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Naxal: वामपंथी उग्रवाद से मुक्त इलाकों में अहम बदलाव, अब 'जन सुविधा केंद्रों' में बदलेंगे सुरक्षा बलों के कैंप
Wed, 29 Jul 2026 06:34 PM IST
Pavan
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Wed, 29 Jul 2026 06:34 PM IST
सार
वामपंथी उग्रवाद (एलडब्लूई) खत्म होने के बाद, वहां मौजूद सुरक्षा बलों के कैंपों में से एक-तिहाई को 'अब जन सुविधा केंद्रों' में बदला जा रहा है। ये केंद्र स्थानीय समुदायों को कई तरह की सेवाएं देंगे, जैसे आजीविका को बढ़ावा देना, स्किल डेवलपमेंट, सरकारी योजनाओं तक पहुंच, डिजिटल सेवाएं, हेल्थकेयर और सांस्कृतिक व खेल सुविधाएं आदि। पहला जन सुविधा केंद्र छत्तीसगढ़ के जगदलपुर के नेतानार में 'शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा केंद्र' के तौर पर स्थापित किया गया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
वामपंथी उग्रवाद (एलडब्लूई) खत्म होने के बाद, वहां मौजूद सुरक्षा बलों के कैंपों में से एक-तिहाई को 'अब जन सुविधा केंद्रों' में बदला जा रहा है। ये केंद्र स्थानीय समुदायों को कई तरह की सेवाएं देंगे, जैसे आजीविका को बढ़ावा देना, स्किल डेवलपमेंट, सरकारी योजनाओं तक पहुंच, डिजिटल सेवाएं, हेल्थकेयर और सांस्कृतिक व खेल सुविधाएं आदि। पहला जन सुविधा केंद्र छत्तीसगढ़ के जगदलपुर के नेतानार में 'शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा केंद्र' के तौर पर स्थापित किया गया है। वर्तमान में, किसी भी जिले को वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित श्रेणी में नहीं रखा गया है।
37 जिलों को 'लिगेसी एंड थ्रस्ट' की श्रेणी में
नक्सल-प्रभावित ज़िलों की संख्या अप्रैल 2018 में 126 से घटकर 90, जुलाई 2021 में 70, अप्रैल 2024 में 38, दिसंबर 2025 में 08 और मार्च/अप्रैल 2026 में 'शून्य' हो गई। अभी 37 जिलों को 'लिगेसी एंड थ्रस्ट' जिलों की श्रेणी में रखा गया है। ये जिले अब एलडब्लूई प्रभावित नहीं हैं, लेकिन स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए सुरक्षा और विकास कार्यों में कुछ और समय तक सहयोग की आवश्यकता है। एक जिले को 'चिंताजनक जिले' की श्रेणी में रखा गया है, जहां एलडब्लूई की हिंसक गतिविधियों को पूरी तरह से नियंत्रित कर लिया गया है। उनके संगठनात्मक ढांचे को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। हालांकि ये जिले अब एलडब्लूई से मुक्त हैं, फिर भी सुरक्षा निगरानी और विकास कार्यों को कुछ और समय तक जारी रखना होगा, ताकि इनके दोबारा उभरने की किसी भी संभावना को रोका जा सके।
'सुरक्षा संबंधी खर्च' के तहत 3805 करोड़ रुपये जारी
सुरक्षा के मोर्चे पर, भारत सरकार पहले एलडब्लूई (वामपंथी उग्रवाद) से प्रभावित राज्यों की मदद करती है। इसके लिए वह सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स और इंडिया रिजर्व बटालियन उपलब्ध कराती है। हेलीकॉप्टर से मदद देती है और सुरक्षा कैंपों के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करती है। लोकल बलों को ट्रेनिंग और राज्य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए फंड, हथियार और उपकरण मुहैया कराती है। खुफिया जानकारी साझा करती है और मजबूत पुलिस स्टेशन बनाती है। राज्यों की क्षमता बढ़ाने के लिए, 2014-15 से 'सुरक्षा संबंधी खर्च' योजना के तहत एलडब्लूई प्रभावित राज्यों को 3805.04 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। यह पैसा सुरक्षा बलों के ऑपरेशनल खर्च और ट्रेनिंग की जरूरतों, सरेंडर करने वाले एलडब्लूई कैडर के पुनर्वास, एलडब्लूई हिंसा में मारे गए सुरक्षा बल के जवानों/नागरिकों के परिवारों को मुआवजा देने आदि के लिए दिया गया है।
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हर महीने 10,000 रुपये का वजीफा
भारत सरकार और राज्य सरकारों ने सरेंडर और पुनर्वास की व्यापक नीतियां बनाई हैं। भारत सरकार, 'सुरक्षा संबंधी खर्च' योजना के तहत 'सरेंडर-सह-पुनर्वास' नीति के जरिए भी राज्यों की मदद करती है। भारत सरकार, एसआरई योजना के तहत सरेंडर करने वालों के पुनर्वास पर एलडब्लूई प्रभावित राज्यों द्वारा किए गए खर्च की भरपाई करती है। पुनर्वास पैकेज में, अन्य चीजों के अलावा, ऊंचे पद वाले एलडब्लूई कैडर के लिए 5 लाख रुपये और अन्य एलडब्लूई कैडर के लिए 2.5 लाख रुपये की तुरंत मदद शामिल है। इसके अलावा, योजना के तहत हथियार/गोला-बारूद सरेंडर करने पर प्रोत्साहन भी दिया जाता है। अपनी पसंद के व्यापार/काम में ट्रेनिंग देने और तीन साल तक हर महीने 10,000 रुपये का वजीफा देने का भी प्रावधान है।
663 मजबूत पुलिस स्टेशन बनाए जा चुके हैं
राज्यों द्वारा अपने पुलिस बलों को लैस और आधुनिक बनाने की कोशिशों को 'पुलिस बलों का आधुनिकीकरण' योजना के तहत और मज़बूत किया गया है। इस योजना के तहत, राज्य सरकारों को हथियार, सूचना प्रौद्योगिकी के लिए उपकरण, संचार, ट्रेनिंग, पुलिस स्टेशन बनाने, मोबिलिटी और पुलिस आवास व अन्य पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने आदि के लिए केंद्रीय मदद दी जाती है। इसकी उप-योजना यानी 'विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर योजना' के तहत, एलडब्लूई प्रभावित राज्यों में राज्य के विशेष बलों, विशेष खुफिया शाखाओं, जिला पुलिस को मजबूत करने और मजबूत पुलिस स्टेशन बनाने के लिए 1761 करोड़ रुपये के काम मंजूर किए गए हैं। सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारत सरकार का ध्यान बहुत अहम रहा है। अब तक 663 मजबूत पुलिस स्टेशन बनाए जा चुके हैं।
केंद्रीय एजेंसियों को दिए गए 1303.68 करोड़ रुपये
वामपंथी उग्रवाद मैनेजमेंट के लिए केंद्रीय एजेंसियों को सहायता योजना के तहत, कैंपों के बुनियादी ढांचे और एलडब्लूई विरोधी अभियानों के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने में मदद दी जाती है। 2014-15 से इस योजना के जरिए केंद्रीय एजेंसियों को 1303.68 करोड़ रुपये दिए गए हैं। एलडब्लूई की आर्थिक कमर तोड़ने और सीपीआई (माओवादी) तथा उसके आर्थिक समर्थकों के बीच के गठजोड़ का पर्दाफाश करने पर खास जोर दिया गया है। केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से राज्य पुलिस द्वारा अलग-अलग तरीकों से की गई समन्वित कार्रवाई से अतीत में वामपंथी उग्रवादियों को मिलने वाले फंड और संसाधनों को रोकने में बहुत अच्छे नतीजे मिले हैं।
9,497 मोबाइल टावर लगाए गए हैं
सड़क नेटवर्क के विस्तार के लिए, वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित इलाकों के लिए दो खास योजनाओं-'रोड रिक्वायरमेंट प्लान' और 'रोड कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट फॉर एलडब्लूई अफेक्टेड एरियाज'- के तहत 15,189 किलोमीटर सड़क बनाई गई है। इसके अलावा, भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ राज्य के उन इलाकों में, जो पहले एलडब्लूई से प्रभावित थे, बॉर्डर रोड ऑर्गनाइज़ेशन द्वारा 127.08 किलोमीटर महत्वपूर्ण सड़कें और 06 महत्वपूर्ण पुल बनाने की मंज़ूरी भी दी है। पहले एलडब्लूई से प्रभावित इलाकों में टेलीकॉम कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए 9,497 टावर लगाए गए हैं। स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास) के लिए 47 इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट और 49 स्किल डेवलपमेंट सेंटर खोले गए हैं। आदिवासी इलाकों में अच्छी शिक्षा के लिए 179 एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल शुरू किए गए हैं। वित्तीय समावेशन के लिए, डाक विभाग ने वामपंथी उग्रवाद से मुक्त हुए इलाकों में बैंकिंग सेवाओं वाले 6,025 पोस्ट ऑफिस खोले हैं। साथ ही, इन इलाकों में 1,804 बैंक शाखाएं और 1,321 एटीएम भी खोले गए हैं।
लाभार्थियों को मिले 21,26,268 स्वामित्व दस्तावेज
विकास को और गति देने के लिए, 'स्पेशल सेंट्रल असिस्टेंस' योजना के तहत उन जिलों में पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (सार्वजनिक बुनियादी ढांचे) की अहम कमियों को पूरा करने के लिए फंड दिया जाता है जो पहले एलडब्लूई से प्रभावित थे। 2017 में इस योजना की शुरुआत के बाद से अब तक लगभग 4,289.20 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। स्थानीय समुदायों के अधिकारों और हक को सुनिश्चित करने के लिए, लाभार्थियों को 21,26,268 टाइटल डीड (स्वामित्व दस्तावेज) बांटे गए हैं। इनमें 20,20,268 व्यक्तिगत टाइटल और 1,06,000 सामुदायिक टाइटल शामिल हैं। पहले एलडब्लूई (वामपंथी उग्रवाद) से प्रभावित इलाकों में स्थानीय स्व-शासन को और मजबूत करने के लिए, गृह मंत्रालय पंचायती राज मंत्रालय के साथ मिलकर योजना बना रहा है। ये कदम प्रभावित इलाकों में सामुदायिक अधिकारों को मजबूत करने और भागीदारी वाली शासन व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
सिविक एक्शन प्रोग्राम' के तहत 221.88 करोड़ रुपये
इसके अलावा, 'सिविक एक्शन प्रोग्राम' के तहत, भारत सरकार, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को उनके ऑपरेशन वाले इलाकों में कई तरह की कल्याणकारी गतिविधियां करने के लिए फंड देती है। इन गतिविधियों में मेडिकल कैंप, खेल प्रतियोगिताएं और स्थानीय समुदायों के बीच जरूरी चीजों का वितरण शामिल है। इस स्कीम के तहत 2014 से अब तक 221.88 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इससे सुरक्षा बलों और स्थानीय लोगों के बीच की दूरी कम करने में बहुत मदद मिली है। एलडब्लूई के बाद की स्थिति में, सरकारी कल्याणकारी स्कीमों को पूरी तरह से लागू करने, स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने, सरेंडर करने वाले कैडरों के पुनर्वास में मदद करने, आदिवासी पहचान और संस्कृति को बचाने और दूर-दराज के इलाकों में शासन और सार्वजनिक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
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37 जिलों को 'लिगेसी एंड थ्रस्ट' की श्रेणी में
नक्सल-प्रभावित ज़िलों की संख्या अप्रैल 2018 में 126 से घटकर 90, जुलाई 2021 में 70, अप्रैल 2024 में 38, दिसंबर 2025 में 08 और मार्च/अप्रैल 2026 में 'शून्य' हो गई। अभी 37 जिलों को 'लिगेसी एंड थ्रस्ट' जिलों की श्रेणी में रखा गया है। ये जिले अब एलडब्लूई प्रभावित नहीं हैं, लेकिन स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए सुरक्षा और विकास कार्यों में कुछ और समय तक सहयोग की आवश्यकता है। एक जिले को 'चिंताजनक जिले' की श्रेणी में रखा गया है, जहां एलडब्लूई की हिंसक गतिविधियों को पूरी तरह से नियंत्रित कर लिया गया है। उनके संगठनात्मक ढांचे को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। हालांकि ये जिले अब एलडब्लूई से मुक्त हैं, फिर भी सुरक्षा निगरानी और विकास कार्यों को कुछ और समय तक जारी रखना होगा, ताकि इनके दोबारा उभरने की किसी भी संभावना को रोका जा सके।
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'सुरक्षा संबंधी खर्च' के तहत 3805 करोड़ रुपये जारी
सुरक्षा के मोर्चे पर, भारत सरकार पहले एलडब्लूई (वामपंथी उग्रवाद) से प्रभावित राज्यों की मदद करती है। इसके लिए वह सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स और इंडिया रिजर्व बटालियन उपलब्ध कराती है। हेलीकॉप्टर से मदद देती है और सुरक्षा कैंपों के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करती है। लोकल बलों को ट्रेनिंग और राज्य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए फंड, हथियार और उपकरण मुहैया कराती है। खुफिया जानकारी साझा करती है और मजबूत पुलिस स्टेशन बनाती है। राज्यों की क्षमता बढ़ाने के लिए, 2014-15 से 'सुरक्षा संबंधी खर्च' योजना के तहत एलडब्लूई प्रभावित राज्यों को 3805.04 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। यह पैसा सुरक्षा बलों के ऑपरेशनल खर्च और ट्रेनिंग की जरूरतों, सरेंडर करने वाले एलडब्लूई कैडर के पुनर्वास, एलडब्लूई हिंसा में मारे गए सुरक्षा बल के जवानों/नागरिकों के परिवारों को मुआवजा देने आदि के लिए दिया गया है।
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हर महीने 10,000 रुपये का वजीफा
भारत सरकार और राज्य सरकारों ने सरेंडर और पुनर्वास की व्यापक नीतियां बनाई हैं। भारत सरकार, 'सुरक्षा संबंधी खर्च' योजना के तहत 'सरेंडर-सह-पुनर्वास' नीति के जरिए भी राज्यों की मदद करती है। भारत सरकार, एसआरई योजना के तहत सरेंडर करने वालों के पुनर्वास पर एलडब्लूई प्रभावित राज्यों द्वारा किए गए खर्च की भरपाई करती है। पुनर्वास पैकेज में, अन्य चीजों के अलावा, ऊंचे पद वाले एलडब्लूई कैडर के लिए 5 लाख रुपये और अन्य एलडब्लूई कैडर के लिए 2.5 लाख रुपये की तुरंत मदद शामिल है। इसके अलावा, योजना के तहत हथियार/गोला-बारूद सरेंडर करने पर प्रोत्साहन भी दिया जाता है। अपनी पसंद के व्यापार/काम में ट्रेनिंग देने और तीन साल तक हर महीने 10,000 रुपये का वजीफा देने का भी प्रावधान है।
663 मजबूत पुलिस स्टेशन बनाए जा चुके हैं
राज्यों द्वारा अपने पुलिस बलों को लैस और आधुनिक बनाने की कोशिशों को 'पुलिस बलों का आधुनिकीकरण' योजना के तहत और मज़बूत किया गया है। इस योजना के तहत, राज्य सरकारों को हथियार, सूचना प्रौद्योगिकी के लिए उपकरण, संचार, ट्रेनिंग, पुलिस स्टेशन बनाने, मोबिलिटी और पुलिस आवास व अन्य पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने आदि के लिए केंद्रीय मदद दी जाती है। इसकी उप-योजना यानी 'विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर योजना' के तहत, एलडब्लूई प्रभावित राज्यों में राज्य के विशेष बलों, विशेष खुफिया शाखाओं, जिला पुलिस को मजबूत करने और मजबूत पुलिस स्टेशन बनाने के लिए 1761 करोड़ रुपये के काम मंजूर किए गए हैं। सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारत सरकार का ध्यान बहुत अहम रहा है। अब तक 663 मजबूत पुलिस स्टेशन बनाए जा चुके हैं।
केंद्रीय एजेंसियों को दिए गए 1303.68 करोड़ रुपये
वामपंथी उग्रवाद मैनेजमेंट के लिए केंद्रीय एजेंसियों को सहायता योजना के तहत, कैंपों के बुनियादी ढांचे और एलडब्लूई विरोधी अभियानों के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने में मदद दी जाती है। 2014-15 से इस योजना के जरिए केंद्रीय एजेंसियों को 1303.68 करोड़ रुपये दिए गए हैं। एलडब्लूई की आर्थिक कमर तोड़ने और सीपीआई (माओवादी) तथा उसके आर्थिक समर्थकों के बीच के गठजोड़ का पर्दाफाश करने पर खास जोर दिया गया है। केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से राज्य पुलिस द्वारा अलग-अलग तरीकों से की गई समन्वित कार्रवाई से अतीत में वामपंथी उग्रवादियों को मिलने वाले फंड और संसाधनों को रोकने में बहुत अच्छे नतीजे मिले हैं।
9,497 मोबाइल टावर लगाए गए हैं
सड़क नेटवर्क के विस्तार के लिए, वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित इलाकों के लिए दो खास योजनाओं-'रोड रिक्वायरमेंट प्लान' और 'रोड कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट फॉर एलडब्लूई अफेक्टेड एरियाज'- के तहत 15,189 किलोमीटर सड़क बनाई गई है। इसके अलावा, भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ राज्य के उन इलाकों में, जो पहले एलडब्लूई से प्रभावित थे, बॉर्डर रोड ऑर्गनाइज़ेशन द्वारा 127.08 किलोमीटर महत्वपूर्ण सड़कें और 06 महत्वपूर्ण पुल बनाने की मंज़ूरी भी दी है। पहले एलडब्लूई से प्रभावित इलाकों में टेलीकॉम कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए 9,497 टावर लगाए गए हैं। स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास) के लिए 47 इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट और 49 स्किल डेवलपमेंट सेंटर खोले गए हैं। आदिवासी इलाकों में अच्छी शिक्षा के लिए 179 एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल शुरू किए गए हैं। वित्तीय समावेशन के लिए, डाक विभाग ने वामपंथी उग्रवाद से मुक्त हुए इलाकों में बैंकिंग सेवाओं वाले 6,025 पोस्ट ऑफिस खोले हैं। साथ ही, इन इलाकों में 1,804 बैंक शाखाएं और 1,321 एटीएम भी खोले गए हैं।
लाभार्थियों को मिले 21,26,268 स्वामित्व दस्तावेज
विकास को और गति देने के लिए, 'स्पेशल सेंट्रल असिस्टेंस' योजना के तहत उन जिलों में पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (सार्वजनिक बुनियादी ढांचे) की अहम कमियों को पूरा करने के लिए फंड दिया जाता है जो पहले एलडब्लूई से प्रभावित थे। 2017 में इस योजना की शुरुआत के बाद से अब तक लगभग 4,289.20 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। स्थानीय समुदायों के अधिकारों और हक को सुनिश्चित करने के लिए, लाभार्थियों को 21,26,268 टाइटल डीड (स्वामित्व दस्तावेज) बांटे गए हैं। इनमें 20,20,268 व्यक्तिगत टाइटल और 1,06,000 सामुदायिक टाइटल शामिल हैं। पहले एलडब्लूई (वामपंथी उग्रवाद) से प्रभावित इलाकों में स्थानीय स्व-शासन को और मजबूत करने के लिए, गृह मंत्रालय पंचायती राज मंत्रालय के साथ मिलकर योजना बना रहा है। ये कदम प्रभावित इलाकों में सामुदायिक अधिकारों को मजबूत करने और भागीदारी वाली शासन व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
सिविक एक्शन प्रोग्राम' के तहत 221.88 करोड़ रुपये
इसके अलावा, 'सिविक एक्शन प्रोग्राम' के तहत, भारत सरकार, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को उनके ऑपरेशन वाले इलाकों में कई तरह की कल्याणकारी गतिविधियां करने के लिए फंड देती है। इन गतिविधियों में मेडिकल कैंप, खेल प्रतियोगिताएं और स्थानीय समुदायों के बीच जरूरी चीजों का वितरण शामिल है। इस स्कीम के तहत 2014 से अब तक 221.88 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इससे सुरक्षा बलों और स्थानीय लोगों के बीच की दूरी कम करने में बहुत मदद मिली है। एलडब्लूई के बाद की स्थिति में, सरकारी कल्याणकारी स्कीमों को पूरी तरह से लागू करने, स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने, सरेंडर करने वाले कैडरों के पुनर्वास में मदद करने, आदिवासी पहचान और संस्कृति को बचाने और दूर-दराज के इलाकों में शासन और सार्वजनिक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।