Supreme Court: 'कूनो में चीतों की मौत परेशान करने वाली, लेकिन चिंताजनक नहीं'; सरकार-NTCA ने दिया जवाब
पर्यावरण मंत्रालय और एनटीसीए की ओर से दायर संयुक्त हलफनामे में चीतों की मौत का कारण प्राकृतिक बताया गया है। इसमें कहा गया है कि किसी भी चीते की मौत अप्राकृतिक कारणों जैसे शिकार, जहर, दुर्घटना, बिजली के झटके आदि से नहीं हुई है। इसमें कहा गया है कि देश के पारिस्थितिकी तंत्र के चलते व्यस्क चीतों की जीवित रहने की दर बहुत कम 50 प्रतिशत है।
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कूनो में चीतों की मौत को लेकर पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया है। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने शीर्ष अदालत में बताया कि कूनो राष्ट्रीय अभयारण्य (केएनपी) में पांच वयस्क चीतों और तीन शावकों की मौत परेशान करने वाली है, लेकिन अनावश्यक रूप से चिंताजनक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा है कि हालांकि एहतियात बरतते हुए चीतों की चिकित्सकीय जांच की जा रही है।
प्रोजेक्ट चीता के तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से कुल 20 चीतों को मध्य प्रदेश के केएनपी लाया गया था। बाद में नामीबियाई चीता ज्वाला से चार शावकों का जन्म दिया था। इस प्रकार कुल 24 चोतों में से तीन शावकों समेत आठ की मौत हो चुकी है। मौत का कारण चीतों में रेडियो कॉलर के कारण फैला संक्रमण बता गया था।
पर्यावरण मंत्रालय और एनटीसीए की ओर से दायर संयुक्त हलफनामे में चीतों की मौत का कारण प्राकृतिक बताया गया है। इसमें कहा गया है कि किसी भी चीते की मौत अप्राकृतिक कारणों जैसे शिकार, जहर, दुर्घटना, बिजली के झटके आदि से नहीं हुई है। इसमें कहा गया है कि देश के पारिस्थितिकी तंत्र के चलते व्यस्क चीतों की जीवित रहने की दर बहुत कम 50 प्रतिशत है।
सरकार ने मध्य प्रदेश, राजस्थान में वैकल्पिक स्थलों की पहचान की
पर्यावरण मंत्रालय और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान के अलावा मध्य प्रदेश और राजस्थान में चीता के लिए वैकल्पिक एवं संभावित स्थलों की पहचान की है। इनमें मध्य प्रदेश में गांधी सागर और नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य, राजस्थान में शाहगढ़ बुलगे, भैंसरोड़गढ़ और मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व शामिल हैं। हालांकि, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व वर्तमान में चीतों को रखने के लिए उपयुक्त नहीं है।
इससे पहले पिछली सुनवाई के दौरान, जस्टिस बीआर गवई, जेबी पारदीवाला और प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने पूछा कि सरकार ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न क्यों बना लिया है। उन्हें एक जगह रखने के बजाय आप उनके लिए एक से ज्यादा आवास क्यों विकसित नहीं करते, फिर भले ही कोई भी राज्य या किसी भी सरकार हो। एक साल के भीतर 40% मौतें हो गईं और इससे अच्छी तस्वीर नहीं बन रही है।
अब 16 चीते शेष
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से दो बैच में 20 चीतों को लाकर बसाया गया है। सितंबर में नामीबिया से आठ चीते लाए गए थे और फरवरी 2023 में 12 चीते दक्षिण अफ्रीका से। भारत में 1952 में चीते विलुप्त हो गए थे और उसके सात दशक बाद यह भारत में बसाने की पहल के तौर पर प्रोजेक्ट चीता ने आकार लिया है। जिन आठ चीतों की मौत हुई हैं, उनमें तीन वयस्क चीते हैं जिन्हें खुले जंगल में छोड़ा गया था। दो चीतों की मौत बाड़े में ही हुई है। वहीं कूनो में चार शावकों का जन्म हुआ था, जिनमें से तीन की मौत हो चुकी है। अब कूनो में 16 चीता हैं, जिनमें एक शावक भी शामिल है।
ईडी को हिरासत में आरोपी से पूछताछ करने का अधिकार नहीं
तमिलनाडु के मंत्री वी. सेंथिल बालाजी और उनकी पत्नी मेगला ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को किसी आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ करने का अधिकार नहीं है।
राज्य के परिवहन विभाग में रिश्वत लेकर नौकरी देने के मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने बालाजी को 14 जून को गिरफ्तार किया था। बालाजी की पत्नी ने ईडी की गिरफ्तारी को बहाल रखने के मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। ईडी ने भी बाजाली की न्यायिक हिरासत बरकरार रखने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील की है।
जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस एमएन सुंद्रेश की पीठ के समक्ष बालाजी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी ने कहा कि गिरफ्तारी की तिथि से 15 दिन की अवधि खत्म होने के बाद जांच एजेंसी पूछताछ के लिए आरोपी की हिरासत नहीं मांग सकती है क्योंकि कानून में इसका प्रावधान नहीं है। बुधवार को भी सुनवाई होगी, जब ईडी की तरफ से सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता अपनी दलीलें रखेंगे।
दुष्कर्म मामले में अंडमान के पूर्व मुख्य सचिव की जमानत को चुनौती पर फैसला सुरक्षित
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पूर्व मुख्य सचिव जितेंद्र नारायण को दी गई जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को शीर्ष कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। उनके खिलाफ, एक 21 वर्षीय महिला ने दुष्कर्म का आरोप लगाया था।
इस साल की शुरुआत में कलकत्ता उच्च न्यायालय की पोर्ट ब्लेयर सर्किट बेंच वे उन्हें जमानत दे दी थी। दुष्कर्म पीड़िता का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता पथिक चंद्र दास ने वह जमानत आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। इसके खिलाफ राज्य और पीड़िता की अपील पर सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद शीर्ष कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की खंडपीठ ने आदेश सुरक्षित रख लिया।
बता दें कि महिला ने आरोप लगाया था कि उसे सरकारी नौकरी का वादा करके मुख्य सचिव के आवास पर बुलाया गया था। वहां नारायण सहित कई लोगों ने उसके साथ बलात्कार किया था। एसआईटी ने इस आरोप की जांच भी की थी।
नारायण को पिछले साल 1 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज होने के बाद 10 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था जब वह दिल्ली वित्तीय निगम के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक के रूप में तैनात थे। सरकार ने उन्हें 17 अक्टूबर को निलंबित कर दिया था। एसआईटी ने इस मामले में 3 फरवरी को 935 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी।
राजस्थान में नीलामी से होगा खदानों का आवंटन
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में करीब 50,000 खदानों का आवंटन नीलामी के जरिए किए जाने की राह आसान कर दी। जस्टिस एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें खदानों का आवंटन नीलामी के जरिए करने की नीति को नकार दिया गया था। राजस्थान सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ शीर्ष कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
अनुच्छेद 370 से जुड़ी याचिकाओं पर कल से सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दो अगस्त से सुनवाई करेगा। प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ बुधवार से रोजाना सुनवाई करेगी। पीठ में न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत भी शामिल हैं। पीठ ने 11 जुलाई को विभिन्न पक्षों द्वारा लिखित दलीलें और मामले की विवरणिका (कन्वीनिएंस कम्पाइलेशन) दाखिल करने के लिए 27 जुलाई की समय सीमा तय की थी।
सजा में छूट मनमानीपूर्ण और अनुचित नहीं: आनंद मोहन
बिहार के गोपालगंज जिले जिलाधिकारी जी कृष्णैया की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पाए पूर्व सांसद आनंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उन्हें मिली सजा में छूट मनमानीपूर्ण, गलत सूचना पर आधारित और अनुचित नहीं है। दिवंगत अधिकारी की पत्नी उमा कृष्णैया की याचिका के जवाब में मोहन ने यह बात कही। उमा कृष्णैया ने आनंदमोहन को सजा में छूट देने के बिहार सरकार सरकार को फैसले को चुनौती दी है।
आठ मई को शीर्ष कोर्ट ने दिवंगत अधिकारी की पत्नी की याचिका पर आनंद मोहन और बिहार सरकार से जवाब मांगा था। आनंद मोहन को बिहार जेल नियमावली में संशोधन के बाद 27 अप्रैल को रिहा कर दिया गया था। याचिकाकर्ता ने कहा कि गैंगस्टर से नेता बने मोहन को दी गई उम्रकैद का मतलब जीवन भर कैद है। उसे महज यांत्रिक रूप से 14 साल नहीं समझा जा सकता है।