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High Court: अट्टापडी मधु लिंचिंग केस में बड़ा फैसला, केरल हाई कोर्ट ने 12 दोषियों की सजा बढ़ाकर उम्रकैद की

आईएएनएस, तिरुवनंतपुरम Published by: अमन तिवारी Updated Mon, 25 May 2026 07:12 PM IST
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सार

केरल हाई कोर्ट ने 2018 के मधु लिंचिंग मामले में 12 दोषियों की सजा बढ़ाकर उम्रकैद कर दी है। कोर्ट ने पीड़ित की मां को 30 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। डिजिटल सबूतों के आधार पर दोषियों को यह सजा मिली है।

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केरल हाईकोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार

केरल हाई कोर्ट ने सोमवार को अट्टापडी मधु लिंचिंग मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने इस मामले के 12 दोषियों की सजा बढ़ाकर उम्रकैद कर दी है। साल 2018 में हुई इस क्रूर घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। न्यायमूर्ति वी राजा विजयाराघवन और न्यायमूर्ति केवी जयकुमार की पीठ ने मन्नारक्कड़ की विशेष अदालत के पुराने फैसले को बदल दिया। विशेष अदालत ने पहले इन दोषियों को सात साल की जेल की सजा सुनाई थी।


हाई कोर्ट ने मधु की मां मल्ली को 30 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश भी दिया है। इसके अलावा कोर्ट ने आदेश दिया कि अगर निचली अदालत से तय किया गया पुराना मुआवजा अब तक नहीं मिला है, तो उसे तीन महीने के भीतर दिया जाए।
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क्या है मामला?
यह मामला 22 फरवरी 2018 का है। पलक्कड़ के अट्टापडी में रहने वाले 27 साल के आदिवासी युवक मधु पर दुकान से चावल और किराने का सामान चुराने का आरोप लगा था। मधु मानसिक रूप से बीमार था और जंगल की एक गुफा में रहता था। भीड़ ने उसे गुफा से बाहर निकाला, बांधा और लगभग निर्वस्त्र कर सार्वजनिक रूप से बेरहमी से पीटा। इसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया, लेकिन पुलिस स्टेशन ले जाते समय उसकी मौत हो गई।
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किसे मिली सजा?
उम्रकैद की सजा पाने वाले दोषियों में मरक्कर, शम्सुद्दीन, राधाकृष्णन, अबूबकर, सिद्दीकी, उबैद, नजीब, जयजुमोन, सजीव, सतीश, हरीश और बीजू शामिल हैं। इन सभी पर 2-2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। कोर्ट ने सबूतों की कमी के कारण पहले आरोपी हुसैन को बरी कर दिया। वहीं अनीश और अब्दुल करीम को बरी करने के फैसले को बरकरार रखा गया। वहीं एक अन्य मुनीर नाम के आरोपी की सजा तीन महीने से बढ़ाकर एक साल कर दी गई है।

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इस मामले के ट्रायल को भटकाने की काफी कोशिशें हुईं और 103 गवाहों में से 24 गवाह मुकर गए थे। हालांकि, आरोपियों ने खुद जो फोटो और वीडियो बनाकर वायरल किए थे, वे ही उन्हें सजा दिलाने में सबसे बड़े सबूत बने। मधु के परिवार ने धमकियों के बावजूद लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और फैसले का स्वागत किया है। हालांकि, वे पहले आरोपी को बरी किए जाने के खिलाफ अपील करने की योजना बना रहे हैं।
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