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Karnataka: 'शिवकुमार आलाकमान के फैसले का कर रहे इंतजार', नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच बोले डीके सुरेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 20 Jan 2026 04:41 PM IST
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सार
डीके सुरेश ने बताया कि डीके शिवकुमार सत्ता परिवर्तन को लेकर आलाकमान के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। राहुल गांधी ने सही समय पर निर्णय का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा शिवकुमार पार्टी की एकता और अनुशासन को सबसे ऊपर रखते हैं। वे पार्टी के एक अनुशासित है।
डीके शिवकुमार और डीके सुरेश
- फोटो : ANI
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विस्तार
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के भाई और पूर्व सांसद डीके सुरेश ने मंगलवार को जानकारी दी कि नेतृत्व के मुद्दे पर शिवकुमार कांग्रेस आलाकमान के फैसले का शांति से इंतजार कर रहे हैं। मीडिया से बात करते हुए सुरेश ने कहा कि शिवकुमार पार्टी के एक अनुशासित सिपाही हैं। वे पार्टी और विधायकों की भलाई के लिए काम कर रहे हैं।
सुरेश ने बताया कि वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने भरोसा दिया है कि सही समय आने पर उचित फैसला लिया जाएगा। मैसूर में हुई बैठक में भी राहुल गांधी ने यही बात कही थी। सुरेश ने कहा, "पार्टी और सभी 140 विधायकों को एकजुट रखने के लिए मेरे भाई धैर्यपूर्वक फैसले का इंतजार कर रहे हैं।"
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क्या धैर्य की कोई समय सीमा है, इस पर उन्होंने कहा, सत्ता किसी को आसानी से नहीं मिलती। अगर यह मेरे भाई की किस्मत में लिखा है, तो वे मुख्यमंत्री जरूर बनेंगे। बिना सब्र के यह पद हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने 2028 के चुनाव से पहले पार्टी में एकता बनाए रखने पर जोर दिया। शिवकुमार की पार्टी अनुशासन के प्रति प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए, सुरेश ने कहा, "वह पार्टी अध्यक्ष भी हैं और उन्हें सबसे पहले अनुशासन बनाए रखना चाहिए, जिसका वह लगन से पालन कर रहे हैं।"
कर्नाटक में सत्ता की खींचतान तब तेज हो गई है जब कांग्रेस सरकार ने 20 नवंबर को अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा समय पूरा कर लिया। इसके बाद मुख्यमंत्री पद में संभावित बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं। यह अटकलें 2023 में सरकार गठन के दौरान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच कथित सत्ता-साझाकरण समझौते से जुड़ी हैं।
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जब सुरेश से पूछा गया कि शिवकुमार के समर्थकों को कब तक सब्र रखना चाहिए, तो सुरेश ने 22 से 31 जनवरी तक होने वाले विधानसभा सत्र का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सत्र के बाद देखेंगे कि हाईकमान क्या फैसला लेता है। उन्होंने यह भी साफ किया कि एक नेता को वोक्कालिगा, लिंगायत और दलित समेत सभी का समर्थन चाहिए होता है। सिर्फ एक समुदाय को खुश करके राजनीति नहीं हो सकती। सुरेश ने भरोसा जताया कि राहुल गांधी और पार्टी नेतृत्व कोई भी फैसला लेने से पहले सभी की राय लेंगे।
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सुरेश ने बताया कि वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने भरोसा दिया है कि सही समय आने पर उचित फैसला लिया जाएगा। मैसूर में हुई बैठक में भी राहुल गांधी ने यही बात कही थी। सुरेश ने कहा, "पार्टी और सभी 140 विधायकों को एकजुट रखने के लिए मेरे भाई धैर्यपूर्वक फैसले का इंतजार कर रहे हैं।"
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क्या धैर्य की कोई समय सीमा है, इस पर उन्होंने कहा, सत्ता किसी को आसानी से नहीं मिलती। अगर यह मेरे भाई की किस्मत में लिखा है, तो वे मुख्यमंत्री जरूर बनेंगे। बिना सब्र के यह पद हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने 2028 के चुनाव से पहले पार्टी में एकता बनाए रखने पर जोर दिया। शिवकुमार की पार्टी अनुशासन के प्रति प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए, सुरेश ने कहा, "वह पार्टी अध्यक्ष भी हैं और उन्हें सबसे पहले अनुशासन बनाए रखना चाहिए, जिसका वह लगन से पालन कर रहे हैं।"
कर्नाटक में सत्ता की खींचतान तब तेज हो गई है जब कांग्रेस सरकार ने 20 नवंबर को अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा समय पूरा कर लिया। इसके बाद मुख्यमंत्री पद में संभावित बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं। यह अटकलें 2023 में सरकार गठन के दौरान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच कथित सत्ता-साझाकरण समझौते से जुड़ी हैं।
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