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Wildlife Conflict: गजराज होंगे सुरक्षित, गांव भी बचेंगे; क्या इंसान-हाथियों के टकराव को रोक पाएगी ये योजना?
Sun, 02 Aug 2026 07:47 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Sun, 02 Aug 2026 07:47 AM IST
सार
Human-Elephant Clashes: देश में हर साल इंसानों और हाथियों के बीच होने वाले संघर्ष में सैकड़ों लोगों और कई हाथियों की जान चली जाती है। अब इस टकराव को रोकने के लिए पहली बार राज्यवार मास्टर प्लान तैयार किया गया है। क्या नई रणनीति से गांव और गजराज दोनों सुरक्षित रहेंगे। क्या हादसों को पहले ही रोका जा सकेगा और इंसान व हाथी के बीच सह-अस्तित्व का रास्ता निकलेगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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हाथी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
देश के कई राज्यों में जंगल से निकलकर गांवों और खेतों तक पहुंचने वाले हाथियों का झुंड हर साल जान-माल का बड़ा नुकसान करता है। फसलें बर्बाद होती हैं, लोगों में भगदड़ मचती है और कई बार इंसानों व हाथियों दोनों की मौत हो जाती है। इस समस्या को कम करने के लिए केंद्र सरकार की पहल पर पहली बार इंसान और हाथी के सह-अस्तित्व का राज्यवार मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य गांवों और गजराज दोनों को सुरक्षित रखना और हर साल होने वाले जानलेवा संघर्ष को कम करना है।
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क्या हर साल होने वाली मौतों को रोकने के लिए बनाई गई है नई योजना?
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की पहल पर भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून ने दो वर्षों के अध्ययन के बाद यह विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। 20 से 25 वर्षों के आंकड़ों के आधार पर बनाई गई यह रिपोर्ट 12 अगस्त के आसपास जारी हो सकती है। रिपोर्ट का सबसे बड़ा लक्ष्य हर साल औसतन होने वाली करीब 600 लोगों और 120 हाथियों की मौतों को शून्य के करीब लाना है। अब केवल हादसे के बाद मुआवजा देने के बजाय पहले से ऐसी व्यवस्था बनाने पर जोर रहेगा, जिससे टकराव ही न हो।
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