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कोयला घोटाला केस: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट, ट्रायल कोर्ट का आदेश निरस्त
Wed, 29 Jul 2026 02:17 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 29 Jul 2026 02:17 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने 2005 के तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को क्लीन चिट दे दी है। शीर्ष अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ जारी समन को रद्द कर दिया। इस फैसले के साथ ही इस बहुचर्चित मामले में कानूनी कार्यवाही पूरी तरह समाप्त हो गई है।
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कोयला घोटाला केस
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ चल रहे कोयला ब्लॉक आवंटन मामले को पूरी तरह बंद कर दिया। शीर्ष अदालत ने उन्हें और अन्य आरोपियों को तलब करने वाले स्पेशल कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही सीबीआई की उस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया, जिसमें डॉ. सिंह को क्लीन चिट दी गई थी।
ट्रायल कोर्ट का आदेश खारिज
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। पीठ ने सीबीआई की ओर से दाखिल दोनों क्लोजर रिपोर्ट को सही माना। शीर्ष अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के पास सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और डॉ. मनमोहन सिंह को समन भेजने का कोई ठोस आधार नहीं था। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा कि मामले की पड़ताल करने के बाद यह साफ हो गया है कि सीबीआई की रिपोर्ट प्रक्रिया के तहत बिल्कुल सही थी। इसलिए इस मुकदमे को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं बनता।
2005 के तालाबीरा-II ब्लॉक से जुड़ा मामला
यह पूरा मामला 2005 में ओडिशा के तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक के आवंटन का है। उस समय डॉक्टर मनमोहन सिंह के पास ही कोयला मंत्रालय का प्रभार था। सीबीआई ने जांच के बाद मामले में कोई आपराधिक साजिश नहीं पाई थी और क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी।
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हालांकि, स्पेशल कोर्ट ने सीबीआई की रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। स्पेशल कोर्ट ने मार्च 2015 में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारख समेत तीन अन्य को आरोपी के रूप में तलब किया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी थी।
यह भी पढ़ें: संसद का मानसून सत्र: राहुल गांधी ने किसे बताया 'अंधभक्त', जिस पर लोकसभा में मचा हंगामा
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का पक्ष
डॉक्टर मनमोहन सिंह ने शुरू से ही अपने फैसले में किसी भी तरह की आपराधिक नीयत से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि आवंटन का निर्णय पूरी तरह प्रशासनिक और तय नीति के तहत लिया गया था। उन्होंने लोक सेवकों पर मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक कानूनी अनुमति (संस्वीकृति) के न होने पर भी सवाल उठाया था। अब सुप्रीम कोर्ट के इस अंतिम फैसले से इस पूरे विवाद पर हमेशा के लिए विराम लग गया है।
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ट्रायल कोर्ट का आदेश खारिज
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। पीठ ने सीबीआई की ओर से दाखिल दोनों क्लोजर रिपोर्ट को सही माना। शीर्ष अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के पास सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और डॉ. मनमोहन सिंह को समन भेजने का कोई ठोस आधार नहीं था। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा कि मामले की पड़ताल करने के बाद यह साफ हो गया है कि सीबीआई की रिपोर्ट प्रक्रिया के तहत बिल्कुल सही थी। इसलिए इस मुकदमे को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं बनता।
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2005 के तालाबीरा-II ब्लॉक से जुड़ा मामला
यह पूरा मामला 2005 में ओडिशा के तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक के आवंटन का है। उस समय डॉक्टर मनमोहन सिंह के पास ही कोयला मंत्रालय का प्रभार था। सीबीआई ने जांच के बाद मामले में कोई आपराधिक साजिश नहीं पाई थी और क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी।
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हालांकि, स्पेशल कोर्ट ने सीबीआई की रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। स्पेशल कोर्ट ने मार्च 2015 में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारख समेत तीन अन्य को आरोपी के रूप में तलब किया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी थी।
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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का पक्ष
डॉक्टर मनमोहन सिंह ने शुरू से ही अपने फैसले में किसी भी तरह की आपराधिक नीयत से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि आवंटन का निर्णय पूरी तरह प्रशासनिक और तय नीति के तहत लिया गया था। उन्होंने लोक सेवकों पर मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक कानूनी अनुमति (संस्वीकृति) के न होने पर भी सवाल उठाया था। अब सुप्रीम कोर्ट के इस अंतिम फैसले से इस पूरे विवाद पर हमेशा के लिए विराम लग गया है।