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वंदे मातरम विवाद: कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बोले- सलाखों के पीछे भेज दो या फांसी पर चढ़ा दो, हम दो ही पद गाएंगे
Tue, 18 Aug 2026 07:48 PM IST
राहुल कुमार
आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 18 Aug 2026 07:48 PM IST
सार
वंदे मातरम गायन को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस प्रकरण में अब कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष का एंट्री हो गई है। उन्होंने कहा है कि वह सिर्फ वंदे मातरम के दो पद ही गाएंगे।
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कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
वंदे मातरम को लेकर चल रहे विवाद के बीच कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने मंगलवार को इस मुद्दे पर अपनी पार्टी का बचाव किया। उनका कहना कि अगर केंद्र सरकार हमें सलाखों के पीछे भी भेज दे या हमें फांसी पर लटका दे, तब भी हम वंदे मातरम के महज दो ही पद गाएंगे। उन्होंने यह बयान ऐसे वक्त में दिया है, जब कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी पर यह आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्र गीत गाने से रोकने का इशारा किया था।
हरिप्रसाद ने आरोपों का बताया साजिश
दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कांग्रेस नेता बी.के. हरिप्रसाद ने इन आरोपों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की "साजिश और चालाकी भरी योजना" का हिस्सा बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी ने केवल इस बात पर आपत्ति जताई थी कि वंदे मातरम् को सही तरीके से नहीं गाया जा रहा था। हरिप्रसाद के अनुसार, सोनिया गांधी ने कहा था कि वंदे मातरम् को उचित ढंग से गाया जाना चाहिए और उनकी आपत्ति केवल इसके गायन की शैली को लेकर थी, न कि गीत को लेकर। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पैर में दिक्कत थी। इसी वजह से वो लंबे समय तक खड़े नहीं हो सकते थे। खड़गे की इसी दिक्कत को देखते हुए सोनिया गांधी ने उनके लिए कुर्सी मांगी थी।
उन्होंने इस घटना की भाजपा और आरएसएस की ओर से की जा रही आलोचनाओं पर भी सवाल उठाया। उनके मुताबिक, आखिर अब तक आरएसएस ने 'नमस्ते सदा वत्सले' की प्रार्थना करने के बाद कितनी बार वंदे मातरम या राष्ट्रगान गाया है। क्या भाजपा या आरएसएस हमें इस बारे में स्पष्टीकरण दे सकते हैं। हरिप्रसाद ने कहा कि जब आजादी की लड़ाई जारी थी, उस वक्त आरएसएस के लोग राष्ट्रविरोधी भूमिका निभा रहे थे। लिहाजा हमें उनसे किसी खास गीत को सीखने की कोई जरूरत नहीं है।
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भाजपा ने पर प्रदेश अध्यक्ष ने साधा निशाना
कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष से सवाल किया गया, तो उन्होंने साफ कह दिया कि उन्हें इस टिप्पणी के बारे में कोई खास जानकारी नहीं है। साथ ही, उन्होंने कांग्रेस के रुख को भी स्पष्ट करते हुए कहा, “एक कांग्रेस का कार्यकर्ता और अध्यक्ष होने के नाते मैं यह बात साफ कर देना चाहता हूं कि हम केवल दो ही पद पाएंगे। अब चाहे वो हमें इसके लिए सलाखों के पीछे डाले या फांसी के फंदे पर लटका दें। उन्हें जो करना है, करने दीजिए।”
हरिप्रसाद ने कहा कि देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने ऐसे बलिदान दिए हैं जिनसे देश को आजादी, राष्ट्रगान और वंदे मातरम प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि "आजाद हिंद जिंदाबाद", "वंदे मातरम" और "इंकलाब जिंदाबाद" जैसे नारे स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा थे और उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भाजपा और आरएसएस ने इनमें से एक भी नारा अपनाया है। उन्होंने कहा, हमें उन लोगों से सीखने की जरूरत नहीं है, जिन्होंने अंग्रेजों के साथ हाथ मिलाया और स्वतंत्रता आंदोलन के खिलाफ काम किया।
दिल्ली दौरे के बारे में पूछे जाने पर हरिप्रसाद ने कहा कि कांग्रेस उच्च कमान ने प्रत्येक जिले के लिए पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया है, ताकि वे स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ समय बिता सकें और संगठन को मजबूत करने पर रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकें। उन्होंने कहा, "उन सभी ने अपनी रिपोर्टें जमा कर दी हैं। मुझे इन रिपोर्टों पर चर्चा करने के लिए दिल्ली बुलाया गया है।" हनुर वन मुठभेड़ में तीन कथित शिकारियों के मारे जाने के संबंध में हरिप्रसाद ने कहा कि मजिस्ट्रेट जांच के आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा, "यह घटना नहीं होनी चाहिए थी, लेकिन हो गई। मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जांच के बाद हम परिणाम देखेंगे और आगे की कार्रवाई करेंगे।"
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हरिप्रसाद ने आरोपों का बताया साजिश
दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कांग्रेस नेता बी.के. हरिप्रसाद ने इन आरोपों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की "साजिश और चालाकी भरी योजना" का हिस्सा बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी ने केवल इस बात पर आपत्ति जताई थी कि वंदे मातरम् को सही तरीके से नहीं गाया जा रहा था। हरिप्रसाद के अनुसार, सोनिया गांधी ने कहा था कि वंदे मातरम् को उचित ढंग से गाया जाना चाहिए और उनकी आपत्ति केवल इसके गायन की शैली को लेकर थी, न कि गीत को लेकर। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पैर में दिक्कत थी। इसी वजह से वो लंबे समय तक खड़े नहीं हो सकते थे। खड़गे की इसी दिक्कत को देखते हुए सोनिया गांधी ने उनके लिए कुर्सी मांगी थी।
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उन्होंने इस घटना की भाजपा और आरएसएस की ओर से की जा रही आलोचनाओं पर भी सवाल उठाया। उनके मुताबिक, आखिर अब तक आरएसएस ने 'नमस्ते सदा वत्सले' की प्रार्थना करने के बाद कितनी बार वंदे मातरम या राष्ट्रगान गाया है। क्या भाजपा या आरएसएस हमें इस बारे में स्पष्टीकरण दे सकते हैं। हरिप्रसाद ने कहा कि जब आजादी की लड़ाई जारी थी, उस वक्त आरएसएस के लोग राष्ट्रविरोधी भूमिका निभा रहे थे। लिहाजा हमें उनसे किसी खास गीत को सीखने की कोई जरूरत नहीं है।
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भाजपा ने पर प्रदेश अध्यक्ष ने साधा निशाना
कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष से सवाल किया गया, तो उन्होंने साफ कह दिया कि उन्हें इस टिप्पणी के बारे में कोई खास जानकारी नहीं है। साथ ही, उन्होंने कांग्रेस के रुख को भी स्पष्ट करते हुए कहा, “एक कांग्रेस का कार्यकर्ता और अध्यक्ष होने के नाते मैं यह बात साफ कर देना चाहता हूं कि हम केवल दो ही पद पाएंगे। अब चाहे वो हमें इसके लिए सलाखों के पीछे डाले या फांसी के फंदे पर लटका दें। उन्हें जो करना है, करने दीजिए।”
हरिप्रसाद ने कहा कि देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने ऐसे बलिदान दिए हैं जिनसे देश को आजादी, राष्ट्रगान और वंदे मातरम प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि "आजाद हिंद जिंदाबाद", "वंदे मातरम" और "इंकलाब जिंदाबाद" जैसे नारे स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा थे और उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भाजपा और आरएसएस ने इनमें से एक भी नारा अपनाया है। उन्होंने कहा, हमें उन लोगों से सीखने की जरूरत नहीं है, जिन्होंने अंग्रेजों के साथ हाथ मिलाया और स्वतंत्रता आंदोलन के खिलाफ काम किया।
दिल्ली दौरे के बारे में पूछे जाने पर हरिप्रसाद ने कहा कि कांग्रेस उच्च कमान ने प्रत्येक जिले के लिए पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया है, ताकि वे स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ समय बिता सकें और संगठन को मजबूत करने पर रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकें। उन्होंने कहा, "उन सभी ने अपनी रिपोर्टें जमा कर दी हैं। मुझे इन रिपोर्टों पर चर्चा करने के लिए दिल्ली बुलाया गया है।" हनुर वन मुठभेड़ में तीन कथित शिकारियों के मारे जाने के संबंध में हरिप्रसाद ने कहा कि मजिस्ट्रेट जांच के आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा, "यह घटना नहीं होनी चाहिए थी, लेकिन हो गई। मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जांच के बाद हम परिणाम देखेंगे और आगे की कार्रवाई करेंगे।"