तीन तलाक बिल: केंद्र सरकार ने दिखाई फ्लोर प्रबंधन की ताकत, विपक्षी एकता हुई तार-तार
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कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को मुस्लिम महिला (विवाह में अधिकारों की रक्षा) विधेयक को राज्यसभा में पेश कर दिया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष में विधेयक को लेकर तीखी तकरार चली, लेकिन सरकार ने चुटकियां बजाकर तीन तलाक विधेयक को पारित करा लिया।
विधेयक सदन में पेश किए जाने के दौरान भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मौजूद रहे और इसे सदन में पारित कराने का बीड़ा खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उठाया। विधेयक को राज्यसभा में मंजूरी दिलाने के लिए भाजपा ने व्हिप जारी किया है। सत्ता पक्ष ने फ्लोर प्रबंधन में पूरा कौशल झोंक दिया है।
243 सदस्यीय राज्यसभा में 183 सांसदों ने मतदान में हिस्सा लिया। 58 सांसदों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। एआईडीएमके के 11, जद(यू) 6 और टीआरएस के सांसदों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। इस तरह से 58 सांसदों ने मतदान से दूरी बनाकर सरकार की राह आसान कर दी। शरद पवार, प्रफुल्ल पटेल, केटीएस तुलसी सदन में मतदान में भाग नहीं लेने आए। पीडीपी, बीएसपी के सांसदों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया और समाजवादी पार्टी के सांसद भी अनुपस्थित रहे।
बेनी प्रसाद वर्मा घुटने के ऑपरेशन के कारण नहीं आए तो राम जेठमलानी भी स्वास्थ्य कारणों से नहीं आ सके। भाजपा के अरुण जेटली भी स्वास्थ्य कारणों से मतदान से दूर रहे। कांग्रेस के प्रताप सिंह बाजवा भी मतदान में अनुपस्थिति रहे। इस तरह से तीन तलाक विधेयक के पक्ष में 99 मत तो विपक्ष में 84 मत पड़े और विधेयक पारित हो गया।
विपक्षी एकता तार-तार
तीन तलाक विधेयक के राज्यसभा में पारित होने के बाद जहां सत्ता पक्ष का होमवर्क दिखा, वहीं विपक्षी एकता तार-तार दिखी। मतदान से ठीक पहले कांग्रेस के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने पार्टी और राज्यसभा की सदस्यता छोड़ दी तो अन्य दलों ने केवल दिखावे का विरोध किया। कांग्रेस पार्टी, तृणमूल कांग्रेस समेत अन्य दलों ने भी व्हिप जारी किया है। जद(यू) भी विधेयक का विरोध कर रही है। हालांकि जद(यू) ने बिल पर चर्चा शुरू होने के समय सदन से बहिर्गमन कर दिया।
राज्यसभा में एक-एक वोट पर सरकार की नजर
सत्ता पक्ष ने तीन तलाक विधेयक को मंजूरी दिलाने के लिए एक-एक सांसद को गणना में रखा। जनता दल(बीजू), एआईएडीएमके समेत अन्य दलों से सत्ता पक्ष के फ्लोर प्रबंधकों ने चर्चा करके विधेयक पारित कराने का रास्ता साफ किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से फोन पर बात की। प्रधानमंत्री ने दोनों नेताओं से समर्थन मांगा।
जनता दल (बीजू) ने विधेयक का समर्थन किया है। कांग्रेस पार्टी और वामदल में इसको लेकर कोई तारतम्य नहीं दिया। 16वीं लोकसभा में केंद्र सरकार ने इस बिल को पेश किया था। यह लोकसभा से पारित होकर राज्यसभा में आया और तब सरकार को सफलता नहीं मिल पाई थी। 17वीं लोकसभा ने बिल को मंजूरी दे दी है, लेकिन राज्यसभा में अभी इस पर चर्चा हो रही है।
खूब चली तकरार
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विधेयक को पेश करते हुए कहा कि इसे राजनीति के चश्मे से न देखा जाए। यह विधेयक नारी न्याय, नारी सम्मान, नारी गरिमा और नारी उत्थान का मामला है। उन्होंने सदन को आस्वस्त किया कि विधेयक में कानून के दुरुपयोग को रोकने के व्यापक उपाय किए गए हैं। वहीं नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने मुस्लिम मेन डिस्ट्रक्शन बिल करार दिया है। इसमें मुस्लिम पुरुषों को तोड़ने, प्रताड़ित और परेशान करने का तरीका निकाला जा रहा है।
गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यह बिल राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि इस बिल के प्रावधानों के लागू होने पर मुस्लिम पति-पत्नी आपस में मुकदमा लड़ेंगे। दोनों एक दूसरे के खिलाफ वकील करेंगे और सजा खत्म होने तक वे कंगाल हो चुके होंगे। गुलाम नबी आजाद का मानना है कि इससे मुस्लिम समाज का कोई भला नहीं होने वाला। उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस के अमी याज्ञिक का कहना है कि उच्चतम न्यायालय ने पहले ही एक साथ तीन तलाक को असंवैधानिक करार दे दिया है। ऐसे में इस तरह के किसी विधेयक की कोई जरूरत नहीं है।