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China Education: नीट विवाद के बीच चीन की गाओकाओ परीक्षा चर्चा में क्यों, गोपनीयता के लिए कैसे बनाए सख्त नियम?

Sun, 02 Aug 2026 07:18 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sun, 02 Aug 2026 07:18 AM IST
सार

Why Gaokao Is in Focus Amid NEET Row: भारत में नीट परीक्षा को लेकर उठे विवाद के बीच चीन की राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा गाओकाओ फिर चर्चा में है। यहां प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों को कई सप्ताह तक पूरी तरह बाहरी दुनिया से अलग रखा जाता है और कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा कराई जाती है। आखिर चीन इतनी सख्त व्यवस्था क्यों अपनाता है। क्या इससे परीक्षा की गोपनीयता और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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China Education: Why Gaokao Is in Focus Amid NEET Row, How Strict Rules Protect Exam Confidentiality
नीट विवाद के बीच चीन की परीक्षा व्यवस्था क्यों बनी चर्चा का विषय? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत में नीट परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद के बीच चीन की राष्ट्रीय विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा गाओकाओ की व्यवस्था चर्चा का विषय बनी हुई है। दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में शामिल गाओकाओ के लिए चीन ऐसी सुरक्षा व्यवस्था अपनाता है, जिसमें प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों और शिक्षकों को कई सप्ताह तक पूरी तरह बाहरी दुनिया से अलग रखा जाता है। इसका उद्देश्य केवल एक होता है कि प्रश्नपत्र किसी भी हालत में लीक न हो और परीक्षा की गोपनीयता बनी रहे।
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गाओकाओ परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में क्यों माना जाता है?

चीन की शिक्षा व्यवस्था दुनिया की सबसे प्रतिस्पर्धी प्रणालियों में गिनी जाती है। यहां विश्वविद्यालयों में प्रवेश का सबसे महत्वपूर्ण आधार राष्ट्रीय स्तर की गाओकाओ यानी राष्ट्रीय उच्च शिक्षा प्रवेश परीक्षा है। हर वर्ष एक करोड़ से अधिक विद्यार्थी इस परीक्षा में शामिल होते हैं। इसी परीक्षा के अंकों के आधार पर छात्रों को देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में दाखिला मिलता है। प्रतिभागियों की बड़ी संख्या और सख्त नियमों के कारण इसे दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे कठिन स्कूली व कॉलेज प्रवेश परीक्षाओं में गिना जाता है।
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प्रश्नपत्र बनाने वालों को दुनिया से क्यों काट दिया जाता है?

गाओकाओ परीक्षा के प्रश्नपत्रों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए चीन बेहद कड़े कदम उठाता है। प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए चुने गए विशेषज्ञों और शिक्षकों को कई सप्ताह तक एक सुरक्षित परिसर में रखा जाता है। इस दौरान उनका बाहरी दुनिया से हर तरह का संपर्क पूरी तरह समाप्त कर दिया जाता है। उन्हें मोबाइल फोन, इंटरनेट और अन्य संचार साधनों का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होती। इतना ही नहीं, परिसर में भोजन और अन्य सेवाएं देने वाले कर्मचारियों की गतिविधियों पर भी लगातार कड़ी निगरानी रखी जाती है ताकि किसी भी स्तर पर प्रश्नपत्र की गोपनीयता प्रभावित न हो।
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परीक्षा केंद्रों तक प्रश्नपत्र कैसे पहुंचाए जाते हैं?

प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद उनकी सुरक्षित छपाई की जाती है। इसके बाद उन्हें सीलबंद पैकेटों में पैक कर कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाता है। पूरे परिवहन और वितरण तंत्र पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी रखी जाती है। साथ ही पुलिस सुरक्षा और बहुस्तरीय जांच व्यवस्था भी लागू रहती है। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से पहले किसी भी तरह सार्वजनिक न हो।

चीनी शिक्षा मंत्रालय गाओकाओ को लेकर क्या कहता है?

चीनी शिक्षा मंत्रालय के अनुसार गाओकाओ चीन की राष्ट्रीय विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा है, जिसका आयोजन हर वर्ष जून में किया जाता है। यही परीक्षा देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों में दाखिले का सबसे महत्वपूर्ण आधार होती है। भारत में नीट परीक्षा को लेकर उठे विवाद के बीच चीन की यह व्यवस्था इसलिए चर्चा में है, क्योंकि वहां प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया बेहद सख्त सुरक्षा और गोपनीयता के बीच पूरी की जाती है।
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