है। 

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मंत्री द्वारा अनुमोदन वैधानिक रूप से अनिवार्य 

नियमानुसार, केंद्रीय सरकार के समूह 'ए' अधिकारियों से संबंधित अनुशासनात्मक कार्यवाही को संबंधित मंत्री द्वारा एक नोट पर अनुमोदित करना वैधानिक रूप से अनिवार्य है। यह भारत सरकार के निर्णय (जीआईडी) संख्या 3 (1) (बी) के तहत सीसीएस (सीसीए) नियम, 1965 (जीआई एमएचए ओएम संख्या एफ.39/1/69-एस्ट्स. (ए), दिनांक 16 अप्रैल, 1969 द्वारा अधिसूचित) में उल्लिखित है। मंत्रिमंडल सचिवालय कार्यालय प्रक्रिया नियमावली (सीएसएमओपी), 2022, 16वें संस्करण के पृष्ठ 103 पर पैरा 9.3 (i) के अनुसार, राष्ट्रपति के नाम से जारी एवं निष्पादित सभी आदेश और दस्तावेज उनके नाम से लिखे जाने चाहिएं। उन पर अवर सचिव, उससे ऊपर के नियमित या पदेन सचिवालय स्तर वाले अधिकारी द्वारा या प्रमाणीकरण (आदेश और अन्य दस्तावेज) नियम, 2002 के तहत विशेष रूप से अधिकृत किसी अन्य अधिकारी द्वारा हस्ताक्षर किए जाने चाहिएं। 

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क्या सीआरपीएफ एक विभाग नहीं है  

प्रमाणीकरण (आदेश और अन्य दस्तावेज) नियम, 2002 के अनुच्छेद 2 के अनुसार, राष्ट्रपति के नाम से जारी किए गए सभी आदेशों को सचिव आदि द्वारा प्रमाणित किया जाना आवश्यक है। सीएसएमओपी के अनुच्छेद 2.4, पृष्ठ 6 के अनुसार, सरकारी नीतियों और योजनाओं के निर्माण के लिए कोई मंत्रालय/विभाग जिम्मेदार होता है। वर्तमान संदर्भ में, सीआरपीएफ उस अर्थ में 'विभाग' नहीं है। सीएसएमओपी के अनुच्छेद 2.6, पृष्ठ 8 के अनुसार, किसी विभाग के संलग्न और अधीनस्थ कार्यालय हो सकते हैं। सीआरपीएफ मंत्रालय के किसी विभाग के अधीन एक अधीनस्थ कार्यालय की श्रेणी में आता है।

क्या कहता है सीवीसी का नियम 

सीवीसी, 2021 द्वारा जारी सतर्कता नियमावली के 7वें अध्याय में अनुशासनात्मक कार्यवाही और निलंबन के अनुच्छेद 7.10.2 के अनुसार, जहां सक्षम अनुशासनात्मक प्राधिकारी राष्ट्रपति हैं, मंत्री की स्वीकृति के बाद, आरोप पत्र पर राष्ट्रपति के नाम से संविधान के अनुच्छेद 77 (2) के तहत राष्ट्रपति की ओर से आदेशों को प्रमाणित करने के लिए सक्षम अधिकारी द्वारा हस्ताक्षर किए जाने चाहिए। ये प्रावधान संवैधानिक और वैधानिक प्रकृति के हैं। किसी भी स्थानीय व्यवस्था या प्रशासनिक सुविधा द्वारा इन्हें शिथिल नहीं किया जा सकता है। भारत सरकार (एओबी) नियम, 1961 और (टीओबी) नियम, 1961 के दायरे में ही कार्य करते हैं। गृह मंत्रालय से आरटीआई अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, सीआरपीएफ अधिकारियों/अधिकारियों को सीसीएस (सीसीए) नियम, 1965 के तहत ग्रुप 'ए' अधिकारियों से संबंधित किसी भी आदेश, जिसमें आरोप पत्र/आईओ एवं पीओ की नियुक्ति और दंड आदेश शामिल हैं, पर हस्ताक्षर करने या उन्हें प्रमाणित करने का कोई अधिकार कभी नहीं दिया गया है। 

कमांडेंट ने पूछा, सटीक कानूनी/वैधानिक प्राधिकरण   

कमांडेंट एसके द्विवेदी ने पूछा है कि डीआईजी सीआर एवं विजिलेंस को ग्रुप 'ए' अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही के संबंध में मंत्री के आदेशों को प्रमाणित करने का न तो अधिकार है और न ही वे इसके लिए अधिकृत हैं। ऐसे में वह सटीक कानूनी/वैधानिक प्राधिकरण बताया जाए, जिसके तहत ऐसा प्रमाणीकरण किया जा रहा है।

प्रमाणीकरण (आदेश और अन्य दस्तावेज) नियम, 2002 के अनुच्छेद 2 के अनुसार, राष्ट्रपति के नाम से जारी किए गए सभी आदेशों को सचिव आदि द्वारा प्रमाणित किया जाना आवश्यक है। 

डीआईजी साइन नहीं कर सकता 

जिन लोगों के लिए अनुशासनात्मक अधिकारी, राष्ट्रपति हैं। उनकी  चार्जशीट पर मंत्री की मंजूरी के बाद कोई न कोई सचिव ही साइन कर सकता। ऐसे साइन डीआईजी नहीं कर सकता। ये एक कानून है। इसमें मनमर्जी नहीं कर सकते। एमएचए से आरटीआई के जरिए मिली सूचना बताती है कि किसी भी सीआरपीएफ अफसर के खिलाफ चार्जशीट साइन करने में किसी को अधिकृत नहीं किया गया है। डीआईजी सीआर विजिलेंस के पास मंत्री के आर्डर को प्रमाणिक करने का अधिकार नहीं है। इस मामले में किस नियम से डीआईजी, मेमोरेंडम दे रहे हैं। कमांडेंट ने पूछा है कि वे यह सब किस अधिकार से दे रहे हैं। डीआईजी सीआर/विजिलेंस ही जांच अधिकारी की नियुक्ति का भी आदेश देता है। नियम कहता है कि किसी मामले में जो सजा मिलती है, उस पर साइन कर बताने का अधिकार भी डीआईजी के पास नहीं है। दूसरी तरफ ऐसे सभी आदेश, डीआईजी सीआर/विजिलेंस की कलम से ही जारी होते हैं।  



 

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