{"_id":"6a7f11366b8abcd6c20938cb","slug":"supriya-sule-fcra-bill-foreign-donations-ashram-schools-chakan-2026-08-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘अवैध पैसा रोको, शिक्षा-इलाज के लिए वैध मदद नहीं’: FCRA बिल पर सुले का सरकार से सवाल, दे डाली ये नसीहत","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
‘अवैध पैसा रोको, शिक्षा-इलाज के लिए वैध मदद नहीं’: FCRA बिल पर सुले का सरकार से सवाल, दे डाली ये नसीहत
Fri, 14 Aug 2026 06:29 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 14 Aug 2026 06:29 PM IST
सार
सुप्रिया सुले ने विदेशी चंदे के नए प्रस्ताव से लेकर महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों और चाकण के उद्योगों तक सरकार से सवाल किए। उनका जोर दो बातों पर रहा, वैध विदेशी मदद पर रोक न लगे और बच्चों की शिक्षा-स्वास्थ्य को राजनीति से ऊपर रखा जाए। उन्होंने और क्या-क्या कहा? जानिए...
विज्ञापन
सुप्रिया सुले, लोकसभा सांसद
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने शुक्रवार को विदेशी चंदे के प्रस्तावित नियमों पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक संगठनों के लिए मिलने वाली वैध विदेशी मदद में बाधा नहीं आनी चाहिए। सुले ने कहा कि सरकार को विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 पर जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेना चाहिए।
क्या वैध विदेशी मदद को भी शक की नजर से देखा जाएगा?
सुप्रिया सुले ने आगे कहा कि अगर विदेशी पैसा अवैध है या ‘गंदा धन’ है तो सरकार सख्त कार्रवाई करे। लेकिन पोलियो टीकाकरण, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा के लिए मिलने वाली वैध मदद पर संदेह नहीं होना चाहिए। उन्होंने गरीब और कामकाजी परिवारों के कल्याण के लिए मिलने वाली सहायता को भी इसी दायरे में रखा।
लोकसभा ने विरोध के बीच विधेयक को 31 सदस्यीय संयुक्त समिति के पास भेजा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि विधेयक अल्पसंख्यकों और गैर सरकारी संगठनों को निशाना बनाता है। उन्होंने इसे वापस लेने की मांग की है। सरकार ने आरोप खारिज किया है। उसका कहना है कि विधेयक का मकसद विदेशी चंदे को नियंत्रित करना है। इसका किसी धर्म से संबंध नहीं है।
विज्ञापन
विधेयक में क्या प्रस्ताव है?
विदेशी अंशदान विनियमन विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। इसमें गैर सरकारी संगठनों और विदेशी फंडिंग पर सरकारी निगरानी बढ़ाने का प्रस्ताव है। किसी संगठन का विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम का लाइसेंस रद्द होने पर उसकी संपत्तियों के प्रबंधन और निपटारे के लिए एक नामित प्राधिकरण बनाने का भी प्रस्ताव है।
यह भी पढ़ें: जनगणना ड्यूटी या बच्चों की पढ़ाई: कलकत्ता हाईकोर्ट ने पूछा- रविवार को भी काम करेंगे शिक्षक, फिर आराम कब?
मामले से जुड़ी बड़ी बातें क्या?
महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में 584 मौतों पर क्यों उठे सवाल?
सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र के पुराने आश्रम स्कूलों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने पहले बनी समितियों की रिपोर्ट मंगाने की मांग की। साथ ही तत्काल बैठक बुलाकर स्थिति की समीक्षा करने को कहा।
अधिकारियों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में राज्य के आश्रम स्कूलों में औसतन करीब एक छात्र की रोज मौत हुई। इस दौरान सरकारी और सरकार से सहायता प्राप्त आवासीय संस्थानों में कुल 584 छात्रों की मौत हुई। मौतों के कारणों में सांप का काटना, सिकल सेल बीमारी, गंभीर बीमारियां, हादसे और आत्महत्या शामिल हैं। सुले ने कहा कि जिला कलेक्टर स्कूलों की समीक्षा करें। उन्हें एक महीने के भीतर रिपोर्ट देनी चाहिए। उन्होंने समीक्षा में राजनीतिक दलों से जुड़े जनप्रतिनिधियों को भी शामिल करने की बात कही। उनका कहना था कि बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए।
चाकण से 20 कंपनियां क्यों जा रही हैं?
सुले ने पुणे के चाकण औद्योगिक क्षेत्र का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यातायात जाम, प्रदूषण, पानी, बिजली और खराब सड़कों की समस्या के कारण 20 कंपनियां क्षेत्र से बाहर जा रही हैं। सुप्रिया सुले ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम की स्थापना शरद पवार के कार्यकाल में हुई थी। उन्होंने मौजूदा ‘डबल इंजन सरकार’ के दौरान स्थिति को चिंता का विषय बताया। उन्होंने दावा किया कि गरीब परिवारों के लोगों की नौकरियां जा रही हैं। सुले ने सरकार से पूछा कि श्रमिकों और उद्योगों की समस्याओं पर उसका क्या जवाब है।
विज्ञापन
क्या वैध विदेशी मदद को भी शक की नजर से देखा जाएगा?
सुप्रिया सुले ने आगे कहा कि अगर विदेशी पैसा अवैध है या ‘गंदा धन’ है तो सरकार सख्त कार्रवाई करे। लेकिन पोलियो टीकाकरण, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा के लिए मिलने वाली वैध मदद पर संदेह नहीं होना चाहिए। उन्होंने गरीब और कामकाजी परिवारों के कल्याण के लिए मिलने वाली सहायता को भी इसी दायरे में रखा।
विज्ञापन
लोकसभा ने विरोध के बीच विधेयक को 31 सदस्यीय संयुक्त समिति के पास भेजा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि विधेयक अल्पसंख्यकों और गैर सरकारी संगठनों को निशाना बनाता है। उन्होंने इसे वापस लेने की मांग की है। सरकार ने आरोप खारिज किया है। उसका कहना है कि विधेयक का मकसद विदेशी चंदे को नियंत्रित करना है। इसका किसी धर्म से संबंध नहीं है।
विज्ञापन
विधेयक में क्या प्रस्ताव है?
विदेशी अंशदान विनियमन विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। इसमें गैर सरकारी संगठनों और विदेशी फंडिंग पर सरकारी निगरानी बढ़ाने का प्रस्ताव है। किसी संगठन का विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम का लाइसेंस रद्द होने पर उसकी संपत्तियों के प्रबंधन और निपटारे के लिए एक नामित प्राधिकरण बनाने का भी प्रस्ताव है।
यह भी पढ़ें: जनगणना ड्यूटी या बच्चों की पढ़ाई: कलकत्ता हाईकोर्ट ने पूछा- रविवार को भी काम करेंगे शिक्षक, फिर आराम कब?
मामले से जुड़ी बड़ी बातें क्या?
- संयुक्त समिति में 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा सदस्य हैं।
- समिति को 2026 के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक रिपोर्ट देनी है।
- सुले ने विधेयक पर जल्दबाजी न करने की मांग की।
- उन्होंने सभी दलों को विश्वास में लेने को कहा।
महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में 584 मौतों पर क्यों उठे सवाल?
सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र के पुराने आश्रम स्कूलों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने पहले बनी समितियों की रिपोर्ट मंगाने की मांग की। साथ ही तत्काल बैठक बुलाकर स्थिति की समीक्षा करने को कहा।
अधिकारियों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में राज्य के आश्रम स्कूलों में औसतन करीब एक छात्र की रोज मौत हुई। इस दौरान सरकारी और सरकार से सहायता प्राप्त आवासीय संस्थानों में कुल 584 छात्रों की मौत हुई। मौतों के कारणों में सांप का काटना, सिकल सेल बीमारी, गंभीर बीमारियां, हादसे और आत्महत्या शामिल हैं। सुले ने कहा कि जिला कलेक्टर स्कूलों की समीक्षा करें। उन्हें एक महीने के भीतर रिपोर्ट देनी चाहिए। उन्होंने समीक्षा में राजनीतिक दलों से जुड़े जनप्रतिनिधियों को भी शामिल करने की बात कही। उनका कहना था कि बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए।
चाकण से 20 कंपनियां क्यों जा रही हैं?
सुले ने पुणे के चाकण औद्योगिक क्षेत्र का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यातायात जाम, प्रदूषण, पानी, बिजली और खराब सड़कों की समस्या के कारण 20 कंपनियां क्षेत्र से बाहर जा रही हैं। सुप्रिया सुले ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम की स्थापना शरद पवार के कार्यकाल में हुई थी। उन्होंने मौजूदा ‘डबल इंजन सरकार’ के दौरान स्थिति को चिंता का विषय बताया। उन्होंने दावा किया कि गरीब परिवारों के लोगों की नौकरियां जा रही हैं। सुले ने सरकार से पूछा कि श्रमिकों और उद्योगों की समस्याओं पर उसका क्या जवाब है।