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चिट फंड घोटाला: वेलफेयर बिल्डिंग्स एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड पर ED की रेड, 182 बैंक खाते व गाड़ियां फ्रीज
Mon, 10 Aug 2026 08:15 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Mon, 10 Aug 2026 08:15 PM IST
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भुवनेश्वर जोनल कार्यालय ने करोड़ों रुपये के चिट फंड घोटाले में 'वेलफेयर बिल्डिंग्स एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड' के ठिकानों पर रेड की है। जांच एजेंसी ने कंपनी और उसके निदेशकों से जुड़े 182 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। इसके अलावा छह महंगी लग्जरी गाड़ियां जब्त की गई हैं। छापेमारी में 1.01 करोड़ रुपये की नकदी (भारतीय मुद्रा) के साथ-साथ कंपनी के निदेशकों से संबंधित कई अहम दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।
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ईडी ने 'वेलफेयर बिल्डिंग्स एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड' और उसके निदेशकों, मल्ला विजया प्रसाद, वराह रामकृष्ण सत्य श्रीनिवास राव अल्ला एवं अन्य लोगों से जुड़ी विशाखापत्तनम व हैदराबाद स्थित पांच रिहायशी/व्यावसायिक जगहों पर तलाशी ली है। उक्त कंपनी के खिलाफ चिट फंड घोटाले में कई एफआईआर दर्ज की गई थीं। बाद में चार्जशीट भी दाखिल की गई। प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हीं केसों और चार्जशीट के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की।
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जांच से पता चला है कि चिट फंड घोटाले की आरोपी कंपनी 'वेलफेयर बिल्डिंग्स एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड' के निदेशक और मैनेजिंग डायरेक्टर ने रियल एस्टेट बिजनेस की आड़ में बड़े पैमाने पर डिपॉजिट जुटाने की स्कीम चलाई। उन्होंने तय नियमों का उल्लंघन करते हुए दो हजार करोड़ रुपये से ज़्यादा का पब्लिक फंड जुटा लिया। पुराने निवेशकों को उनके रिटर्न का पैसा लौटाने के लिए नए निवेशकों को जोड़ने की योजना बनाई। निवेशकों के पैसे को सही काम में लगाने की बजाए उसे निजी फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया।
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कंपनी के निदेशक ने डिपॉजिट छिपाने के लिए फाइनेंशियल स्टेटमेंट में भी गड़बड़ की। जमीन के ऐसे गलत ट्रांज़ैक्शन किए गए, जिनसे असली कीमत छिपाई जा सके और कानूनी पचड़ों से बचा जा सके। ईडी की अब तक हुई जांच से पता चला है कि ये फंड ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों के हज़ारों भोले-भाले इन्वेस्टर्स से अलग-अलग स्कीमों के ज़रिए गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा किए गए थे। कंपनी ने विशाखापत्तनम में ज़मीन देने का झूठा वादा किया था। जब भारी मात्रा में निवेश एकत्रित हो गया तो कंपनी ने कई राज्यों में स्थित अपने ब्रांच ऑफिस बंद कर दिए। निवेशक अपना पैसा वापस लेने के लिए कंपनी संचालकों के चक्कर काटते रहे।