शिवसेना विवाद: उद्धव गुट ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- पहले बागियों की अयोग्यता पर फैसला, फिर तय हो असली पार्टी
शिवसेना विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में उद्धव ठाकरे गुट ने कहा कि पहले बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की याचिकाओं पर फैसला होना चाहिए और उसके बाद ही यह तय किया जाए कि असली शिवसेना कौन है। क्या कोर्ट इस दलील को स्वीकार करेगा? आइए, विस्तार से जानते हैं...
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विस्तार
महाराष्ट्र के शिवसेना विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई के दौरान उद्धव ठाकरे गुट ने अहम दलील दी। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि चुनाव आयोग को यह तय करने से पहले कि कौन-सा गुट असली शिवसेना है, उन विधायकों के खिलाफ चल रही अयोग्यता की कार्यवाही का नतीजा आने का इंतजार करना चाहिए, जिन्होंने ठाकरे गुट का साथ छोड़ा था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सिब्बल ने ये दलीलें रखीं। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं।
ठाकरे गुट की ओर से 2024 में दायर दो याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। चुनाव आयोग के 17 फरवरी 2023 के फैसले को भी चुनौती दी गई है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान दलीलें पूरी नहीं हो सकीं। अब मामले पर सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी।
क्या विधायक संख्या को ही पार्टी की पहचान मानना सही?
सिब्बल ने कहा कि चुनाव आयोग और महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष ने कानून की व्याख्या करते समय विधायी बहुमत और राजनीतिक दल को एक ही मान लिया। उनके मुताबिक, विधानसभा में किसी गुट के पास ज्यादा विधायक होने का मतलब यह नहीं है कि वही राजनीतिक पार्टी भी है। उन्होंने कहा कि यदि बागी विधायकों को अंततः अयोग्य घोषित कर दिया जाता है तो उनकी संख्या को विधानसभा में गुट की ताकत तय करने में शामिल नहीं किया जा सकता।
उद्धव गुट ने अयोग्यता की कार्यवाही को पहले क्यों बताया?
कपिल सिब्बल ने दलील दी कि राजनीतिक दल की पहचान तय करने की प्रक्रिया अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय के बाद होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो हर बार कोई गुट अयोग्यता की प्रक्रिया को दरकिनार करने के लिए चुनाव आयोग का रुख कर सकता है। सिब्बल के अनुसार, अयोग्यता का सामना कर रहे विधायकों की संख्या पहले 16 थी, जो बाद में 22 और फिर अलग-अलग उल्लंघनों के चलते 39 तक पहुंच गई। इनमें विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव और बाद में विश्वास मत के दौरान पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने के आरोप भी शामिल हैं।
क्या 2024 के विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को भी चुनौती दी गई?
उद्धव ठाकरे गुट ने 10 जनवरी 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर भी सवाल उठाया। उस फैसले में अयोग्यता की याचिकाओं को खारिज करते हुए विधानसभा में बहुमत के आधार पर एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना माना गया था। सिब्बल ने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष ने शिवसेना की 2018 की नेतृत्व संरचना को नजरअंदाज किया और अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर फैसला दिया।
उद्धव ठाकरे के 'पक्षप्रमुख' होने पर क्या कहा?
सिब्बल ने कहा कि 2018 में शिवसेना की नेतृत्व व्यवस्था को लेकर विधानसभा अध्यक्ष का निष्कर्ष कानूनी आधार पर सही नहीं था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उद्धव ठाकरे पार्टी के पक्षप्रमुख थे और उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया था, तो उन्हें पार्टी की इच्छा से अलग कैसे माना जा सकता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सुभाष देसाई मामले के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि विधायी दल में विभाजन को राजनीतिक दल में विभाजन नहीं माना जा सकता।
क्या चुनाव आयोग के फैसले पर भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती है?
उद्धव ठाकरे गुट ने चुनाव आयोग के उस फैसले को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी गई थी और पार्टी का नाम तथा धनुष-बाण चुनाव चिह्न उसके पक्ष में कर दिया गया था।