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'नए उद्योगों के दावे, पुराने उद्योग बंद': शिवसेना यूबीटी ने सामना में सरकार से पूछा सवाल; कहा- जिम्मेदार कौन?

Wed, 29 Jul 2026 01:34 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी आईएएनएस, मुंबई
आईएएनएस, मुंबई Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Wed, 29 Jul 2026 01:34 PM IST
सार

शिवसेना (यूबीटी) ने सामना के संपादकीय में आरोप लगाया कि 2024-26 के बीच देश में 1.21 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां बंद हो गईं, जिससे लाखों नौकरियां प्रभावित हुईं। पार्टी ने केंद्र पर उद्योगों के पुनर्वास की अनदेखी का आरोप लगाया। 

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Claims of new industries old ones shutting down Shiv Sena questions government Saamana asks who is responsible
उद्धव ठाकरे, प्रमुख, शिवसेना यूबीटी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

शिवसेना (यूबीटी) ने केंद्र पर देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने बुधवार को अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में लोकसभा में पेश केंद्र सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में देशभर में 1,21,805 एमएसएमई इकाइयां बंद हो गईं। इसके कारण लाखों युवाओं की नौकरियां चली गईं। 

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संपादकीय ने क्या लिखा है? 
शिवसेना (यूबीटी) ने संपादकीय लिखा, 'पिछले 12 वर्षों से देश में पुराने उद्योग बंद हो रहे हैं। नए उद्योग शुरू करने की बातें हो रही हैं। जिस शासन में युवाओं के हाथों में रोजगार देने के बजाय उनके मन में धार्मिक उन्माद भरा जाए, वहां इससे अलग परिणाम की उम्मीद कैसे की जा सकती है?'

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कितने एमएसएमई इकाइयों का संचालन बंद किया? 
संपादकीय के अनुसार, 2024 से 2026 के बीच 1,21,805 एमएसएमई इकाइयों ने अपना संचालन बंद कर दिया। पार्टी ने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह कृषि के बाद देश में सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है और निर्यात में भी इसकी बड़ी भूमिका है। इसके बावजूद पिछले एक दशक में एमएसएमई इकाइयों के बंद होने की रफ्तार लगातार बढ़ती गई है।

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सबसे अधिक असर किस राज्य  पर पड़ा? 
राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 28,764 एमएसएमई इकाइयां बंद हुईं। इसके बाद तमिलनाडु में 14,176, गुजरात में 11,150 और राजस्थान में 9,881 इकाइयों ने हमेशा के लिए कामकाज बंद कर दिया। संपादकीय में कहा गया कि ये आंकड़े बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश और रोजगार सृजन के सरकारी दावों से मेल नहीं खाते।

संपादकीय में शिवसेना (यूबीटी) ने यह भी दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में सरकार ने स्टार्टअप और एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 35 लाख करोड़ रुपए से अधिक के ऋण उपलब्ध कराए। लेकिन इसके बावजूद उद्यमियों को बढ़ती परिचालन लागत, बाजार की चुनौतियों और प्रशासनिक अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है।

महाराष्ट्र में कितनी एमएसएमई इकाइयां बंद हुई?
महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए पार्टी ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में राज्य में 75 लाख से अधिक नए उद्यम पंजीकृत हुए, लेकिन इसी दौरान 28 हजार से ज्यादा एमएसएमई इकाइयां बंद भी हो गईं। शिवसेना (यूबीटी) का कहना है कि बीमार उद्योगों के पुनर्वास के लिए कोई लक्षित योजना न होने से बैंकों के नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स बढ़ रहे हैं और हजारों युवाओं की नौकरियां अचानक खत्म हो रही हैं।

 

संपादकीय में आरोप लगाया गया कि सरकार की ओर से इन उद्योगों को सहारा देने, दोबारा खड़ा करने या पुनर्जीवित करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

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