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मेघालय में HIV अलर्ट: हर दिन छह से ज्यादा केस; तीन महीने में मिले 574 संक्रमित, 52% मामले असुरक्षित संबंध से

Wed, 12 Aug 2026 10:59 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, शिलांग
पीटीआई, शिलांग Published by: प्रशांत तिवारी Updated Wed, 12 Aug 2026 10:59 PM IST
सार

मेघालय में पिछले 90 दिनों में एचआईवी के 574 नए मामले सामने आने के बाद राज्य में चिंता बढ़ गई है। यानी औसतन हर दिन छह से अधिक नए एचआईवी संक्रमित सामने आए हैं।  
 

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Over six cases daily in Meghalaya 574 infections detected three months 52% of cases linked unprotected contact
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मेघालय में 2026 की पहली तिमाही में एचआईवी के 574 नए मामले सामने आए हैं। मेघालय एड्स नियंत्रण सोसाइटी के अनुसार करीब 52 प्रतिशत संक्रमण अनौपचारिक यौन संबंधों से जुड़े हैं। बढ़ते मामलों के बीच राज्य सरकार और मेघालय एड्स नियंत्रण सोसाइटी ने जागरूकता, एचआईवी जांच, समय पर उपचार और भेदभाव खत्म करने पर जोर देते हुए व्यापक सूचना, शिक्षा एवं संचार अभियान शुरू किया है, जिसके तहत 126 गांवों, 3,000 स्कूलों और 85 महाविद्यालयों तक पहुंचने की योजना है।

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पहली तिमाही में 574 नए मामले

मेघालय एड्स नियंत्रण सोसाइटी के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 की पहली तिमाही में राज्य में एचआईवी संक्रमण के 574 नए मामले दर्ज किए गए। इनमें 16 गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। यह आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है, जब मेघालय एड्स नियंत्रण सोसाइटी ने बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर लेडी कीन कॉलेज में राज्यव्यापी ‘गहन सूचना, शिक्षा एवं संचार अभियान 3.0’ की शुरुआत की।
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52 प्रतिशत मामले असुरक्षित यौन संबंधों से जुड़े
मेघालय एड्स नियंत्रण सोसाइटी के अनुसार, राज्य में एचआईवी संक्रमण के करीब 52 प्रतिशत मामले असुरक्षित यौन संपर्क यानी आकस्मिक यौन संबंधों से जुड़े हैं। वहीं, करीब 32 प्रतिशत संक्रमण नियमित साथी या जीवनसाथी के साथ यौन संपर्क से जुड़े पाए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इंजेक्शन के जरिए नशीली दवाएं लेने के दौरान संक्रमित सुई या सिरिंज के इस्तेमाल से करीब 9 प्रतिशत मामले सामने आते हैं। वहीं, व्यावसायिक यौन संबंधों से लगभग 4 प्रतिशत और मां से बच्चे में संक्रमण के कारण करीब 2.5 प्रतिशत मामले सामने आए हैं।
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असुरक्षित संबंध और संक्रमित सुई पर जोर
नए अभियान में एचआईवी संक्रमण के चार प्रमुख रास्तों को लेकर लोगों को जागरूक किया जाएगा। इनमें बिना सुरक्षा के यौन संबंध, संक्रमित सुई और सिरिंज का इस्तेमाल, मां से बच्चे में संक्रमण का प्रसार और संक्रमित रक्त चढ़ाना शामिल है। अभियान का उद्देश्य लोगों तक सही और वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाना है, ताकि एचआईवी को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर किया जा सके और लोग समय रहते जांच तथा उपचार की सुविधा हासिल कर सकें।

स्वास्थ्य मंत्री ने भेदभाव खत्म करने की अपील की
अभियान का शुभारंभ करने वाले स्वास्थ्य मंत्री वाइलाडमिकी श्यल्ला ने लोगों से एचआईवी के साथ जी रहे लोगों के प्रति भेदभाव न करने की अपील की। उन्होंने एचआईवी जांच, समय पर इलाज और संक्रमित लोगों की उचित देखभाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया। श्यल्ला ने कहा कि एचआईवी को खत्म करना सिर्फ मेघालय एड्स नियंत्रण सोसाइटी की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग, अन्य सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों, स्थानीय समुदायों, नागरिक समाज संगठनों, स्वास्थ्य कर्मियों, माता-पिता, शिक्षकों और युवाओं के सामूहिक प्रयास की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि मेघालय में एचआईवी से निपटने के उपाय सुलभ, समावेशी, सबूत-आधारित और लोगों पर केंद्रित हों।

दो महीने के अभियान को जनआंदोलन बनाने की अपील
स्वास्थ्य मंत्री ने संबंधित विभागों और संगठनों से अपील की कि वे इस अभियान को इसकी निर्धारित दो महीने की अवधि तक सीमित न रखें, बल्कि इसे आगे भी जारी रखते हुए राज्यव्यापी आंदोलन का रूप दें। उन्होंने कहा कि इस पहल का फोकस जागरूकता, संक्रमण की रोकथाम, एचआईवी जांच, उपचार और एचआईवी के साथ जी रहे लोगों के सम्मान पर होना चाहिए।

गांव-गांव तक पहुंचेगा संदेश
श्यल्ला ने कहा कि एचआईवी से जुड़ी जागरूकता का संदेश गांवों, स्कूलों, महाविद्यालयों, घरों, अस्पतालों और समुदायों तक पहुंचना चाहिए। इसका उद्देश्य ऐसा माहौल तैयार करना है, जिसमें लोग अपना एचआईवी दर्जा जानने से डरें नहीं और केवल एचआईवी संक्रमित होने की वजह से किसी व्यक्ति को सम्मान से वंचित न होना पड़े। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने एचआईवी और एड्स के खिलाफ प्रयासों को और मजबूत करने के लिए पांच साल की योजना को मंजूरी दी है।

126 गांव और 3,000 स्कूल अभियान के दायरे में
मेघालय एड्स नियंत्रण सोसाइटी के परियोजना निदेशक डॉ. के.एल. इवबोर ने कहा कि एचआईवी के खिलाफ लड़ाई में गलत जानकारी और भेदभाव अब भी बड़ी चुनौतियां हैं। उन्होंने एचआईवी संक्रमण की जल्द पहचान और समय पर इलाज के महत्व पर जोर दिया। मेघालय एड्स नियंत्रण सोसाइटी के इस अभियान के तहत राज्यभर के 126 गांवों को कवर करने की योजना है। इसके अलावा 3,000 स्कूलों और 85 महाविद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। घर-घर जाकर लोगों से बातचीत के करीब 15,000 कार्यक्रम भी किए जाने हैं।

जन प्रस्तुतियों से लेकर स्वास्थ्य शिविर तक, कई तरीकों से जागरूकता
अभियान को प्रभावी और युवाओं से जोड़ने के लिए सार्वजनिक प्रस्तुतियां, सामूहिक नृत्य प्रस्तुतियां और विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाएगा। एचआईवी और उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया संकेतक का भी इस्तेमाल किया जाएगा।


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51 प्रतिशत आबादी 20 साल से कम उम्र की
श्यल्ला ने एचआईवी की रोकथाम और जागरूकता अभियान में युवाओं की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि मेघालय की करीब 51 प्रतिशत आबादी 20 साल से कम उम्र की है। ऐसे में युवाओं की सक्रिय भागीदारी स्वास्थ्य जागरूकता और संक्रमण की रोकथाम के प्रयासों को मजबूत करने में अहम साबित हो सकती है। उन्होंने राज्यभर के महाविद्यालयों में छात्रों और लाल फीता क्लबों से एचआईवी-एड्स जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने और अपने साथियों तथा समुदायों के बीच सही जानकारी पहुंचाने का आह्वान किया।

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