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Britain: नाइजेल फराज के सामने भारतीय मूल के केतनकुमार, 34 उम्मीदवारों वाला ये उपचुनाव का मुकाबला क्यों खास है?

Thu, 13 Aug 2026 01:04 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Thu, 13 Aug 2026 01:04 AM IST
सार

ब्रिटेन के क्लैक्टन-ऑन-सी उपचुनाव में भारतीय मूल के उद्यमी केतनकुमार पिपलिया समेत 34 उम्मीदवार मैदान में हैं। रिफॉर्म यूके नेता नाइजेल फराज भी चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि लेबर और कंजर्वेटिव पार्टियों ने इसका बहिष्कार किया है। बैलेट पेपर भी बेहद लंबा हो गया है। सवाल है कि इतने उम्मीदवारों और प्रमुख दलों के बहिष्कार के बीच क्या केतनकुमार फराज को मजबूत चुनौती दे पाएंगे?

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Britain Indian-Origin Ketan Kumar Challenges Nigel Farage in a Unique 34-Candidate By-Election
ब्रिटेन का क्लैक्टन उपचुनाव इतना अलग क्यों हो गया है? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

ब्रिटेन के क्लैक्टन-ऑन-सी संसदीय उपचुनाव में भारतीय मूल के उद्यमी और यूके वॉयस पार्टी के संस्थापक केतनकुमार पिपलिया ने नाइजेल फराज के सामने चुनौती पेश की है। इस चुनाव में कुल 34 उम्मीदवार मैदान में हैं। खास बात यह है कि सत्तारूढ़ लेबर पार्टी और विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी ने चुनाव का बहिष्कार किया है। ऐसे में यह मुकाबला ब्रिटेन की सामान्य चुनावी राजनीति से काफी अलग बन गया है।
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क्लैक्टन का यह उपचुनाव इतना अलग क्यों है?

क्लैक्टन-ऑन-सी के इस चुनाव में 34 उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से बैलेट पेपर भी असाधारण रूप से लंबा हो गया है। उम्मीदवारों की सूची में कई ऐसे नाम हैं, जो आम चुनावी राजनीति में बेहद अलग नजर आते हैं। ऑफिशियल मॉन्स्टर रेविंग लूनी पार्टी के काउंट बिनफेस और निक द इनक्रेडिबल फ्लाइंग ब्रिक जैसे नाम भी उम्मीदवारों की सूची में शामिल हैं। इस वजह से चुनाव ब्रिटेन में खास चर्चा का विषय बन गया है।
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भारतीय मूल के केतनकुमार क्या चाहते हैं?

फार्मास्यूटिकल क्षेत्र से जुड़े उद्यमी केतनकुमार पिपलिया यूके वॉयस पार्टी के संस्थापक हैं। उनका कहना है कि क्लैक्टन के लोगों को ऐसा सांसद चाहिए जो स्थानीय हितों को सबसे पहले रखे। वह नियंत्रित सीमाओं, निष्पक्ष आव्रजन व्यवस्था और यूरोप के साथ सहयोग बढ़ाने की वकालत करते हैं। उनकी दावेदारी ऐसे समय में सामने आई है, जब ब्रिटेन में आव्रजन और सीमा नियंत्रण बड़े राजनीतिक मुद्दे बने हुए हैं।
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नाइजेल फराज के सामने कैसी चुनौती है?

इस सीट से दक्षिणपंथी रिफॉर्म यूके पार्टी के नेता नाइजेल फराज फिर से चुनाव लड़ रहे हैं। फराज ने बीते महीने सांसद पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद यह उपचुनाव कराया जा रहा है। वहीं लेबर और कंजर्वेटिव पार्टियों ने चुनाव का बहिष्कार किया है। दोनों दलों ने इसे फराज का कराया हुआ फर्जी उपचुनाव बताया है। ऐसे में फराज को एक तरफ 33 उम्मीदवारों का सामना करना है और दूसरी तरफ दो प्रमुख दलों के बहिष्कार ने मुकाबले को और असामान्य बना दिया है।

फराज पर लगे वित्तीय आरोपों का क्या मामला है?

फराज पर क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े एक अरबपति से 5 मिलियन डॉलर के तोहफे और एक दोषी धोखेबाज से अघोषित चंदे समेत वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। हालांकि, फराज ने किसी भी गलत काम से इन्कार किया है। इन आरोपों की जांच संसदीय मानक निगरानी संस्था कर रही है। ऐसे में क्लैक्टन का चुनाव केवल सीट जीतने की लड़ाई नहीं है, बल्कि फराज के राजनीतिक प्रभाव और भारतीय मूल के केतनकुमार जैसे उम्मीदवारों के लिए अपनी जगह बनाने की परीक्षा भी है।
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