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DoPT: डीओपीटी की इस सलाह से क्यों दूर भाग रहे केंद्रीय मंत्रालय, सात दिन में देना होगा इन सवालों का जवाब
Fri, 14 Aug 2026 06:11 PM IST
Pavan
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Fri, 14 Aug 2026 06:11 PM IST
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डीओपीटी
- फोटो : अमर उजाला
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केंद्र सरकार के मंत्रालय-विभाग, डीओपीटी की एक सलाह से दूर भाग रहे हैं। सभी मंत्रालयों को सलाह दी गई थी कि कर्मचारियों की वेतन वृद्धि से जुड़े आदेशों का एक तय अवधि में ऑडिट करें। इतना ही नहीं, अगले चार वर्षों में जिन कर्मचारियों को रिटायर होना है, उनके वेतन निर्धारण का भी ऑडिट करें। ज्यादातर मंत्रालयों ने इस सलाह पर गौर नहीं किया। नतीजा, वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग को अतिरिक्त भुगतान की वसूली को माफ करने के प्रस्ताव मिल रहे हैं। इससे वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के अंतर्गत 'नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक' की आंतरिक लेखापरीक्षा डिवीजन के स्टाफ को सेवारत और रिटायर हो चुके कर्मचारियों की पुरानी फाइलें खंगालनी पड़ रही हैं।
तीन महीने के भीतर हो ऑडिट
वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के अंतर्गत 'नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक' की आंतरिक लेखापरीक्षा डिवीजन द्वारा बुधवार को जारी कार्यालय ज्ञापन में यह बात कही गई है। कार्यालय ज्ञापन के मुताबिक, डीओपीटी ने तीन अक्तूबर 2022 को एक कार्यालय ज्ञापन जारी किया था। इसमें केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों को सलाह दी गई थी कि वे एमएसीपी-एसीपीृफाइनेंशियल अपग्रेडेशन-इंक्रीमेंट-प्रमोशन आदि से जुड़े वेतन निर्धारण आदेशों का ऑडिट, आदेश जारी होने के तीन महीने के भीतर करें।
अतिरिक्त भुगतान की वसूली को माफ करने का प्रस्ताव
इतना ही नहीं, 'नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक' की ओर से यह भी कहा गया कि अगले चार वर्षों में रिटायर होने वाले सभी कर्मचारियों के पिछले वेतन निर्धारण आदेशों का भी ऑडिट किया जाए। इस कार्यालय ज्ञापन के जारी होने के बाद भी, व्यय विभाग को अतिरिक्त भुगतान की वसूली को माफ करने के प्रस्ताव मिल रहे हैं। इसका मतलब, संबंधित मंत्रालयों ने डीओपीटी के आदेश का ठीक तरह से पालन नहीं किया।
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मंत्रालयों-विभागों से मांगी है ये जानकारी
'नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक' ने पूछा है कि वेतन निर्धारण आदेशों के समय पर ऑडिट होने के बारे में तय निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं। वेतन निर्धारण के तीन महीने के भीतर ऑडिट की जरूरत होने के बावजूद, सरकारी कर्मचारियों की सेवा के आखिरी समय में ऐसी कमियां क्यों सामने आती हैं, इसके क्या कारण हैं। मंत्रालयों-विभागों में ऑडिटरों द्वारा ऑडिट/निरीक्षण के दौरान आने वाली चुनौतियां (यदि कोई हों), जिनके कारण ऐसे मामले पकड़ में नहीं आते, उनके बारे में बताया जाए। ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए की गई कार्रवाई (यदि कोई हो) का ब्यौरा दिया जाए।
गूगल फॉर्म के माध्यम से दें जानकारी
मंत्रालयों-विभागों को 'नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक' की ओर से पूछे गए सवालों का जवाब एक सप्ताह के भीतर देना होगा। इसके लिए मंत्रालयों-विभागों के तहत काम करने वाले इंटरनल ऑडिट विंग्स से आग्रह किया गया है कि वे ऊपर बताए गए बिंदुओं पर अपनी विस्तृत जानकारी-टिप्पणियां अविलंब भेजें। यह जानकारी ईमेल पर दें। इसके अलावा मंत्रालय-विभाग, ईमेल के जरिए भेजे गए गूगल फॉर्म को भरकर उक्त सवालों का जवाब दे सकते हैं।
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तीन महीने के भीतर हो ऑडिट
वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के अंतर्गत 'नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक' की आंतरिक लेखापरीक्षा डिवीजन द्वारा बुधवार को जारी कार्यालय ज्ञापन में यह बात कही गई है। कार्यालय ज्ञापन के मुताबिक, डीओपीटी ने तीन अक्तूबर 2022 को एक कार्यालय ज्ञापन जारी किया था। इसमें केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों को सलाह दी गई थी कि वे एमएसीपी-एसीपीृफाइनेंशियल अपग्रेडेशन-इंक्रीमेंट-प्रमोशन आदि से जुड़े वेतन निर्धारण आदेशों का ऑडिट, आदेश जारी होने के तीन महीने के भीतर करें।
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अतिरिक्त भुगतान की वसूली को माफ करने का प्रस्ताव
इतना ही नहीं, 'नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक' की ओर से यह भी कहा गया कि अगले चार वर्षों में रिटायर होने वाले सभी कर्मचारियों के पिछले वेतन निर्धारण आदेशों का भी ऑडिट किया जाए। इस कार्यालय ज्ञापन के जारी होने के बाद भी, व्यय विभाग को अतिरिक्त भुगतान की वसूली को माफ करने के प्रस्ताव मिल रहे हैं। इसका मतलब, संबंधित मंत्रालयों ने डीओपीटी के आदेश का ठीक तरह से पालन नहीं किया।
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मंत्रालयों-विभागों से मांगी है ये जानकारी
'नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक' ने पूछा है कि वेतन निर्धारण आदेशों के समय पर ऑडिट होने के बारे में तय निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं। वेतन निर्धारण के तीन महीने के भीतर ऑडिट की जरूरत होने के बावजूद, सरकारी कर्मचारियों की सेवा के आखिरी समय में ऐसी कमियां क्यों सामने आती हैं, इसके क्या कारण हैं। मंत्रालयों-विभागों में ऑडिटरों द्वारा ऑडिट/निरीक्षण के दौरान आने वाली चुनौतियां (यदि कोई हों), जिनके कारण ऐसे मामले पकड़ में नहीं आते, उनके बारे में बताया जाए। ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए की गई कार्रवाई (यदि कोई हो) का ब्यौरा दिया जाए।
गूगल फॉर्म के माध्यम से दें जानकारी
मंत्रालयों-विभागों को 'नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक' की ओर से पूछे गए सवालों का जवाब एक सप्ताह के भीतर देना होगा। इसके लिए मंत्रालयों-विभागों के तहत काम करने वाले इंटरनल ऑडिट विंग्स से आग्रह किया गया है कि वे ऊपर बताए गए बिंदुओं पर अपनी विस्तृत जानकारी-टिप्पणियां अविलंब भेजें। यह जानकारी ईमेल पर दें। इसके अलावा मंत्रालय-विभाग, ईमेल के जरिए भेजे गए गूगल फॉर्म को भरकर उक्त सवालों का जवाब दे सकते हैं।