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कॉकरोच टिप्पणी विवाद: सीजेआई सूर्यकांत बोले- बयान को गलत तरीके से पेश कर युवाओं को गुमराह करने की कोशिश
Fri, 14 Aug 2026 05:36 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Fri, 14 Aug 2026 05:36 PM IST
सार
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने अदालती कार्यवाही के वीडियो को सोशल मीडिया पर संदर्भ से काटकर प्रसारित किए जाने को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने मई में की गई ‘कॉकरोच’ टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके कथन को गलत अर्थ में पेश किया गया और इससे युवाओं को भ्रमित करने की कोशिश हुई। उन्होंने मीडिया से न्यायिक कार्यवाही की जिम्मेदारी के साथ रिपोर्टिंग करने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की अपील की।
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सीजेआई सूर्यकांत
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोशल मीडिया पर अदालती कार्यवाही के वीडियो को पर्याप्त संदर्भ के बिना प्रसारित किए जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि उनकी मौखिक टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया और दुर्भावनापूर्ण इरादे से इस्तेमाल कर देश के युवाओं को गुमराह करने की कोशिश की गई।
15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कुछ ऐसे लोगों की तुलना कॉकरोच से की थी, जिनके पास फर्जी डिग्रियां हैं और जो व्यवस्था पर हमला करने के लिए सोशल मीडिया या सूचना के अधिकार के कार्यकर्ता बन जाते हैं।
सीजेआई ने टिप्पणी को लेकर क्या कहा?
सीजेआई की इस टिप्पणी के बाद युवाओं में व्यापक नाराजगी देखने को मिली थी। इसके बाद व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन "कॉकरोच जनता पार्टी" शुरू हुआ। डीडी न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि आजकल अदालती कार्यवाही के वीडियो को सोशल मीडिया पर पर्याप्त संदर्भ के बिना प्रसारित किया जा रहा है।
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सीजेआई ने कहा कि जो कुछ हुआ वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था और उन्होंने स्पष्ट किया कि वह संबंधित लोगों के बारे में ऐसी बातें सोच भी नहीं सकते। उन्होंने कहा, "मेरी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया और उसका गलत इस्तेमाल किया गया। जो बात कही ही नहीं गई, उसे इस तरह पेश किया गया जैसे वह कही गई हो। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। खास तौर पर यह देश के युवाओं को गुमराह करने की एक बड़ी दुर्भावनापूर्ण कोशिश है।"
मीडिया को दी क्या सलाह?
सीजेआई ने मीडिया से न्यायिक कार्यवाही की जिम्मेदारी के साथ रिपोर्टिंग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज में सद्भाव बनाए रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा, "आप सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया या किसी भी तरह के मीडिया से जुड़े हों या केवल एक नागरिक हों। हम सभी के अधिकार हैं और हमारे संवैधानिक कर्तव्य और जिम्मेदारियां भी हैं।"
उन्होंने कहा, "जब हम अधिकारों की बात करते हैं तो हमारे अंदर अपने दायित्वों को पूरा करने की क्षमता भी होनी चाहिए। इसलिए मैं उनसे अपनी जिम्मेदारियों को ध्यान में रखने का आग्रह करूंगा। हम सभी को यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास करने चाहिए कि समाज में सद्भाव बना रहे।"
टिप्पणी ने कैसे खड़ी कर दी कॉकरोच जनता पार्टी?
नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में एक महीने से अधिक समय तक जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन हुआ था। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए थे। इन प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।
सीजेआई ने न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल मंचों पर बिना अनुमति प्रसारित करने, दोबारा पोस्ट करने, अपलोड करने और उनसे कमाई करने पर रोक लगाने वाले अपने हालिया आदेश का भी जिक्र किया।
सीजेआई ने पारदर्शिता को लेकर क्या कहा?
भारत के 53वें प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि न्यायिक कार्यवाही में पारदर्शिता जरूरी है, लेकिन इसका इस्तेमाल व्यावसायिक लाभ के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, "हम न्यायपालिका में पारदर्शिता लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पारदर्शिता होनी चाहिए। इसी दिशा में एक और कदम के तौर पर हमने सुप्रीम कोर्ट में कार्यवाही का सीधा प्रसारण शुरू किया।"
सीजेआई ने कहा, "लेकिन सीधे प्रसारण का गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। खास तौर पर इसका व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। लोग छोटे-छोटे वीडियो का इस्तेमाल अपने निजी लाभ और व्यावसायिक लाभ के लिए करते हैं। इसे रोका जाना चाहिए।"
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15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कुछ ऐसे लोगों की तुलना कॉकरोच से की थी, जिनके पास फर्जी डिग्रियां हैं और जो व्यवस्था पर हमला करने के लिए सोशल मीडिया या सूचना के अधिकार के कार्यकर्ता बन जाते हैं।
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सीजेआई ने टिप्पणी को लेकर क्या कहा?
सीजेआई की इस टिप्पणी के बाद युवाओं में व्यापक नाराजगी देखने को मिली थी। इसके बाद व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन "कॉकरोच जनता पार्टी" शुरू हुआ। डीडी न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि आजकल अदालती कार्यवाही के वीडियो को सोशल मीडिया पर पर्याप्त संदर्भ के बिना प्रसारित किया जा रहा है।
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सीजेआई ने कहा कि जो कुछ हुआ वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था और उन्होंने स्पष्ट किया कि वह संबंधित लोगों के बारे में ऐसी बातें सोच भी नहीं सकते। उन्होंने कहा, "मेरी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया और उसका गलत इस्तेमाल किया गया। जो बात कही ही नहीं गई, उसे इस तरह पेश किया गया जैसे वह कही गई हो। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। खास तौर पर यह देश के युवाओं को गुमराह करने की एक बड़ी दुर्भावनापूर्ण कोशिश है।"
मीडिया को दी क्या सलाह?
सीजेआई ने मीडिया से न्यायिक कार्यवाही की जिम्मेदारी के साथ रिपोर्टिंग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज में सद्भाव बनाए रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा, "आप सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया या किसी भी तरह के मीडिया से जुड़े हों या केवल एक नागरिक हों। हम सभी के अधिकार हैं और हमारे संवैधानिक कर्तव्य और जिम्मेदारियां भी हैं।"
उन्होंने कहा, "जब हम अधिकारों की बात करते हैं तो हमारे अंदर अपने दायित्वों को पूरा करने की क्षमता भी होनी चाहिए। इसलिए मैं उनसे अपनी जिम्मेदारियों को ध्यान में रखने का आग्रह करूंगा। हम सभी को यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास करने चाहिए कि समाज में सद्भाव बना रहे।"
टिप्पणी ने कैसे खड़ी कर दी कॉकरोच जनता पार्टी?
नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में एक महीने से अधिक समय तक जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन हुआ था। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए थे। इन प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।
सीजेआई ने न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल मंचों पर बिना अनुमति प्रसारित करने, दोबारा पोस्ट करने, अपलोड करने और उनसे कमाई करने पर रोक लगाने वाले अपने हालिया आदेश का भी जिक्र किया।
सीजेआई ने पारदर्शिता को लेकर क्या कहा?
भारत के 53वें प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि न्यायिक कार्यवाही में पारदर्शिता जरूरी है, लेकिन इसका इस्तेमाल व्यावसायिक लाभ के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, "हम न्यायपालिका में पारदर्शिता लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पारदर्शिता होनी चाहिए। इसी दिशा में एक और कदम के तौर पर हमने सुप्रीम कोर्ट में कार्यवाही का सीधा प्रसारण शुरू किया।"
सीजेआई ने कहा, "लेकिन सीधे प्रसारण का गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। खास तौर पर इसका व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। लोग छोटे-छोटे वीडियो का इस्तेमाल अपने निजी लाभ और व्यावसायिक लाभ के लिए करते हैं। इसे रोका जाना चाहिए।"