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जनगणना ड्यूटी या बच्चों की पढ़ाई: कलकत्ता हाईकोर्ट ने पूछा- रविवार को भी काम करेंगे शिक्षक, फिर आराम कब?
Fri, 14 Aug 2026 05:40 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 14 Aug 2026 05:40 PM IST
सार
कलकत्ता हाईकोर्ट ने जनगणना और स्कूल की पढ़ाई के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया है। अदालत ने पूछा कि 40-60 किलोमीटर दूर से आने वाले शिक्षक आखिर कब तक अतिरिक्त ड्यूटी करेंगे? अब प्रशासन को शिक्षकों की दूरी और स्कूल के समय जैसी बातों को ध्यान में रखकर रास्ता निकालना होगा।
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कलकत्ता हाईकोर्ट
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
जनगणना की ड्यूटी और स्कूलों में पढ़ाई के बीच संतुलन कैसे बने? कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को इसी सवाल पर पश्चिम बंगाल सरकार से जवाब मांगा। अदालत ने कहा कि वह चाहती है कि जनगणना का काम भी सुचारू रूप से चले और छात्रों की पढ़ाई पर भी असर न पड़े। मामला उन स्कूल शिक्षकों की याचिकाओं से जुड़ा है, जिन्हें जनगणना के लिए गणनाकर्ता और पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। शिक्षकों का कहना है कि स्कूल की जिम्मेदारियों के साथ जनगणना ड्यूटी निभाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।
अदालत ने क्या-क्या कहा?
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उन्हें अपने स्कूल पहुंचने के लिए 40 से 60 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ती है। स्कूलों में शनिवार को भी काम होता है। ऐसे में रविवार ही उनका साप्ताहिक अवकाश होता है।
इस पर न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने सवाल किया कि अगर कोई शिक्षक रोज सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक काम करता है, 40 या 60 किलोमीटर दूर से आता है और उसे केवल रविवार को छुट्टी मिलती है, तो क्या उसे जनगणना के लिए पारिश्रमिक लेकर उस दिन भी काम करना चाहिए? अदालत ने यह भी पूछा कि क्या शिक्षकों को रविवार को अपने घर के काम नहीं करने होते?
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क्या जनगणना के लिए स्कूल की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है?
पश्चिम बंगाल सरकार के वकील ने कहा कि सरकारी अधिसूचना में साफ लिखा है कि जनगणना का काम स्कूल की शैक्षणिक गतिविधियों को प्रभावित किए बिना किया जाना चाहिए। इसके लिए कक्षाएं खत्म होने के बाद या सप्ताहांत में जनगणना का काम कराने की बात कही गई है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल धीरज त्रिवेदी ने भी कहा कि ऐसा बीच का रास्ता निकाला जाना चाहिए, जिससे जनगणना का काम पूरा हो और शिक्षकों के जीवन तथा स्कूल की पढ़ाई पर असर न पड़े।
वरिष्ठ अधिवक्ता सुबीर सान्याल ने सुझाव दिया कि दूसरे राज्यों की तरह यहां भी दिशानिर्देश बनाए जाएं। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में जनगणना ड्यूटी में लगाए गए शिक्षकों को अस्थायी तौर पर उनकी नियमित स्कूल जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाता है।
यह भी पढ़ें: सभी कांवड़िए एक जैसे नहीं होते साहब: मौलाना के बयान पर भड़के धीरेंद्र शास्त्री, बोले- सबको तुम आतंकवादी न कहना
मामले से जुड़ी पांच बड़ी बातें
क्या स्कूल के पास रहने वाले शिक्षकों को मिले जनगणना की जिम्मेदारी?
न्यायमूर्ति राव ने कहा कि अगर प्रशासन शिक्षकों की सेवाएं जनगणना में लेना चाहता है तो उसे ऐसे शिक्षकों की पहचान करनी चाहिए, जो अपने स्कूलों के आसपास रहते हों। अदालत ने कहा कि प्रशासन ने हर स्कूल से कुछ शिक्षकों का चयन कर दिया, लेकिन उनके घर से स्कूल की दूरी जैसे जरूरी पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के वकील को शिक्षकों के निवास स्थान, स्कूल, दोनों के बीच की दूरी, स्कूल के समय और शनिवार को स्कूल खुले रहने की जानकारी देने का निर्देश दिया है। यह ब्योरा केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल धीरज त्रिवेदी को सौंपा जाएगा। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को तय की है।
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अदालत ने क्या-क्या कहा?
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उन्हें अपने स्कूल पहुंचने के लिए 40 से 60 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ती है। स्कूलों में शनिवार को भी काम होता है। ऐसे में रविवार ही उनका साप्ताहिक अवकाश होता है।
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इस पर न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने सवाल किया कि अगर कोई शिक्षक रोज सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक काम करता है, 40 या 60 किलोमीटर दूर से आता है और उसे केवल रविवार को छुट्टी मिलती है, तो क्या उसे जनगणना के लिए पारिश्रमिक लेकर उस दिन भी काम करना चाहिए? अदालत ने यह भी पूछा कि क्या शिक्षकों को रविवार को अपने घर के काम नहीं करने होते?
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क्या जनगणना के लिए स्कूल की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है?
पश्चिम बंगाल सरकार के वकील ने कहा कि सरकारी अधिसूचना में साफ लिखा है कि जनगणना का काम स्कूल की शैक्षणिक गतिविधियों को प्रभावित किए बिना किया जाना चाहिए। इसके लिए कक्षाएं खत्म होने के बाद या सप्ताहांत में जनगणना का काम कराने की बात कही गई है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल धीरज त्रिवेदी ने भी कहा कि ऐसा बीच का रास्ता निकाला जाना चाहिए, जिससे जनगणना का काम पूरा हो और शिक्षकों के जीवन तथा स्कूल की पढ़ाई पर असर न पड़े।
वरिष्ठ अधिवक्ता सुबीर सान्याल ने सुझाव दिया कि दूसरे राज्यों की तरह यहां भी दिशानिर्देश बनाए जाएं। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में जनगणना ड्यूटी में लगाए गए शिक्षकों को अस्थायी तौर पर उनकी नियमित स्कूल जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाता है।
यह भी पढ़ें: सभी कांवड़िए एक जैसे नहीं होते साहब: मौलाना के बयान पर भड़के धीरेंद्र शास्त्री, बोले- सबको तुम आतंकवादी न कहना
मामले से जुड़ी पांच बड़ी बातें
- जनगणना ड्यूटी: कुछ स्कूल शिक्षकों को गणनाकर्ता और पर्यवेक्षक बनाया गया है।
- शिक्षकों की परेशानी: कई शिक्षक स्कूल से 40 से 60 किलोमीटर दूर रहते हैं।
- रविवार का सवाल: शिक्षकों का साप्ताहिक अवकाश रविवार को होता है।
- हाईकोर्ट का रुख: जनगणना भी चले और छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित न हो।
- अगली सुनवाई: मामले पर 18 अगस्त को फिर सुनवाई होगी।
क्या स्कूल के पास रहने वाले शिक्षकों को मिले जनगणना की जिम्मेदारी?
न्यायमूर्ति राव ने कहा कि अगर प्रशासन शिक्षकों की सेवाएं जनगणना में लेना चाहता है तो उसे ऐसे शिक्षकों की पहचान करनी चाहिए, जो अपने स्कूलों के आसपास रहते हों। अदालत ने कहा कि प्रशासन ने हर स्कूल से कुछ शिक्षकों का चयन कर दिया, लेकिन उनके घर से स्कूल की दूरी जैसे जरूरी पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के वकील को शिक्षकों के निवास स्थान, स्कूल, दोनों के बीच की दूरी, स्कूल के समय और शनिवार को स्कूल खुले रहने की जानकारी देने का निर्देश दिया है। यह ब्योरा केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल धीरज त्रिवेदी को सौंपा जाएगा। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को तय की है।