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West Bengal: तृणमूल कांग्रेस में बढ़ी कलह, अब MLA कुणाल घोष ने सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय पर लगाए गंभीर आरोप
एएनआई, कोलकाता
Published by: Pavan
Updated Sun, 14 Jun 2026 05:50 PM IST
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सार
तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने कहा है कि सुदीप बंद्योपाध्याय ने ममता बनर्जी के साथ विश्वासघात किया है और अब दिल्ली में भाजपा नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। दरअसल, शनिवार को टीएमसी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से उनके आवास पर मुलाकात की थी। इस मुलाकात में बागी सांसद शताब्दी रॉय भी मौजूद थीं।
कुणाल घोष, विधायक, तृणमूल कांग्रेस
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी राजनीतिक संकट के बीच पार्टी विधायक कुणाल घोष ने वरिष्ठ नेता और सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय पर तीखा हमला बोला है। कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि सुदीप बंद्योपाध्याय ने पार्टी संगठन को कमजोर कर दिया है और अब भाजपा नेताओं के साथ मुलाकात कर रहे हैं।
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'सुदीप बंद्योपाध्याय ने ममता बनर्जी के साथ विश्वासघात किया'
रविवार को मीडिया से बातचीत के दौरान कुणाल घोष ने कहा कि उन्हें टीएमसी नेतृत्व, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी की कार्यसमिति द्वारा उत्तर कोलकाता संगठनात्मक जिले का अध्यक्ष बनाए जाने की जिम्मेदारी मिली है। उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी काफी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि सुदीप बंद्योपाध्याय ने संगठन को पूरी तरह नुकसान पहुंचाया है। घोष का आरोप है कि अन्याय के कारण कई सक्रिय टीएमसी नेताओं को पार्टी छोड़कर दूसरे दलों में जाना पड़ा।
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बगावत करने वाले सांसदों पर भी निशाना
कुणाल घोष ने कहा कि पार्टी के भीतर जो घटनाक्रम चल रहा है, वह टीएमसी के अंदर गहरे राजनीतिक संकट का संकेत है। उन्होंने पार्टी से बगावत करने वाले सांसदों पर भी निशाना साधा। घोष ने सवाल उठाया कि जो सांसद टीएमसी के चुनाव चिन्ह पर जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं, वे अपनी सीटों से इस्तीफा क्यों नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि टीएमसी कार्यकर्ताओं और भाजपा विरोधी मतदाताओं ने उन्हें वोट देकर संसद भेजा था। ऐसे में यदि वे पार्टी छोड़ रहे हैं, तो यह सिर्फ टीएमसी ही नहीं बल्कि मतदाताओं के साथ भी विश्वासघात है। घोष ने इसे राजनीतिक नैतिकता की कमी बताया।
सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष से मिलेगा सांसदों का गुट
गौरतलब है कि टीएमसी इस समय बड़े राजनीतिक संकट का सामना कर रही है। पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 58 विधायक बगावत कर चुके हैं। वहीं लोकसभा में काकोली घोष दस्तिदार के नेतृत्व में 20 सांसदों ने भी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसके अलावा राज्यसभा के तीन सांसद- सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश बराइक, अपनी सदस्यता और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे चुके हैं। इस बीच बागी गुट, जो खुद को 'असली टीएमसी' बता रहा है, सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करेगा। बागी सांसद लोकसभा में अपने लिए अलग बैठने की व्यवस्था की मांग करने वाले हैं।
यह भी पढ़ें- पश्चिम बंगाल के बाद महाराष्ट्र में 'खेला': उद्धव ठाकरे ने क्यों बुलाई आपातकालीन बैठक? समझें सियासी मायने
हस्ताक्षर जालसाजी मामले में CID के समक्ष पेश हुए कुणाल घोष
उधर, एक अन्य मामले में कुणाल घोष रविवार को कोलकाता स्थित भवानी भवन मुख्यालय पहुंचे, जहां कथित हस्ताक्षर जालसाजी मामले की जांच कर रही सीआईडी ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था। रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने बताया कि उन्हें पहले भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था और इस बार संभवतः कुछ अतिरिक्त सवालों के जवाब देने के लिए बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि वह हमेशा जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करते रहे हैं और आगे भी ऐसा ही करेंगे।
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'सुदीप बंद्योपाध्याय ने ममता बनर्जी के साथ विश्वासघात किया'
रविवार को मीडिया से बातचीत के दौरान कुणाल घोष ने कहा कि उन्हें टीएमसी नेतृत्व, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी की कार्यसमिति द्वारा उत्तर कोलकाता संगठनात्मक जिले का अध्यक्ष बनाए जाने की जिम्मेदारी मिली है। उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी काफी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि सुदीप बंद्योपाध्याय ने संगठन को पूरी तरह नुकसान पहुंचाया है। घोष का आरोप है कि अन्याय के कारण कई सक्रिय टीएमसी नेताओं को पार्टी छोड़कर दूसरे दलों में जाना पड़ा।
बगावत करने वाले सांसदों पर भी निशाना
कुणाल घोष ने कहा कि पार्टी के भीतर जो घटनाक्रम चल रहा है, वह टीएमसी के अंदर गहरे राजनीतिक संकट का संकेत है। उन्होंने पार्टी से बगावत करने वाले सांसदों पर भी निशाना साधा। घोष ने सवाल उठाया कि जो सांसद टीएमसी के चुनाव चिन्ह पर जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं, वे अपनी सीटों से इस्तीफा क्यों नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि टीएमसी कार्यकर्ताओं और भाजपा विरोधी मतदाताओं ने उन्हें वोट देकर संसद भेजा था। ऐसे में यदि वे पार्टी छोड़ रहे हैं, तो यह सिर्फ टीएमसी ही नहीं बल्कि मतदाताओं के साथ भी विश्वासघात है। घोष ने इसे राजनीतिक नैतिकता की कमी बताया।
सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष से मिलेगा सांसदों का गुट
गौरतलब है कि टीएमसी इस समय बड़े राजनीतिक संकट का सामना कर रही है। पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 58 विधायक बगावत कर चुके हैं। वहीं लोकसभा में काकोली घोष दस्तिदार के नेतृत्व में 20 सांसदों ने भी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसके अलावा राज्यसभा के तीन सांसद- सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश बराइक, अपनी सदस्यता और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे चुके हैं। इस बीच बागी गुट, जो खुद को 'असली टीएमसी' बता रहा है, सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करेगा। बागी सांसद लोकसभा में अपने लिए अलग बैठने की व्यवस्था की मांग करने वाले हैं।
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हस्ताक्षर जालसाजी मामले में CID के समक्ष पेश हुए कुणाल घोष
उधर, एक अन्य मामले में कुणाल घोष रविवार को कोलकाता स्थित भवानी भवन मुख्यालय पहुंचे, जहां कथित हस्ताक्षर जालसाजी मामले की जांच कर रही सीआईडी ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था। रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने बताया कि उन्हें पहले भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था और इस बार संभवतः कुछ अतिरिक्त सवालों के जवाब देने के लिए बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि वह हमेशा जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करते रहे हैं और आगे भी ऐसा ही करेंगे।