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CAPF: सीएपीएफ कैडर अफसरों के समर्थन में आए कांग्रेस अध्यक्ष 'खरगे', पीएम मोदी को लिखे पत्र में कही ये बात

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: Sandhya Kumari Updated Mon, 16 Mar 2026 06:37 PM IST
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सार

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने की मांग की। यह फैसला सीएपीएफ कैडर अधिकारियों की पदोन्नति और अधिकारों से जुड़ा है, जिन्हें लंबे समय से न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

Congress President Kharge comes in support of CAPF officers letter written to PM Modi
CAPF - फोटो : एएनआई
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विस्तार

कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के कैडर अफसरों के समर्थन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। अपने पत्र में खरगे ने पीएम मोदी से आग्रह किया है कि वे सुप्रीम कोर्ट द्वारा कैडर अफसरों के हितों से संबंधित जो फैसला दिया गया था, उसे लागू कराने के लिए तुरंत हस्तक्षेप करें। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सीएपीएफ के उन कैडर अफसरों को राहत मिली थी, जो अपने हितों, खासतौर से 'पदोन्नति' एवं दूसरे आर्थिक फायदों के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे थे। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मूल भावना के साथ लागू किया जाए। इस तरह के मामले में सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटने के लिए 'वैधानिक हस्तक्षेप' का सहारा लेना, यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के 'स्तंभ' यानी कैडर अफसरों के उत्साह को तोड़ने वाला होगा। 

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मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने पत्र में लिखा है कि सीएपीएफ अधिकारी, सीमा प्रबंधन, आंतरिक सुरक्षा और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की रक्षा के लिए एक रीढ़ का काम करते हैं। वे विषम परिस्थितियों में नागरिकों की रक्षा सुनिश्चित करते हैं। इन अधिकारियों को समय पर न तो पदोन्नति मिल रही है और न ही दूसरे वित्तीय फायदे। इसके लिए इन कैडर अफसरों को अदालतों की मदद लेने के लिए मजबूर किया गया है। 

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पिछले साल 23 मई को सीएपीएफ कैडर अफसरों के करियर प्रोग्रेशन के संबंधित एक केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सीएपीएफ में 'एसएजी' (वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड) स्तर तक के पदों पर आईपीएस की प्रतिनियुक्ति को सरकार, अगले दो साल में धीरे-धीरे कम करे। इन बलों में आईपीएस के चलते सीएपीएफ के कैडर अधिकारी, पदोन्नति में पिछड़ जाते हैं। उन्हें नेतृत्व का अवसर नहीं मिल पाता। सभी कार्यों के लिए 'संगठित समूह ए सेवा' (ओजीएएस) पैटर्न' लागू हो। सेवा और भर्ती नियमों में बदलाव हो। छह महीने में 'कैडर रिव्यू' किया जाए। 

केंद्र सरकार ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 'पुनर्विचार याचिका' दायर की, मगर वह भी खारिज हो गई। अवमानना केस में सरकार को नोटिस जारी हो गया। अब सरकार के पास, सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए वैधानिक संशोधन के अलावा दूसरा विकल्प नहीं बचा। इसके चलते अब केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 लाया गया है। इसे कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। अब इसे संसद में पेश करने की तैयारी हो रही है। 

कांग्रेस पार्टी के नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने एक्स पर कांग्रेस अध्यक्ष खरगे के पत्र को टैग करते हुए लिखा, 17 साल का मुकदमा, सुप्रीम कोर्ट के दो स्पष्ट आदेश, एक खारिज पुनर्विचार याचिका, अब इन सबको रद्द करने के लिए एक विधेयक, ताकि परोक्ष रूप से सीएपीएफ पर आईपीएस का नियंत्रण बहाल किया जा सके। यह 'सुधार' नहीं है, बल्कि कानून के शासन और उन हजारों कैडर अधिकारियों पर सीधा हमला है, जिन्होंने अपना जीवन भारतीय सीमाओं और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की रक्षा करने, महत्वपूर्ण सार्वजनिक हस्तियों को सुरक्षा प्रदान करने, आपदा प्रबंधन करने और आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में व्यतीत किया है। 

जब न्यायालय ने सीएपीएफ ग्रुप ए को सभी कैडर मामलों के लिए संगठित सेवा के रूप में मान्यता दी है और आईपीएस प्रतिनियुक्ति में चरणबद्ध कमी का आदेश दिया है, तो संसद को एक शक्तिशाली लॉबी के लिए अपीलीय मंच नहीं बनाया जा सकता। यह मामला संस्थाओं के प्रति सम्मान, जमीनी स्तर पर तैनात बलों की गरिमा और सेवा में समानता के मूलभूत सिद्धांत से संबंधित है। 

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