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CJI बोले- मेरी बहन सुनवाई से अलग होंगी; जस्टिस वी. मोहना ने क्यों छोड़ा MPs-MLAs के आपराधिक मामलों का केस?
Tue, 18 Aug 2026 08:08 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Tue, 18 Aug 2026 08:08 PM IST
सार
सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे से जुड़ी जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई नहीं हो सकी। न्यायमूर्ति वी. मोहना ने मामले में पहले वकील के तौर पर पेश होने के कारण खुद को पीठ से अलग कर लिया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने मामले को दूसरी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने की बात कही।
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जस्टिस वी. मोहना ने क्यों किया खुद को सुनवाई से अलग?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति वी. मोहना ने मंगलवार को खुद को सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की जल्द सुनवाई की मांग वाली जनहित याचिका की सुनवाई से अलग कर लिया। 2016 में दायर इस जनहित याचिका में देशभर में सांसदों और विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों का जल्द निपटारा सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ वकील अश्विनी उपाध्याय की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के शुरू होते ही कहा कि न्यायमूर्ति मोहना इस मामले में पहले वकील के तौर पर पेश हो चुकी हैं। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, "मेरी बहन इस मामले से अलग होंगी। हम इसे दूसरी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करेंगे।"
मामले पर जल्द पीठ गठित करने का आग्रह
वरिष्ठ अधिवक्ता और न्यायमित्र विजय हंसारिया ने प्रधान न्यायाधीश से जल्द से जल्द एक पीठ गठित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में तत्काल सुनवाई की जरूरत है। राजनीति के अपराधीकरण पर अपनी हालिया रिपोर्ट में हंसारिया ने कहा है कि लोकसभा के 543 सदस्यों में से 251 और राज्यसभा के 233 सदस्यों में से 75 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।
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सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे की मांग वाली जनहित याचिका में न्यायमित्र नियुक्त किए गए हंसारिया ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ 4,000 से अधिक आपराधिक मामले लंबित हैं।
14 मुख्यमंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले
हलफनामे के मुताबिक, 28 में से 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी घोषित की है। इनमें गंभीर मामले भी शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी के खिलाफ 89 मामले हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ 29 और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के खिलाफ 19 मामले हैं।
हंसारिया ने कहा कि मामलों के जल्द निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की निगरानी के बावजूद 2018 से सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की संख्या लगभग उसी स्तर पर बनी हुई है।
2023 में सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे क्या निर्देश?
9 नवंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों और विधायकों के खिलाफ 5,000 से अधिक आपराधिक मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के उद्देश्य से एक अहम फैसला दिया था। अदालत ने हाईकोर्ट को निर्देश दिया था कि वे मामलों के जल्द निपटारे की निगरानी के लिए विशेष पीठ गठित करें।
सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अदालतों से यह भी कहा था कि ऐसे मामलों में सुनवाई को केवल "दुर्लभ और बाध्यकारी कारणों" से ही स्थगित किया जाए। सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए नामित हाईकोर्ट, जिला अदालतों और विशेष अदालतों को कई निर्देश जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामलों को प्राथमिकता दी जाए।
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प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ वकील अश्विनी उपाध्याय की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के शुरू होते ही कहा कि न्यायमूर्ति मोहना इस मामले में पहले वकील के तौर पर पेश हो चुकी हैं। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, "मेरी बहन इस मामले से अलग होंगी। हम इसे दूसरी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करेंगे।"
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मामले पर जल्द पीठ गठित करने का आग्रह
वरिष्ठ अधिवक्ता और न्यायमित्र विजय हंसारिया ने प्रधान न्यायाधीश से जल्द से जल्द एक पीठ गठित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में तत्काल सुनवाई की जरूरत है। राजनीति के अपराधीकरण पर अपनी हालिया रिपोर्ट में हंसारिया ने कहा है कि लोकसभा के 543 सदस्यों में से 251 और राज्यसभा के 233 सदस्यों में से 75 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।
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सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे की मांग वाली जनहित याचिका में न्यायमित्र नियुक्त किए गए हंसारिया ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ 4,000 से अधिक आपराधिक मामले लंबित हैं।
14 मुख्यमंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले
हलफनामे के मुताबिक, 28 में से 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी घोषित की है। इनमें गंभीर मामले भी शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी के खिलाफ 89 मामले हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ 29 और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के खिलाफ 19 मामले हैं।
हंसारिया ने कहा कि मामलों के जल्द निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की निगरानी के बावजूद 2018 से सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की संख्या लगभग उसी स्तर पर बनी हुई है।
2023 में सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे क्या निर्देश?
9 नवंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों और विधायकों के खिलाफ 5,000 से अधिक आपराधिक मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के उद्देश्य से एक अहम फैसला दिया था। अदालत ने हाईकोर्ट को निर्देश दिया था कि वे मामलों के जल्द निपटारे की निगरानी के लिए विशेष पीठ गठित करें।
सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अदालतों से यह भी कहा था कि ऐसे मामलों में सुनवाई को केवल "दुर्लभ और बाध्यकारी कारणों" से ही स्थगित किया जाए। सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए नामित हाईकोर्ट, जिला अदालतों और विशेष अदालतों को कई निर्देश जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामलों को प्राथमिकता दी जाए।